लगभग हर हफ्ते भारत में कोई नया डीपटेक फंड, प्लेटफॉर्म या पहल लॉन्च होती दिखती है। 6 अक्टूबर 2026 को Startup Policy Forum ने DeepVerse नाम से एक नया केंद्र शुरू किया। सवाल वही पुराना है जो लोग हर बार पूछते हैं: क्या भारत सच में डीपटेक में आगे बढ़ रहा है, या सिर्फ घोषणाओं की रफ्तार बढ़ रही है?

क्या हुआ: DeepVerse का लॉन्च

Startup Policy Forum (SPF) ने DeepVerse, अपना Centre for DeepTech Innovation, नई दिल्ली में शुरू किया। इसमें 18 सदस्यों का एडवाइज़री बोर्ड है, जिसमें निवेशक, फाउंडर, सरकारी अधिकारी और शिक्षा जगत के लोग शामिल हैं, और करीब 10 वेंचर कैपिटल फर्म भी इससे जुड़ी हैं।

केंद्र का काम 10 उप-क्षेत्रों में बंटा है: बायोटेक, क्वांटम तकनीक, सेमीकंडक्टर, ड्रोन, स्पेसटेक, रक्षा तकनीक, EV, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग व रोबोटिक्स, और क्लीनटेक। यह SPF के #100DesiDeepTechs प्रोजेक्ट पर बना है, जिसने मई 2026 में 100 भारतीय डीपटेक स्टार्टअप्स की पहचान की थी।

यह पहल MeitY Startup Hub, Startup India (DPIIT) और IIT Madras के साथ मिलकर बनाई गई है। DeepVerse के तहत निवेशकों को भी दो समूहों में बांटा गया है, Deep Core और Deep Circle, जिसमें Accel India जैसी बड़ी VC फर्मों के साथ Alteon, Beenext और River जैसे छोटे फंड भी शामिल हैं।

पहला भ्रम: ज़्यादा पेटेंट मतलब ज़्यादा तकनीकी बढ़त

भारत के पेटेंट फाइलिंग वित्त वर्ष 2025-26 में 1.43 लाख के रेकॉर्ड पर पहुंचे, जो पिछले साल के 1.10 लाख से 30% से ज़्यादा ऊपर है। सुनने में यह बड़ी तकनीकी छलांग जैसा लगता है, पर IP India के डैशबोर्ड के अनुसार असली तस्वीर कुछ और है।

इन 1.43 लाख पेटेंट में से करीब 55,000 सिर्फ शिक्षा संस्थानों ने फाइल किए, जबकि स्टार्टअप्स का हिस्सा सिर्फ 4,156 रहा। यानी पेटेंट की यह बाढ़ ज़्यादातर कॉलेज और यूनिवर्सिटी लैब से आई है, कंपनियों के बाज़ार में उतरने से नहीं। 6G पेटेंट की संख्या पर भी यही सवाल पहले उठ चुका है, जहां हज़ारों पेटेंट फाइल होने के बावजूद असली नेटवर्क अभी दूर है।

हमारा अंदाज़ा है कि पेटेंट फाइल होना और पेटेंट मंज़ूर होना भी दो अलग बातें हैं। फाइलिंग की गिनती बढ़ाना आसान है, पर हर आवेदन की जांच में सालों लग सकते हैं, और बहुत से आवेदन आखिर में मंज़ूर ही नहीं होते। यानी 1.43 लाख का आंकड़ा सिर्फ कोशिशों की गिनती है, नतीजों की नहीं।

दूसरा भ्रम: हर नया प्लेटफॉर्म मतलब स्टार्टअप्स को पैसा मिलना शुरू

DeepVerse खुद अपने बारे में साफ कहता है कि यह कोई फंडिंग प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि पॉलिसी और रिसर्च पर काम करने वाला केंद्र है। इसका आने वाला काम एक रिपोर्ट के ज़रिए नीतिगत सुझाव देना है, सीधे किसी स्टार्टअप को चेक देना नहीं।

इसकी तुलना IIT Madras और Unicorn India Ventures के उस फंड से करें जिसने सचमुच ₹450 करोड़ जुटाकर स्टार्टअप्स में पैसा लगाना शुरू किया। एक पॉलिसी फोरम और एक निवेश फंड, दोनों अलग काम करते हैं, और दोनों को एक जैसी 'बड़ी खबर' मानना भ्रम पैदा करता है।

SPF की अध्यक्ष श्वेता राजपाल कोहली खुद कहती हैं कि DeepVerse का मकसद फाउंडर्स को नीति-निर्धारण में लगातार आवाज़ देना है, एक बार की रिपोर्ट या इवेंट नहीं। यानी इसका असर महीनों या सालों में नियमों के बदलने से दिखेगा, किसी स्टार्टअप के बैंक खाते में तुरंत पैसा आने से नहीं।

तीसरा भ्रम: डीपटेक मतलब सिर्फ AI स्टार्टअप

जनवरी 2026 में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा था कि भारत के करीब 80% स्टार्टअप्स AI-आधारित हैं। इस आंकड़े से यह धारणा बनती है कि डीपटेक का मतलब बस AI सॉफ्टवेयर है।

पर DeepVerse की अपनी सूची में सेमीकंडक्टर, ड्रोन, स्पेसटेक, बायोटेक, क्वांटम और क्लीनटेक जैसे हार्डवेयर-भारी क्षेत्र शामिल हैं, जिनमें से ज़्यादातर AI से सीधे नहीं जुड़े। असली डीपटेक का दायरा AI से कहीं बड़ा है, पर मीडिया में ध्यान ज़्यादातर AI स्टार्टअप्स पर ही रहता है।

सेमीकंडक्टर चिप डिज़ाइन करना, रॉकेट इंजन बनाना या बैटरी की रसायन विज्ञान सुधारना, इन सबमें सालों की रिसर्च और भारी पूंजी लगती है, जबकि AI सॉफ्टवेयर अक्सर मौजूदा मॉडल के ऊपर एक एप्लिकेशन बनाकर जल्दी बाज़ार में उतर जाता है। दोनों को एक ही तराज़ू में तौलना इसी भ्रम को बढ़ाता है।

तो असली तस्वीर क्या है?

कुछ चीज़ें सच में आगे बढ़ी हैं। ₹1 लाख करोड़ का RDI Fund अब TDB और BIRAC जैसी एजेंसियों के ज़रिए काम करना शुरू कर चुका है, Semicon India 2025 में $1 अरब का India Deep Tech Alliance घोषित हुआ था, और सेमीकंडक्टर मिशन की Design Linked Incentive योजना अब तक 23 स्टार्टअप्स को सहारा दे चुकी है।

  • सच: सरकारी फंड और योजनाएं अब असली पैसा स्टार्टअप्स तक पहुंचा रही हैं।
  • भ्रम: हर घोषणा या नया मंच सीधे फंडिंग या तकनीकी बढ़त के बराबर है।
  • सच: डीपटेक का दायरा सेमीकंडक्टर से स्पेस तक फैला है, सिर्फ AI तक सीमित नहीं।

भारत के लिए मतलब, अनजान बातें और आगे क्या

भारत के लिए इसका मतलब है कि डीपटेक इकोसिस्टम में शोर और असली प्रगति, दोनों साथ-साथ बढ़ रहे हैं। SPF की अपनी अध्यक्ष श्वेता राजपाल कोहली के शब्दों में, भारत के पास फाउंडर और पूंजी दोनों बढ़ रहे हैं, पर नीति को अभी भी पकड़ बनानी है।

अभी यह साफ नहीं है कि DeepVerse की आने वाली पॉलिसी रिपोर्ट असली नियमों में बदलेगी या सिर्फ सुझावों तक सीमित रहेगी। यह भी साफ नहीं है कि स्टार्टअप्स का पेटेंट फाइलिंग में हिस्सा आने वाले सालों में बढ़ेगा या यही 3% के आसपास टिका रहेगा। भारत जैसे बड़े देश में नीति बदलने की रफ्तार अक्सर स्टार्टअप्स की रफ्तार से धीमी होती है, और यही फासला असली जोखिम है।

आगे तीन चीज़ों पर नज़र रखनी होगी: DeepVerse की पहली पॉलिसी रिपोर्ट कब आती है और उसमें क्या ठोस सुझाव होते हैं, क्या इसके सुझावों पर सरकार कोई नई योजना बनाती है, और अगले वित्त वर्ष में स्टार्टअप्स की पेटेंट फाइलिंग का हिस्सा बढ़ता है या नहीं। इसके साथ ही यह भी देखना होगा कि Deep Core और Deep Circle में शामिल VC फर्म असल में कितने नए सौदों का ऐलान करती हैं।

घोषणाएं गिनना आसान है, तकनीक को बाज़ार तक पहुंचाना मुश्किल। भारत का डीपटेक सफर इन दोनों के बीच के फर्क को पाटने पर टिका है, और यह फर्क अगले कुछ सालों में ही साफ तौर पर पता चलेगा।

स्रोत: Business Standard, PRNewswire, Inc42, The Quantum Insider

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