21 सितंबर 2026 को दिल्ली में Microsoft ने ऐलान किया कि उसका हैदराबाद डेटा सेंटर अब पूरी तरह चालू हो गया है। पर उसी मंच पर सरकार की तरफ़ से एक सीधी सलाह भी आई: अगली बार डेटा सेंटर बिजली बनने की जगह के पास बनाओ, केबल लैंडिंग स्टेशन के पास नहीं।

Microsoft AI Infrastructure Summit में प्लाक अनवील हुई, तस्वीरें खिंचीं, Puneet Chandok ने मंच से कहा कि निवेश अब असली इमारत बन गया है। ठीक इसी समारोह में MeitY सचिव S Krishnan ने माइक थामा और भविष्य की योजना पर सवाल खड़ा कर दिया।

दिसंबर 2025 का वादा, सितंबर 2026 की हकीकत

दिसंबर 2025 में Nadella की भारत यात्रा के दौरान TechCrunch के अनुसार Microsoft ने $17.5 अरब के निवेश की घोषणा की थी, साथ में हैदराबाद रीजन 'मिड-2026' तक खोलने की बात कही गई थी।

सितंबर 2026 आते-आते Microsoft के अपने बयान के अनुसार यह रकम $20.5 अरब हो गई है, यानी करीब $3 अरब ज़्यादा। यह हमारा आकलन है: नौ महीनों में लगभग 17% बढ़ोतरी, और रीजन 'मिड' के बजाय सितंबर में जाकर लाइव हुआ, यानी घोषित समय से करीब तीन महीने बाद।

इस दौरान निवेश की भाषा भी बदली: पहले यह सिर्फ़ योजना थी, अब कंपनी इसे 'चालू ढांचा' कहकर बुला रही है।

चार शहर, अब एक जैसे 'AI-ready'

Arabian Post और Microsoft के अनुसार हैदराबाद अब भारत का चौथा Azure रीजन है। नीचे चारों की स्थिति एक नज़र में है।

शहरAzure नामभूमिका
पुणेCentral Indiaपुराना रीजन, अब AI-enabled
चेन्नईSouth Indiaपुराना रीजन, अब AI-enabled
मुंबईWest Indiaपुराना रीजन, अब AI-enabled
हैदराबादIndia South Centralनया, 3 availability zones, Asia व Global South का हब

Microsoft के अनुसार सभी चार रीजन अब AI-सक्षम हार्डवेयर और कूलिंग से लैस हैं, इसलिए फ़र्क सिर्फ़ हैदराबाद के नए होने का नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क की क्षमता बदलने का भी है।

पहले सिर्फ़ एक रीजन में AI वर्कलोड चलाना संभव था, अब कंपनी कहती है कि कोई भी संस्था देश के चार अलग-अलग हिस्सों में से चुन सकती है, जिससे डेटा पास रखने और आपदा के समय दूसरे शहर शिफ्ट होने की गुंजाइश बढ़ती है।

रफ़्तार के पीछे की वजह

BCG की एक स्टडी के अनुसार भारत का डेटा सेंटर निर्माण 2030 तक $140-200 अरब का आर्थिक असर बना सकता है, जिसे Microsoft ने अपनी घोषणा में साझा किया।

The Tribune के अनुसार MeitY सचिव Krishnan ने खुद कहा कि Microsoft का यह निर्माण तय समय से आगे चल रहा है, और भारत में डेटा सेंटर को बिजली ग्रिड से जोड़ना यूरोप के कई देशों से भी आसान है।

यानी सिर्फ़ भारत की माँग ही नहीं, बल्कि Google, Amazon और OpenAI जैसे प्रतिद्वंद्वियों की मौजूदगी भी Microsoft को तेज़ी से आगे बढ़ने पर मजबूर कर रही है। हर हफ़्ते किसी न किसी हाइपरस्केलर की भारत में नई घोषणा आती दिख रही है, और इसमें पीछे रहने का मतलब है ग्राहक किसी और के क्लाउड पर चले जाएँ।

मंच पर ही अगली सलाह: बिजली के पास बनाओ

The Tribune के अनुसार Krishnan ने साफ़ कहा, 'मेरा आग्रह होगा कि आगे आप बिजली जहाँ बनती है, उसके पास ही क्षमता लगाएँ, ताकि उसे लंबी दूरी तक न ले जाना पड़े।'

अब तक डेटा सेंटर अक्सर सबमरीन केबल लैंडिंग स्टेशन के पास बनते रहे हैं, जहाँ इंटरनेट की रफ़्तार बेहतर मिलती है। Krishnan के अनुसार अगला चरण बिजली उत्पादन केंद्रों के पास शिफ्ट होना चाहिए, ताकि ट्रांसमिशन की लागत घटे।

यही वह जगह है जहाँ आज का जश्न और आगे की सलाह आमने-सामने आते हैं: कंपनी 'लाइव' का ऐलान कर रही है, सरकार अगले कदम की दिशा पहले से तय कर रही है।

Krishnan ने यह भी कहा कि टैक्स नीति, कारोबार में आसानी और नए टेलिकॉम कानून की वजह से भारत में डेटा सेंटर बनाना और ग्रिड से जोड़ना यूरोप के कई देशों से आसान हो गया है, इसलिए उनकी सलाह किसी शिकायत की तरह नहीं, आगे की योजना की तरह आई।

'ज़ीरो वॉटर' कूलिंग: दावा बड़ा, जांच बाकी

Microsoft के अनुसार हैदराबाद रीजन 'effectively zero water' कूलिंग पर चलता है, जो कंपनी के 2030 तक 'water positive' बनने के लक्ष्य से जुड़ा है। यह दावा कंपनी के अपने बयान से है, किसी स्वतंत्र ऑडिट से पुष्टि सामने नहीं आई।

Microsoft ने यह भी बताया कि तेलंगाना के एलिकट्टा गाँव में भूजल-रिचार्ज कार्यक्रम से जून 2026 तक करीब 50 लाख लीटर अतिरिक्त क्षमता जुड़ी है। यह आँकड़ा भी कंपनी के अपने बयान से है, किसी स्वतंत्र मापन से नहीं।

डेटा सेंटर और पानी की खपत का सवाल दुनिया भर में गरम है, इसलिए 'ज़ीरो वॉटर' जैसे दावों को समय के साथ जाँचते रहना ज़रूरी है।

भारत के लिए इसका मतलब

Microsoft के अनुसार उसने अब तक 1 करोड़ से ज़्यादा भारतीयों को AI स्किल्स दी हैं, 2030 तक 2 करोड़ तक पहुँचने के लक्ष्य के रास्ते पर। तेलंगाना सरकार की Young India Skills University के साथ 600 घंटे का Data Center Academy प्रोग्राम भी चल रहा है।

Krishnan के अनुसार शुरुआत में निर्माण से रोज़गार बनेगा, पर असली फ़ायदा तब मिलेगा जब रिसर्च और डेवलपमेंट भी भारत में आए, जो बेहतर क्वालिटी की नौकरियाँ लाएगा।

Adani Group, Bajaj Finserv, HDFC Bank और PB Pay जैसी कंपनियाँ नए रीजन पर पहले से जुड़ चुकी हैं। Microsoft के अनुसार यह रीजन DPDP कानून और RBI, CERT-In की ज़रूरतों के हिसाब से डेटा भारत में रखने का विकल्प भी देता है।

यह बैंकिंग और वित्तीय कंपनियों के लिए खासतौर पर मायने रखता है, क्योंकि उन्हें अक्सर ग्राहकों का डेटा देश के भीतर ही रखना पड़ता है।

जो अभी पता नहीं, आगे क्या देखें

कई AI सेवाएँ अभी हैदराबाद रीजन में आना बाकी हैं; Microsoft ने सिर्फ़ 'आने वाले महीनों' कहा है, कोई पक्की तारीख नहीं दी। ज़ीरो-वॉटर दावे पर स्वतंत्र पुष्टि भी अभी सामने नहीं है।

आगे तीन चीज़ें देखने लायक हैं: पहला, Microsoft Foundry जैसी बाकी AI सेवाओं की असल लॉन्च तारीख। दूसरा, भारत-मलेशिया-सिंगापुर के बीच बन रही 3,600 किलोमीटर लंबी I-2SEA सबमरीन केबल, जो 2029 तक तैयार होने का लक्ष्य रखती है। तीसरा, क्या अगला डेटा सेंटर सच में बिजली उत्पादन केंद्र के पास बनता है, या केबल लैंडिंग की पुरानी आदत जारी रहती है।

एक मंच, दो संदेश: कंपनी के लिए यह लॉन्च का दिन था, सरकार के लिए अगली शर्त तय करने का। भारत का AI बुनियादी ढांचा किस रफ़्तार से बढ़ेगा, यह इसी रस्साकशी से तय होगा।

स्रोत: Microsoft, The Tribune, TechCrunch, Arabian Post, BCG