स्पेसएक्स का Starship रॉकेट अब तक सिर्फ करीब एक घंटे की सबऑर्बिटल उड़ानें भरता रहा है, लेकिन 28 सितंबर 2026 को यह पहली बार पूरी तरह ऑर्बिट में पहुंचने की कोशिश करेगा। यह Starship Flight 14 मिशन करीब 10 घंटे लंबा होगा, यानी अब तक की किसी भी उड़ान से नौ गुना ज़्यादा। रॉकेट इस बार असली पेलोड भी ले जा रहा है: 26 अपग्रेडेड Starlink V3 सैटेलाइट।

28 सितंबर को क्या होने वाला है

Space.com के मुताबिक लॉन्च विंडो 28 सितंबर की सुबह 8:15 बजे EDT यानी शाम करीब 5:45 बजे भारतीय समय खुलेगी और 75 मिनट तक खुली रहेगी। उड़ान टेक्सस के Starbase से होगी।

  • बूस्टर: Booster 21, Super Heavy
  • ऊपरी हिस्सा: Ship 41
  • पेलोड: 26 अपग्रेडेड Starlink V3 सैटेलाइट
  • मिशन अवधि: करीब 10 घंटे, Ship के 6 चक्कर पूरे करने के बाद
  • दोनों हिस्से समुद्र में उतरेंगे, इस बार टावर पर नहीं पकड़े जाएंगे

Space.com की रिपोर्ट के मुताबिक 24 सितंबर को रॉकेट का वेट ड्रेस रिहर्सल यानी पूरी तरह ईंधन भरकर काउंटडाउन का पूर्वाभ्यास हुआ। लॉन्च को अभी अमेरिकी नियामक FAA की अंतिम मंजूरी का इंतज़ार है, यानी तारीख आगे भी खिसक सकती है।

V1-V2 से V3 तक: रॉकेट कैसे बदला

अप्रैल 2023 में पहली बार स्टैक होकर उड़ा Starship अब तक 11 उड़ानें भर चुका है। मई 2026 में इसका नया वर्जन V3 पहली बार उड़ा, यानी Flight 12 पर, और अब Flight 14 इसी V3 का तीसरा टेस्ट है।

पहलूपहले (V1/V2)अब (V3)
ऊंचाईकरीब 121 मीटरकरीब 124 मीटर (407 फीट)
इंजनRaptor 2Raptor 3
ग्रिड फिन43, आकार में बड़े
उड़ान की अवधिकरीब 1 घंटा, सबऑर्बिटलकरीब 10 घंटे, ऑर्बिटल
असली पेलोडनहीं, सिर्फ टेस्ट वज़न26 Starlink V3 सैटेलाइट

V3 में बूस्टर और शिप के बीच जुड़ने वाली हॉट-स्टेज रिंग अब बूस्टर से ही जुड़ी रहती है और गिरती नहीं, यानी उसे भी दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। शिप का ईंधन टैंक भी बड़ा किया गया है।

इसे यूं समझें: जैसे कोई ऑटो-रिक्शा चालक हर सवारी के बाद नई गाड़ी नहीं खरीदता, बल्कि वही रिक्शा बार-बार चलाता है, Starship का मकसद भी रॉकेट को उसी तरह बार-बार, बिना फेंके इस्तेमाल करना है।

12 उड़ानों की सीख से यहां तक

Universe Today के मुताबिक V3 की पहली उड़ान से एक दिन पहले पैड के क्विक-डिसकनेक्ट आर्म का एक पिन ठीक से नहीं खुला था, जिससे लॉन्च टालना पड़ा। इंजीनियरों ने ग्राउंड सिस्टम में बदलाव कर अगले दिन उड़ान भरी, हालांकि बूस्टर को उस बार वापस नहीं पकड़ा गया।

ISRO ने भी अपने SSLV रॉकेट में ऐसा ही रास्ता अपनाया है, SSLV के बूस्टर अपग्रेड से इसकी पेलोड क्षमता 100 किलो बढ़ाई गई। फर्क सिर्फ पैमाने का है, तरीका एक जैसा है।

ऑर्बिट में जाना बड़ा दांव क्यों

अब तक Starship सिर्फ सबऑर्बिटल रास्ते पर उड़ा है, यानी पूरी पृथ्वी का चक्कर लगाए बिना ही समुद्र में गिर जाता था। ऑर्बिट में जाना यह साबित करेगा कि Ship असल में सैटेलाइट तैनात कर सकता है और वापस सुरक्षित उतर सकता है।

यह रॉकेट NASA के Artemis कार्यक्रम के लिए भी अहम है, जहां Starship को Blue Origin के Blue Moon लैंडर के साथ चांद पर उतरने का जिम्मा दिया गया है। Moon Base की योजना में ISRO की भूमिका पहले भी बता चुके हैं कि यह पूरा प्रोग्राम कैसे आकार ले रहा है। NASA फिलहाल Artemis 3 मिशन 2027 के आखिर में रखे हुए है।

भारत के लिए इसका मतलब

भारत का अपना Reusable Launch Vehicle यानी RLV प्रोग्राम भी इसी सोच पर टिका है, रॉकेट को बार-बार इस्तेमाल करके लॉन्च लागत घटाना। ISRO ने अब तक कई RLV-LEX लैंडिंग टेस्ट चित्रदुर्ग के एयरोनॉटिकल टेस्ट रेंज में पूरे किए हैं और 2030 तक पूरी तरह दोबारा इस्तेमाल होने वाला दो-चरण वाला ऑर्बिटल सिस्टम बनाने का लक्ष्य रखा है।

निजी क्षेत्र में भी भारत आगे बढ़ रहा है। जुलाई 2026 में Skyroot Aerospace का भारत का पहला निजी ऑर्बिटल रॉकेट उड़ा, यह भी उसी वैश्विक बदलाव का हिस्सा है, जहां निजी कंपनियां रॉकेट टेक्नोलॉजी में सरकार से आगे निकल रही हैं।

दूसरी तरफ Starlink को भारत में GMPCS लाइसेंस मिल चुका है और मुंबई हब के साथ ट्रायल स्पेक्ट्रम पर काम चल रहा है, जबकि OneWeb और Jio-SES पहले से मैदान में हैं। हमारी राय में अगर Starship का ऑर्बिट मिशन कामयाब रहा और लॉन्च लागत घटी, तो Starlink जैसी बड़ी सैटेलाइट कंपनियां भारत के सैटकॉम बाज़ार में और तेज़ी से पैर जमा सकती हैं।

जो अभी पक्का नहीं, आगे क्या देखें

Starship का हीट शील्ड अब तक किसी उड़ान में पूरी तरह दोबारा इस्तेमाल के लायक साबित नहीं हुआ है। ऑर्बिट में ईंधन भरने की तकनीक, जो चांद मिशन के लिए ज़रूरी है, अभी टेस्ट होना बाकी है।

  • क्या FAA 28 सितंबर से पहले लॉन्च लाइसेंस दे देता है
  • क्या Ship असल में 6 चक्कर पूरे कर पाता है और सुरक्षित उतरता है
  • क्या 26 Starlink V3 सैटेलाइट ठीक से तैनात होते हैं

Starship से जुड़े सवाल

Starship Flight 14 कब लॉन्च होगा?

फिलहाल टारगेट 28 सितंबर 2026 है, विंडो सुबह 8:15 बजे EDT यानी शाम करीब 5:45 बजे IST खुलेगी। यह तारीख FAA की अंतिम मंजूरी पर निर्भर है, इसलिए आगे खिसक सकती है।

क्या इस उड़ान में कोई इंसान सवार है?

नहीं, यह पूरी तरह मानवरहित मिशन है। रॉकेट सिर्फ 26 अपग्रेडेड Starlink V3 सैटेलाइट लेकर जा रहा है, कोई क्रू शामिल नहीं है।

Starship कितना बड़ा और ताकतवर है?

V3 वर्जन करीब 124 मीटर यानी 407 फीट लंबा है, NASA के SLS रॉकेट से भी ऊंचा। इसका लिफ्टऑफ थ्रस्ट 1.8 करोड़ पाउंड से ज़्यादा है, यानी अब तक बना सबसे ताकतवर रॉकेट।

इसका भारत से क्या संबंध है?

सीधा संबंध नहीं, लेकिन ISRO का RLV प्रोग्राम भी वही लक्ष्य रखता है जो Starship का है, यानी रॉकेट का दोबारा इस्तेमाल। साथ ही Starlink भारत के सैटकॉम बाज़ार में उतरने की तैयारी में है।

अगर यह मिशन कामयाब रहा, तो यह Starship के लिए टेस्ट फेज़ से आगे बढ़ने का पहला पक्का सबूत होगा। असफल हुआ तो भी स्पेसएक्स अगली उड़ान में सीख जोड़ेगा, यही तरीका अब तक इस रॉकेट को यहां तक लाया है।

स्रोत: Space.com, SpaceX, NASA, ISRO, Universe Today