Blue Origin अपने New Glenn रॉकेट की उड़ान दर कई गुना बढ़ाना चाहता है, पर अभी यह योजना और FAA की मंज़ूरी की प्रक्रिया भर है। जनवरी 2025 से अब तक यह रॉकेट सिर्फ़ तीन बार उड़ा है, जबकि कंपनी के संचालन प्रमुख इयान रिचर्डसन के अनुसार दशक के अंत तक हफ्ते में कई उड़ानों की तैयारी है। बीच में मई 2026 का वह विस्फोट भी है, जिसने लॉन्च पैड को भारी नुकसान पहुंचाया।
इस खबर की कई रिपोर्टें अमेरिकी कंपनियों की होड़ पर रुक जाती हैं। यहां हम इसे भारत के 50 उड़ान प्रति वर्ष वाले लक्ष्य के बगल में रखेंगे: कौन-सी कड़ियां मिलती हैं और फ़र्क कहां बहुत बड़ा है।
पहले बनाम अब: तीन उड़ानों से हर हफ्ते की तैयारी तक
16 अक्टूबर को Blue Origin ने Florida में कई ढांचागत घोषणाएं कीं। Spaceflight Now के अनुसार कंपनी Space Coast पर नए लॉन्च पैड जोड़ेगी, जो LC-36 की तर्ज़ पर बनेंगे। नए पैड कहां होंगे, यह घोषणा में नहीं बताया गया।
साथ में दो नए landing vessels (समुद्र में रॉकेट उतारने वाले जहाज़) आएंगे। लौटे हुए booster की सर्विसिंग पास में बन रही vertical integration facility में होगी, और Space Force के साथ मिलकर एक payload processing facility भी बन रही है, जिसे दूसरी कंपनियां भी इस्तेमाल कर सकेंगी।
फैक्टरी की तरफ़ कंपनी Rocket Park में $330 मिलियन लगा रही है। 13.7 लाख वर्ग फुट की यह सुविधा 2027 की गर्मियों तक पूरी होने की उम्मीद है और साल में 150 तक upper stage बना सकेगी। ये stage बड़े 9×4 संस्करण के लिए हैं (Spaceflight Now)।
FAA का गणित: 12 से 50 तक
FAA की सार्वजनिक बैठक की slide deck के अनुसार Blue Origin का वाहन लाइसेंस (VOL 24-133, दिसंबर 2024) LC-36 से साल में 12 उड़ानों की इजाज़त देता है, 5 साल के लिए। कंपनी ने इसे 50 तक बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है।
SpaceNews के हवाले से mediasat के अनुसार FAA ने 29 सितंबर को इस पर draft environmental assessment जारी किया। Spaceflight Now के मुताबिक 22 अक्टूबर को वर्चुअल सार्वजनिक सुनवाई है और 30 अक्टूबर को जनता की राय का दौर बंद होगा।
यानी 50 उड़ानों का आंकड़ा अभी आवेदन है, अनुमति नहीं। अंतिम फ़ैसला इसी प्रक्रिया के बाद आएगा।
आमने-सामने: New Glenn की योजना और भारत का लक्ष्य
दोनों के सामने सालाना 50 का आंकड़ा है, पर शुरुआती स्थिति बहुत अलग है।
| पैमाना | Blue Origin (New Glenn) | भारत (ISRO और निजी उद्योग) |
|---|---|---|
| सामने रखा आंकड़ा | 50 उड़ानें प्रति वर्ष, LC-36A के लिए FAA से मांगी गई | 50 उड़ानें प्रति वर्ष, 2030 तक का लक्ष्य (IN-SPACe) |
| अब तक का रिकॉर्ड | कुल 3 उड़ानें, जनवरी 2025 से | 2016 से 2025 के बीच 51 उड़ानें, औसत 5 से कुछ ज़्यादा सालाना |
| हाल का झटका | मई 2026 में पैड पर विस्फोट; अप्रैल की उड़ान में BlueBird 7 गलत कक्षा में पहुंचा | 12 जनवरी 2026 को PSLV-C62 की विफलता |
| ढांचे पर दांव | $330 मिलियन की upper-stage फैक्टरी, नए पैड, landing vessels | निजी उद्योग से रॉकेट-निर्माण बढ़वाने की योजना (गोयनका के अनुसार) |
बाहर का पैमाना SpaceX है। NASASpaceFlight के अनुसार CRS-35 उसका 2026 का 113वां Falcon 9 मिशन था। हमारा आकलन: 13 अक्टूबर तक के 286 दिनों में यह करीब 2.8 उड़ानें प्रति सप्ताह बैठता है, जबकि भारत का 50 सालाना का लक्ष्य लगभग 1 उड़ान प्रति सप्ताह है (50 ÷ 52)।
यानी Blue Origin का हफ्ते में कई उड़ानों वाला सपना SpaceX की आज की रफ़्तार से मेल खाता है, और SpaceX की Starship Flight 14 की कहानी दिखाती है कि वह इससे भी आगे की दौड़ में है।
भारत के लिए मतलब: सिर्फ़ रॉकेट नहीं, पूरी कड़ी
Outlook India के विश्लेषण के अनुसार रॉकेट-बेड़े की असली रफ़्तार उसकी सबसे कमज़ोर कड़ी तय करती है: इंजन निर्माण, stage की असेंबली या लॉन्च-साइट की तैयारी। Blue Origin की घोषणा इन तीनों पर एक साथ पैसा लगाती दिखती है: नए पैड, फैक्टरी और integration facility।
भारत में यही बहस हर हफ्ते Rocket भेजने की चुनौती वाले लेख में दिखती है। IN-SPACe प्रमुख पवन गोयनका के अनुसार यह काम कोई एक संगठन अकेले नहीं कर सकता, और निजी उद्योग को निर्माण बढ़ाना होगा।
उनके अनुसार भारतीय निजी उद्योग रॉकेट को कक्षा तक पहुंचा चुका है; उसकी पूरी कहानी Vikram-I की पूरी कहानी में है। दूसरा सबक मंज़ूरी का है: Blue Origin को 12 से 50 के लिए सार्वजनिक सुनवाई से गुज़रना पड़ रहा है, यानी ऐसी प्रक्रिया उड़ानों की गिनती से पहले योजना में जोड़नी पड़ती है।
जो अभी पता नहीं: पैड कहां, उड़ान कब
नए पैड की जगहें Blue Origin ने नहीं बताईं (Spaceflight Now)। LC-36A विस्फोट के बाद दोबारा बन रहा है, और 9×4 संस्करण के लिए LC-36B अभी निर्माणाधीन है।
9×4 संस्करण में पहले चरण पर नौ BE-4 इंजन और ऊपरी चरण पर चार BE-3U इंजन होंगे, यानी यह आज उड़ रहे 7×2 से अलग और बड़ा रॉकेट है। इसलिए 150 upper stage वाली फैक्टरी का फ़ायदा तभी दिखेगा जब यह नया संस्करण उड़ान भरे।
Fairing (रॉकेट की नोक का खोल) को दोबारा इस्तेमाल करने की बात अभी सिर्फ़ योजना है। Spaceflight Now के अनुसार CEO डेव लिंप ने मई में सोशल मीडिया पर कहा था कि कंपनी इस पर काम कर रही है।
सबसे बड़ा सवाल भरोसे का है। हफ्ते में कई उड़ानें तभी मायने रखेंगी जब रॉकेट बार-बार ठीक से उड़े, और अभी उसका रिकॉर्ड कुल तीन उड़ानों का है।
आगे क्या देखें: सुनवाई से साल के अंत तक
- 22 अक्टूबर: FAA की वर्चुअल सार्वजनिक सुनवाई।
- 30 अक्टूबर: जनता की राय देने का दौर बंद।
- साल के अंत तक: Spaceflight Now के अनुसार जेफ़ बेज़ोस ने Fox News से कहा है कि कंपनी New Glenn 7×2 को इस साल फिर उड़ाने की कोशिश में है।
इन तीनों में सुनवाई और राय का दौर सबसे पास के पड़ाव हैं, पर असली कसौटी साल के अंत वाली उड़ान है, क्योंकि बाकी योजनाएं उसी के नतीजे पर टिकी हैं।
पश्चिमी तट पर भी शुरुआत है: Spaceflight Now के अनुसार अप्रैल में U.S. Space Force ने Vandenberg के SLC-14 के लिए Blue Origin को अंतिम बातचीत के लिए चुना, पर उसके लिए पूरी पर्यावरण समीक्षा बाकी है।
हफ्ते में कई उड़ानें: अभी कागज़ पर
फिलहाल यह कहानी पैड और फैक्टरी के नक्शों की है, उड़ानों की नहीं। पहले मंज़ूरी आएगी, फिर रॉकेट को अपने रिकॉर्ड में तीन से आगे गिनती जोड़नी होगी। भारत के लिए भी यही क्रम लागू होता है: पैड, फैक्टरी और मंज़ूरी पहले, उड़ानों की गिनती बाद में।
स्रोत: Spaceflight Now, FAA, NASASpaceFlight, IN-SPACe (IANS), Outlook India, Wikipedia