मेडिकल स्टोर के काउंटर पर दो पत्ते रखे हैं: एक पर Citalopram, दूसरे पर Escitalopram। केमिस्ट्री नोबेल 2026 उसी ‘Es’ के पीछे के विज्ञान को मिला है, क्योंकि Henri Kagan और Kenso Soai ने दिखाया कि दर्पण-प्रतिबिंब जैसे दो रूपों में से एक को कैसे चुना और बढ़ाया जा सकता है।
नाम में फ़र्क़ बस दो अक्षर का है, पर अणु की बनावट में दाएं-बाएं का उलटाव छिपा है। नीचे देखिए कि Nobel समिति ने क्या सराहा, और उसका रास्ता भारत की दवा-दुकानों व कारख़ानों तक कैसे जाता है।
7 अक्टूबर की घोषणा: दो खोजें, एक पुरानी पहेली
Royal Swedish Academy of Sciences ने 7 अक्टूबर 2026 को केमिस्ट्री नोबेल Henri B. Kagan और Kenso Soai को आधा-आधा देने की घोषणा की। Nobel Prize Outreach के अनुसार पुरस्कार असममित कार्बनिक संश्लेषण में नॉन-लिनियर इफ़ेक्ट और स्वतः-उत्प्रेरण (autocatalysis) की खोज के लिए है। Kagan का जन्म 1930 में फ़्रांस में हुआ, Soai का 1950 में हिरोशिमा में।
कई अणु दो रूपों में मिलते हैं, जैसे हमारे दाएं और बाएं हाथ। Nobel समिति के अध्यक्ष Heiner Linke के अनुसार ऐसे अणु chiral कहलाते हैं, जो यूनानी शब्द ‘हाथ’ से बना है। Pharmaceutical Journal के अनुसार शरीर के एंज़ाइम और रिसेप्टर भी chiral होते हैं, इसलिए वे दोनों रूपों को अलग-अलग पहचानते हैं।
| साल | किसका काम | क्या था |
|---|---|---|
| 1953 | Frank (सैद्धांतिक मॉडल) | रासायनिक बनावट बताए बिना, स्वतः-उत्प्रेरण से एक रूप के बढ़ने का विचार (Soai की समीक्षा के अनुसार) |
| 1986 | Kagan | उत्प्रेरक और उत्पाद की शुद्धता का रिश्ता सीधी रेखा जैसा नहीं होता (Nobel समिति) |
| 1995 | Soai | ऐसी प्रतिक्रिया, जिसमें उत्पाद खुद अपना उत्प्रेरक बनकर एक रूप को बढ़ाता है |
इसी विषय पर 2001 में असममित उत्प्रेरण और 2021 में असममित ऑर्गेनोउत्प्रेरण (organocatalysis) को भी Nobel मिल चुका है, Nobel समिति के अनुसार। नोबेल सप्ताह में एक दिन पहले भौतिकी का पुरस्कार IceCube के Francis Halzen को मिला था; उसकी कहानी हमारे न्यूट्रिनो पकड़ने वाले लेख में है।
0.00005% का फ़र्क़ और तीन चक्र
Kagan ने 1986 में उस धारणा को परखा कि उत्प्रेरक जितना शुद्ध, उत्पाद उतना शुद्ध। Nobel समिति के अनुसार उन्होंने माना कि उत्प्रेरक की धातु कम से कम दो chiral अणुओं को खींचती है, इसलिए रिश्ता नॉन-लिनियर बन जाता है। इसी वजह से बारीक फ़र्क़ अप्रत्याशित ढंग से बढ़ सकते हैं।
Soai की प्रतिक्रिया में पाइरिमिडिल अल्कोहल नाम का उत्पाद अपनी ही और प्रतियां बनाने का उत्प्रेरक बन जाता है। Soai के अपने शोध-सार के अनुसार लगभग 0.00005% enantiomeric excess (ee, यानी एक रूप का दूसरे से अतिरिक्त हिस्सा) से शुरू करके तीन लगातार प्रतिक्रियाओं में 99.5% से ऊपर की शुद्धता मिली।
गणित सीधा है। 0.00005% ee का मतलब 40 लाख अणुओं में एक रूप का दूसरे से सिर्फ़ 2 ज़्यादा होना है, यानी 20,00,001 बनाम 19,99,999। इतने मामूली अंतर से शुरू होकर लगभग एकतरफ़ा नतीजे तक पहुंचना ही इस प्रयोग को चौंकाने वाला बनाता है।
Chemistry World के अनुसार Soai की टीम ने 1995 की रिपोर्ट में लिखा कि शुरुआती छोटा असंतुलन भारी पड़ने तक बढ़ सकता है। STAT के अनुसार समिति के सदस्य Peter Somfai ने इसे संभवतः कार्बनिक रसायन का सबसे शानदार प्रयोग कहा।
दवा की पर्ची पर ‘Es’ और ‘Levo’ का मतलब
STAT के अनुसार क्लिनिकल इस्तेमाल की आधी से ज़्यादा दवाएं chiral हैं। Pharmaceutical Journal के अनुसार कई पुरानी दवाएं racemate (दोनों रूपों का बराबर मिश्रण) बनकर बाज़ार में आईं, और पेटेंट ख़त्म होने के पास कंपनियां अक्सर उसका एक ही रूप अलग से उतारती हैं। इसे chiral switch कहते हैं।
ऐसे कुछ जोड़े:
- Citalopram से Escitalopram (S रूप)
- Omeprazole से Esomeprazole (S रूप)
- Ofloxacin से Levofloxacin (S रूप)
- Cetirizine से Levocetirizine
Pharmaceutical Journal के अनुसार escitalopram की रोज़ की अनुशंसित मात्रा citalopram की आधी है, क्योंकि racemate का आधा हिस्सा औषधीय रूप से निष्क्रिय होता है। AJMC की समीक्षा के अनुसार दवा-नामों के ‘Es’, ‘Levo’, ‘Dex’ जैसे उपसर्ग इसी single रूप की ओर इशारा करते हैं।
पर single रूप का मतलब हमेशा बेहतर दवा नहीं। AJMC में छपी समीक्षा ने 2001 से 2011 के बीच अमेरिका में मंज़ूर नौ ऐसी दवाओं को परखा। निर्णायक ट्रायल में पुराने racemate से बेहतर असर का सबूत नहीं मिला, जबकि अमेरिका के Medicaid ने उन पर करीब 6.3 अरब डॉलर ख़र्च किए।
भारतीय दवा उद्योग के लिए इस Nobel का मतलब
भारत की ताक़त जेनेरिक दवाओं में है, जहां लागत और शुद्धता दोनों तौलनी पड़ती हैं। Pharmexcil के महानिदेशक K Raja Bhanu के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का दवा निर्यात 30.47 अरब डॉलर रहा, यानी 9.4% की बढ़त। नीचे के सभी आंकड़े Pharmexcil के हैं।
| मद | आंकड़ा |
|---|---|
| दवा निर्यात, वित्त वर्ष 2024-25 | 30.47 अरब डॉलर |
| निर्यात, अप्रैल से फरवरी 2025-26 | 28.29 अरब डॉलर (5.6% की बढ़त) |
| निर्यात में अमेरिका का हिस्सा | करीब 34% |
| निर्यात में यूरोप का हिस्सा | करीब 19% |
| उद्योग का आकार | करीब 60 अरब डॉलर; 2030 तक 130 अरब डॉलर का अनुमान |
हमारा आकलन है कि Soai की प्रतिक्रिया ख़ुद किसी कारख़ाने की लाइन नहीं बनेगी; वह मौलिक विज्ञान की उपलब्धि है। असर अप्रत्यक्ष है। Nobel समिति के अनुसार ये खोजें उन रसायनज्ञों के लिए निर्णायक रहीं जो दवा-निर्माण की प्रतिक्रियाएं डिज़ाइन करते हैं, और जिस उद्योग का एक-तिहाई निर्यात अमेरिका जाता है, वहां शुद्ध रूप बनाने की समझ सीधे साख से जुड़ती है।
एक पास का उदाहरण सप्लीमेंट बाज़ार से है। D2 से D3 घटने की स्टडी बताती है कि अणु का रूप बदलने पर असर बदल सकता है। वह दर्पण-प्रतिबिंब का नहीं, दो अलग अणुओं का मामला है, पर सोच वही है।
जो अभी साफ़ नहीं: होमोकाइरैलिटी और दवा-दावों की सीमा
Soai प्रतिक्रिया एक ख़ास प्रयोगशाला-तंत्र है: पाइरिमिडिल एल्डिहाइड और diisopropylzinc जैसे चुने हुए रसायन। हर प्रतिक्रिया ऐसा नहीं करती। Chemistry World के अनुसार समिति सदस्य Somfai के नोट में इस खोज ने जैविक होमोकाइरैलिटी (homochirality), यानी जीवन में एक ही रूप की बहुतायत, की उत्पत्ति की खोज को नई जान दी। यानी खोज जारी है, जवाब पूरा नहीं।
प्रकृति में अमीनो अम्ल एक ही रूप में क्यों मिलते हैं, यह सवाल Soai की एक समीक्षा-टिप्पणी में जीवन की रासायनिक उत्पत्ति की पुरानी पहेली कहा गया है। दूसरी तरफ़ chiral switch की बहस जारी है। AJMC की समीक्षा नौ दवाओं की है, हर दवा की नहीं, और इलाज का फ़ैसला डॉक्टर का है। यह लेख किसी दवा को चुनने या बदलने की सलाह नहीं देता।
आगे क्या देखें
- 10 दिसंबर को Stockholm में पदक-समारोह, जहां Sweden के राजा Carl XVI Gustaf पदक सौंपेंगे (Reuters के अनुसार)।
- Soai प्रतिक्रिया की क्रियाविधि पर चल रहा शोध, जैसे Nature Communications (2025) में छपा काइनेटिक अध्ययन, जो पाइरिडिल और पाइरिमिडिल पदार्थों पर किया गया।
- Nobel समिति का वैज्ञानिक पृष्ठभूमि-दस्तावेज़, जिसमें Frank के 1953 वाले मॉडल से Kagan और Soai के प्रयोगों तक की पूरी कड़ी दर्ज है।
दाएं हाथ का दस्ताना बाएं हाथ में पूरा नहीं बैठता। दवा और शरीर का रिश्ता भी कुछ वैसा ही है। इस साल का पुरस्कार उसी बैठने-न-बैठने की गुत्थी को मिला है, और उसकी छाया भारत की दवा-दुकान के पत्ते पर भी दिखती है।
स्रोत: Nobel Prize Outreach, Chemistry World, STAT, Pharmaceutical Journal, AJMC, Pharmexcil