2020 में जब GRAP (ग्रेडेड रेस्पॉन्स एक्शन प्लान) शुरू हुआ, तब ज़्यादातर सख्त कदम तभी उठते थे जब हवा 'गंभीर' से भी बदतर हो चुकी हो। अब तस्वीर बदली है। CAQM ने हर साल की तरह इस बार भी अनुसूची बदली है और कई उपाय हल्के चरणों में खिसका दिए हैं, ताकि कार्रवाई हवा बिगड़ने से पहले शुरू हो।

पहले बनाम अब: GRAP 2026 में क्या बदला

ThePrint के अनुसार वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने 28 सितंबर 2026 को दिल्ली-NCR के लिए GRAP में संशोधन किया। डीज़ल जनरेटर सेट और अंतर-राज्यीय बसों से जुड़ी कार्रवाई चरण II से हटाकर चरण I में कर दी गई है।

चरण III में BS-III पेट्रोल और BS-IV डीज़ल कारों पर रोक अब हरियाणा के सोनीपत तक, और गाज़ियाबाद, फरीदाबाद व गौतमबुद्ध नगर के सीमावर्ती इलाकों तक बढ़ा दी गई है। CAQM सदस्य एस.डी. अत्री के अनुसार नागरिक चार्टर में कदमों की संख्या 22 से बढ़ाकर 34 की गई है।

Mint की रिपोर्ट के अनुसार संशोधित ढांचे में चार चरणों में कुल 48 कार्रवाइयां हैं। Sunday Guardian के मुताबिक 1 अक्टूबर से 'पीयूसीसी नहीं, तो ईंधन नहीं' जैसे नियम भी सख्त किए जा रहे हैं।

यह बदलाव अचानक नहीं आया। आकाशवाणी के अनुसार नवंबर 2025 में CAQM ने पहले ही चरण IV के कई कदम चरण III में और चरण III के कदम चरण II में खिसकाए थे। 2026 की अनुसूची उसी सिलसिले की अगली कड़ी है, जिसमें चरण II के कुछ उपाय चरण I में आ गए हैं।

पहला कदम: AQI पढ़ा जाता है और चरण तय होता है

GRAP किसी की मर्ज़ी से नहीं, हवा की गुणवत्ता से चलता है। दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) जिस सीमा में पहुंचता है, उसी के हिसाब से चरण लागू होता है। आकाशवाणी की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार चरण II, III और IV के AQI दायरे नीचे दिए गए हैं।

चरणदिल्ली का AQIश्रेणी
चरण I201 से 300खराब
चरण II301 से 400बहुत खराब
चरण III401 से 450गंभीर
चरण IV450 से ऊपरगंभीर प्लस

उदाहरण के लिए अक्टूबर 2024 में दिल्ली का AQI 234 ('खराब') पहुंचा, तो आकाशवाणी के अनुसार पूरे NCR में चरण I लागू कर दिया गया था।

दिलचस्प यह है कि चरण बदलने का फैसला सिर्फ मौजूदा AQI पर नहीं, अनुमान पर भी टिक सकता है। 2023 की अधिसूचना में आयोग ने कहा था कि कार्रवाई तब होगी जब AQI तय सीमा पार कर जाए या पार करने की आशंका हो।

दूसरा कदम: हर चरण में कौन-सी कार्रवाई

चरण जितना ऊपर जाता है, पाबंदियां उतनी कड़ी होती हैं। चरण I में धूल रोकने, कचरा उठाने और यातायात प्रबंधन जैसे कदम आते हैं। चरण III में, आकाशवाणी की नवंबर 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, गैर-ज़रूरी निर्माण पर रोक, पुरानी गाड़ियों पर पाबंदी और कक्षा 5 तक हाइब्रिड पढ़ाई जैसे उपाय आते हैं।

Officenewz के अनुसार संशोधित योजना में चरण IV पर भारी ट्रकों के दिल्ली में प्रवेश पर रोक है और सिर्फ BS-VI या उससे साफ ईंधन वाली गाड़ियों को छूट मिलती है। पिछले साल नवंबर में कुछ कदम चरण IV से चरण III में खिसकाए गए थे, जैसे 50% कर्मचारियों से दफ्तर चलाना।

निर्माण स्थलों पर निगरानी भी बढ़ी है। 2021 के निर्देशों के तहत 500 वर्ग मीटर या उससे बड़े निर्माण को राज्य प्रदूषण बोर्ड के पोर्टल पर पंजीकरण और कैमरे लगाने होते हैं। अब यही नियम नगरीय निकायों से बाहर के औद्योगिक इलाकों, राजमार्ग गलियारों और विकास क्षेत्रों पर भी लागू होगा।

NCR के लिए मतलब: एक काल्पनिक हफ्ते का हिसाब

मान लीजिए सोमवार को AQI 240 है और एक डीज़ल जनरेटर चल रहा है। चरण I की नई अनुसूची में यह कार्रवाई पहले से कसी जाती है, जबकि पिछले साल यह चरण II का इंतज़ार करती थी। गुरुवार तक AQI 340 हो जाए तो चरण II की अतिरिक्त पाबंदियां जुड़ेंगी।

रविवार तक 420 पर पहुंचने पर चरण III लगेगा, और सोनीपत में रहने वाले BS-IV डीज़ल कार मालिक पर भी वही रोक लागू होगी जो अब तक सिर्फ दिल्ली और पुराने NCR ज़िलों में थी। यह हमारा बनाया उदाहरण है, कोई असली मामला नहीं, पर इससे दिखता है कि एक चरण की देरी कितनी कड़ी पाबंदी को आगे टाल सकती है।

ध्यान रहे कि दिल्ली सरकार और पर्यावरण मंत्रालय ने 1 नवंबर से निर्माण पर रोक और सरकारी कर्मचारियों के लिए घर से काम जैसे कदम अलग से घोषित किए हैं। CAQM ने साफ कहा कि ये उसके दायरे से स्वतंत्र हैं। हमने इस साल पराली जलाने के बदलते नक्शे पर पहले लिखा था, जो इसी मौसम के प्रदूषण का बड़ा स्रोत है।

जो अभी पता नहीं

यह साफ नहीं कि संशोधित अनुसूची असली प्रदूषण घटाने में पिछले साल से कितनी बेहतर होगी, क्योंकि उसके नतीजे सर्दी बीतने के बाद ही आंकड़ों में दिखेंगे। यह भी तय नहीं कि नियम ज़मीन पर कितनी सख्ती से लागू होंगे, खासकर नई जोड़ी गई सोनीपत जैसी सीमाओं पर।

निगरानी का सवाल भी बड़ा है। CSE की State of India's Environment 2026 रिपोर्ट के अनुसार सिर्फ 15% भारतीय आबादी किसी वायु-निगरानी केंद्र के 10 किलोमीटर के दायरे में रहती है। इसी कमी पर हमने बिहार के कम लागत वाले सेंसर वाली रिपोर्ट में लिखा था।

एक और बात अभी साफ नहीं है: चरण की घोषणा दिल्ली के औसत AQI पर होती है, जबकि अलग-अलग इलाकों में हवा काफी अलग हो सकती है। इसलिए किसी खास मोहल्ले के लोगों के लिए चरण की घोषणा और उनके आसपास की असली हवा के बीच फर्क रह सकता है।

आगे क्या देखें

पहला, इस साल चरण I पहली बार कब और किस AQI पर लगता है। दूसरा, 1 नवंबर से लागू होने वाली निर्माण रोक का असर। तीसरा, 500 वर्ग मीटर से बड़े निर्माण स्थलों पर PM10 और PM2.5 के स्तर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने की योजना, जो Times of India के हवाले से Mint ने CAQM की तरफ से बताई है, पर अभी तक अंतिम नहीं है।

GRAP कोई जादू की छड़ी नहीं, एक सीढ़ी है। इस साल उसकी निचली पायदानें थोड़ी और ऊंची कर दी गई हैं, यानी कदम पहले उठेंगे। असली परीक्षा तब होगी जब AQI पहली बार 300 पार करेगा।

स्रोत: CAQM, ThePrint, Mint, आकाशवाणी, Sunday Guardian, CSE