सरकार 10,000 GPU कैसे लेगी, और क्या यह सीधी खरीद है? नहीं। IndiaAI GPU टेंडर का पहला चरण खरीद का नहीं, कंपनियों का पैनल (empanelment) बनाने का है। C-DAC के दस्तावेज़ (RFE) के अनुसार यह प्रक्रिया 7 अक्टूबर 2026 को शुरू हुई और आवेदन 29 अक्टूबर 2026 को दोपहर 3:30 बजे बंद होंगे। अभी न किसी को ऑर्डर मिला है, न कीमत तय हुई है।
हेडलाइन में सिर्फ़ ‘10,000 GPU’ दिखता है, पर असली बात दस्तावेज़ की शर्तों में है। नीचे पैनल में घुसने की शर्तें, अंकों का गणित और स्टार्टअप-कॉलेजों पर इसका असर क्रम से रखा गया है।
पहले पैनल, फिर खरीद: दो चरण कैसे चलते हैं
स्कूल की कैंटीन का उदाहरण लीजिए। प्रबंधन पहले ‘मंज़ूर सप्लायर’ की सूची बनाता है, फिर हर महीने उसी सूची की कंपनियों से भाव मँगवाकर काम देता है। C-DAC यही ढाँचा अपना रहा है। RFE के अनुसार चरण-1 सिर्फ़ तकनीकी योग्यता की जाँच है और इसमें कोई कीमत नहीं माँगी गई। कीमत वाली बोली चरण-2 में GeM पोर्टल पर, सूची की कंपनियों के बीच होगी।
| पड़ाव | तारीख और समय (RFE के अनुसार) |
|---|---|
| RFE प्रकाशित | 7 अक्टूबर 2026 |
| प्री-बिड बैठक (ऑनलाइन) | 14 अक्टूबर 2026, सुबह 11 बजे |
| आवेदन की आखिरी तारीख | 29 अक्टूबर 2026, दोपहर 3:30 बजे |
| तकनीकी प्रस्ताव खुलेंगे | 30 अक्टूबर 2026, शाम 4 बजे |
| बोली की वैधता | जमा करने से 180 दिन |
सूची में नाम आने से काम की गारंटी नहीं मिलती। RFE में लिखा है कि पैनल न्यूनतम कारोबार या क्षमता-आरक्षण का वादा नहीं करता। C-DAC चाहे तो पूरा काम एक कंपनी को दे सकता है, या कई में बाँट सकता है। पैनल तीन साल मान्य रहेगा और आगे तीन साल तक बढ़ाया जा सकता है।
पैनल में घुसने की शर्तें
RFE के अनुसार ये शर्तें अनिवार्य हैं। इनमें से एक भी पूरी न हुई तो बात अंकों की गिनती तक पहुँचती ही नहीं।
- कंपनी भारत में पंजीकृत हो: कंपनी, LLP या पार्टनरशिप फर्म।
- भारत में एक ही डेटा सेंटर पर कम से कम 512 AICU लगे हों, या अगले छह महीने में लगाने का OEM का ऑर्डर और स्वीकृति-पत्र हो।
- FY 2023-24, 2024-25 और 2025-26 का औसत सालाना टर्नओवर कम से कम ₹120 करोड़, और 31 मार्च 2026 को नेट वर्थ पॉज़िटिव।
- Tier-III (Rated-3) या ऊपर का डेटा सेंटर, ISO/IEC 27001 प्रमाणपत्र, और भारत में NOC व SOC।
- ब्लैकलिस्टिंग का रिकॉर्ड न हो, और भारत से ज़मीनी सीमा साझा करने वाले देश की कंपनी न हो।
AICU (AI Compute Unit) का मतलब RFE में GPU, TPU और ऐसे ही एक्सेलरेटर से है। जिसने हार्डवेयर अभी लगाया नहीं, सिर्फ़ ऑर्डर दिया है, उसे ₹10 करोड़ की बैंक गारंटी देनी होगी। यह गारंटी एक साल मान्य रहती है और 512 AICU छह महीने में न लगे तो ज़ब्त हो सकती है।
100 में 60 अंक: कहाँ कितना वज़न है
शर्तें पार करने वालों को 100 अंकों पर परखा जाएगा और पैनल में आने के लिए कम से कम 60 चाहिए। सबसे भारी पलड़ा हार्डवेयर का है।
| पैमाना | अधिकतम अंक | कैसे मिलते हैं |
|---|---|---|
| लगी हुई AICU क्षमता | 30 | 512 पर 20, अगले 512 पर 10 और |
| डेटा सेंटर | 15 | 0.5 MW लोड, नवीकरणीय ऊर्जा, लिक्विड या इमर्शन कूलिंग: 5-5 अंक |
| सुरक्षा प्रमाणपत्र | 15 | ISO 20000-1 या 22301, ISO 27017, ISO 27018, SOC 1/2, PCI-DSS: 3-3 अंक |
| SOC/SOAR और SASE | 5 | ज़ीरो-ट्रस्ट आधारित व्यवस्था का प्रमाण |
| वित्तीय क्षमता | 15 | ₹120 करोड़ पर 10, हर अतिरिक्त ₹10 करोड़ पर 1 अंक |
| सरकारी या PSU में पुराना काम | 10 | 3 या ज़्यादा प्रोजेक्ट पर 10, दो पर 7, एक पर 5 |
| तकनीकी प्रेज़ेंटेशन | 10 | नेटवर्क, सुरक्षा, ऑर्केस्ट्रेशन और विस्तार की योजना |
एक बारीकी: अगर 512 AICU लगे नहीं हैं और सिर्फ़ ऑर्डर है, तो पहली पंक्ति में सिर्फ़ 10 अंक मिलते हैं, 20 या 30 नहीं।
हमारा आकलन देखिए। मान लें एक मझोले प्रदाता के पास 512 AICU लगे हैं (20), डेटा सेंटर का सिर्फ़ 0.5 MW वाला अंक है (5), दो सुरक्षा प्रमाणपत्र हैं (6), टर्नओवर ठीक ₹120 करोड़ है (10), एक सरकारी प्रोजेक्ट है (5) और प्रेज़ेंटेशन में 8 मिले। कुल 54, यानी बाहर। वही कंपनी 1,024 AICU लगा ले तो 10 अंक और जुड़कर 64 हो जाते हैं।
रिंग-फेंस का मतलब, और डेटा देश में रखने की शर्त
‘रिंग-फेंस’ का सीधा अर्थ है कि C-DAC के लिए तय की गई क्षमता अलग से पहचानी, गिनी और जाँची जा सके। RFE के अनुसार वह क्षमता किसी और ग्राहक को इस तरह नहीं दी जा सकती कि C-DAC की ज़रूरत पर असर पड़े।
कंपनी सिर्फ़ बिचौलिया नहीं बन सकती और काम आगे ठेके पर नहीं दे सकती। हार्डवेयर लीज़ या कोलोकेशन पर हो सकता है, पर पूरी ज़िम्मेदारी बोली जीतने वाली कंपनी की रहेगी।
कंप्यूट Tier A, B और C में बाँटा जा सकता है। RFE में H100, H200 और अगली पीढ़ी के एक्सेलरेटर का ज़िक्र है, और हर यूनिट कम से कम पाँच साल सपोर्ट में रहनी चाहिए। सटीक ब्योरा चरण-2 में आएगा।
डेटा, मेटाडेटा, लॉग, बैकअप और डिज़ास्टर रिकवरी, सब भारत की सीमा में रहेंगे। मंत्रालय, शैक्षणिक संस्थान, स्टार्टअप और शोध संस्थान एक साझा ढाँचे पर चलेंगे, पर हर उपयोगकर्ता का डेटा दूसरे से अलग रखना होगा।
स्टार्टअप, कॉलेज और छोटी कंपनियों के लिए इसका मतलब
उपयोगकर्ता के लिए तस्वीर सरल है: C-DAC के ज़रिये साझा ढाँचे पर कंप्यूट मिलेगा। पर दर, पात्रता और सब्सिडी का कोई ज़िक्र इस RFE में नहीं है। वह सब आगे के दस्तावेज़ों में आना बाकी है।
प्रदाताओं के लिए दीवार ऊँची है। MediaNama के 2024 के लेख के अनुसार तब प्राइमरी बोलीदाता का न्यूनतम औसत टर्नओवर ₹100 करोड़ से घटाकर ₹50 करोड़ किया गया था, जबकि इस RFE में ₹120 करोड़ है। हाँ, न्यूनतम क्लस्टर छोटा है: अब 512 AICU, तब 1,000। दोनों दौर अलग हैं, इसलिए तुलना सीधी नहीं।
GPU की निर्भरता का सवाल भी है। सूची में Nvidia के H100 और H200 जैसे एक्सेलरेटर का नाम है, जबकि अपना चिप बनाने की राह लंबी है। इस पर Indigenous Chip मिशन की सच्चाई और भारत का स्वदेशी Micro-GPU पढ़ना काम आएगा।
डिलीवरी का जोखिम भी है। Communications Today ने अगस्त 2026 में लोकसभा में रखे आँकड़ों के हवाले से लिखा कि IndiaAI मिशन में 237 मंज़ूर प्रोजेक्ट के लिए 93.18 लाख GPU-घंटे स्वीकृत हुए और 15 प्रदाता पैनल में हैं। ₹10 करोड़ की गारंटी का ढाँचा देखकर लगता है कि इस बार वादे और डिलीवरी के बीच की दूरी पर ज़ोर है।
जो अभी साफ़ नहीं है
पहले दौर का आकार RFE में नहीं है। MediaNama ने 8 अक्टूबर को मंत्री अश्विनी वैष्णव के हवाले से लिखा कि पहला टेंडर 5,000 का है। Adgully (9 अक्टूबर) ने C-DAC के 3,000 GPU वाले RFP और सरकारी उपयोग के लिए अलग 10,000 GPU के टेंडर का ज़िक्र किया। दोनों संख्याएँ मेल नहीं खातीं।
उपयोगकर्ताओं की दर, चरण-2 की सेवा-शर्तें (SLA) और शहरों की सूची भी बाकी हैं। MediaNama के अनुसार RFE में शहर बताए ही नहीं गए, सिर्फ़ इतना कि क्षमता कई जगह फैली हो सकती है।
29 अक्टूबर के बाद किन बातों पर नज़र रखें
- 30 अक्टूबर 2026 को तकनीकी प्रस्ताव खुलेंगे। तब दिखेगा कि कितनी कंपनियाँ आईं।
- कितनी कंपनियाँ 60 अंक पार करती हैं। IndiaAI के अनुसार 2024 के दौर में 19 बोलीदाताओं में से 10 सफल रहे थे।
- चरण-2 का पहला दस्तावेज़ और उसमें पहले दौर का साफ़ आकार।
कुल मिलाकर यह टेंडर GPU खरीदने से ज़्यादा भरोसेमंद सप्लायर छाँटने की कवायद है। असली नतीजा तब दिखेगा जब कोई स्टार्टअप या यूनिवर्सिटी लैब इस ढाँचे पर अपना मॉडल चलाएगी। तब तक यह काग़ज़ों की तैयारी है।
स्रोत: C-DAC (RFE C-DAC/GPU/01/2026), MediaNama, IndiaAI, Adgully, Communications Today