क्या Artemis III में NASA के astronaut चांद पर उतरने वाले हैं? नहीं। NASA की 23 अक्टूबर 2026 की घोषणा के अनुसार Artemis III मिशन 2027 में चार astronaut को सिर्फ़ धरती की निचली कक्षा (low Earth orbit) में ले जाएगा, जहां वे Blue Origin और SpaceX के लैंडर (lander) के test version से जुड़ने का अभ्यास करेंगे। चांद पर उतरने की कोशिश 2028 के लिए रखी गई है। इसी फ़र्क पर सबसे ज़्यादा भ्रम है।
मिशन क्या करेगा, यह NASA ने विस्तार से बताया है। यहां हम यह भी देखेंगे कि इस उड़ान में क्या नहीं परखा जाएगा, और भारत के रोडमैप से इसकी तुलना कहां बैठती है।
पहला भ्रम: Artemis III में astronaut चांद पर उतरेंगे
NASA के अनुसार Orion यान SLS रॉकेट पर Florida के Kennedy Space Center से उड़ेगा और धरती की कक्षा में ही रहेगा। शुरुआत में कक्षा अंडाकार होगी, लगभग 29 × 1,806 km (18 × 1,122 मील)। फिर Orion अपने service module से गोल कक्षा में आएगा, करीब 556 km (300 nautical मील) ऊपर।
चांद औसतन करीब 3.84 लाख km दूर है। उस हिसाब से 556 km की ऊंचाई उस दूरी का सिर्फ़ 0.14% बैठती है। चांद के पास जाने का काम Artemis II पहले कर चुका है: Space.com की तस्वीर के कैप्शन के अनुसार उसका चालक दल 6 अप्रैल 2026 को चांद के पीछे से गुज़रा था। Artemis III की चांद-उड़ान अभी योजना में भी नहीं है।
दूसरा भ्रम: यह बस SLS और Orion की एक और उड़ान है
NASA के अनुसार पहले के Artemis मिशन में सिर्फ़ SLS और Orion थे। इस बार तीन यान, तीन अलग रॉकेट पर, थोड़े-थोड़े अंतर से उड़ेंगे। NASA के Artemis program manager Jeremy Parsons के मुताबिक एजेंसी ने यह पहले कभी नहीं आज़माया। क्रम कुछ ऐसा है:
- पहले Blue Origin अपने Blue Moon Mark 2 लैंडर का test version करीब 439 km (273 मील) की गोल कक्षा में भेजेगा। वह वहां 30 दिन तक रुक सकता है।
- उसके ठीक होने की पुष्टि के कुछ दिन बाद Orion उड़ेगा। चालक दल: Randy Bresnik, Frank Rubio, Andre Douglas और ESA के Luca Parmitano।
- पहले 2 दिन Orion की जांच, फिर Blue Moon से मिलन और जुड़ाव (rendezvous और docking)।
- जुड़ने के बाद लगभग 2 दिन astronaut Blue Moon के भीतर cabin, controls और life-support परखेंगे।
- बाद में SpaceX का Starship Version 3 test version Florida से उड़ेगा। Orion उससे अधिकतम 2 घंटे जुड़ा रहेगा।
- अंत में 5 दिन तक अतिरिक्त परीक्षण, फिर California तट के पास Pacific Ocean में splashdown।
सीधा जोड़ें तो NASA ने 14 दिन में से करीब 2, 2 और अधिकतम 5 दिन गिनाए हैं, यानी ज़्यादा से ज़्यादा 9 दिन का हिसाब मिलता है। बाकी 5 दिन का ब्योरा उस पेज पर नहीं है।
वापसी में heat shield की भूमिका अहम रहती है; Artemis II के heat shield की जांच हम पहले कर चुके हैं। Starship के कक्षा तक पहुंचने का पिछला हाल यहां है: Starship Flight 14 की कक्षा तक पहुंच।
तीसरा भ्रम: दोनों लैंडर के साथ astronaut का काम एक जैसा होगा
ऐसा नहीं है। NASA के अनुसार Blue Moon के भीतर crew जाएगी, Starship के भीतर नहीं। दोनों के docking port भी अलग हैं, और एक ही मिशन में दोनों तरीके परखना ही मकसद है।
| पहलू | Blue Moon Mark 2 (test version) | Starship V3 (test version) |
|---|---|---|
| कक्षा | करीब 439 km, गोल | करीब 381 km (206 nautical मील) |
| कब उड़ेगा | Orion से पहले | मिशन में बाद में |
| crew भीतर जाएगी? | हां, लगभग 2 दिन | नहीं |
| जुड़ाव का port | Cabin के बगल में | Starship की नाक पर लगा नया docking system |
| जुड़े रहने का समय | लगभग 2 दिन | अधिकतम 2 घंटे |
चौथा भ्रम: 2028 की लैंडिंग तय है और लैंडर चुना जा चुका है
NASA के अनुसार अनुबंध बदलने के बाद कोई भी लैंडर किसी खास Artemis लैंडिंग मिशन को सौंपा नहीं गया है। दोनों कंपनियों को crew वाले मिशन से पहले uncrewed demonstration करना होगा, और पहले कौन उतारेगा, यह NASA लैंडर की तैयारी देखकर तय करेगी। Space.com भी लिखता है कि Artemis IV में अगर सब योजना से चला, तो 2028 की शुरुआत में landing होगी।
NASA के मुताबिक दोनों के रास्ते भी बदले हैं। SpaceX का Starship धरती की कक्षा में Orion का इंतज़ार करेगा, जुड़ेगा और फिर पूरे stack को चांद की निचली कक्षा तक धकेलेगा। Blue Origin तीन transfer stage इस्तेमाल करेगा। दोनों अब चांद की near-rectilinear halo orbit में नहीं मिलेंगे। दो astronaut सतह पर उतरेंगे, दो Orion में रहेंगे।
भारत के लिए Artemis III का मतलब: पहले कक्षा में अभ्यास, फिर चांद
ISRO का रास्ता भी इसी क्रम का है, बस पैमाना छोटा है। ISRO अध्यक्ष वी. नारायणन ने (PTI के अनुसार) 2040 तक भारतीयों को चांद पर उतारने का लक्ष्य बताया है। उससे पहले Bharatiya Antariksh Station का पहला module 2028 तक और पूरा station 2035 तक रखने की बात The Statesman की रिपोर्ट में है। भारत का अपना Space Station कैसे काम करेगा, यह हम पहले समझा चुके हैं।
ISRO अध्यक्ष ने 4 सितंबर 2026 की NewsBytes रिपोर्ट के मुताबिक पहली मानव-रहित उड़ान G1 इसी कैलेंडर वर्ष की योजना बताई है; Gaganyaan G1 की तैयारी का हाल यहां पढ़ें। यानी भारत अभी पहली सीढ़ी पर है।
Docking को ऐसे समझें जैसे रेलवे यार्ड में दो डिब्बों को पहले जोड़कर देखना कि coupling टिकती है या नहीं। Artemis III वही यार्ड-टेस्ट है, बस डिब्बे Orion और लैंडर हैं। ISRO अध्यक्ष के अनुसार भारत उपग्रहों की docking में चौथा देश बन चुका है, पर astronaut वाले यानों की docking अभी बाकी है।
Space.com के लक्ष्य के हिसाब से NASA में रिहर्सल (मध्य-2027) और लैंडिंग (2028 की शुरुआत) के बीच कुछ महीनों का फासला है। भारत में BAS का पहला module (2028) और चांद पर उतरना (2040) के बीच 12 साल हैं। यह हमारा आकलन है कि इतना फासला बीच के चरण परखने का समय देता है, पर तब तक कई फैसले अभी बाकी रहेंगे।
जो अभी पता नहीं: लैंडर, Orion में बदलाव और सटीक तारीख
- पहला लैंडर कौन सा होगा, यह NASA के अनुसार लैंडर की तैयारी पर टिका है।
- अंतरिक्ष में Starship के tanker से depot तक propellant ट्रांसफर NASA के अनुसार uncrewed demonstration में दिखाया जाएगा, यानी यह अभी होना बाकी है।
- Starship से Orion को धकेलने के लिए Orion में बदलाव पर NASA अभी काम कर रही है।
- Artemis III के लिए NASA ने साल 2027 बताया है; Space.com के अनुसार लक्ष्य मध्य-2027 है। सटीक दिन सामने नहीं आया।
आगे क्या देखें: तीन उड़ानें, तीन इंतज़ार
- Blue Origin और SpaceX के uncrewed demonstration मिशन (तारीख NASA ने अभी नहीं बताई)।
- 2027 में Artemis III का launch, जब NASA सटीक दिन घोषित करे।
- भारत में Gaganyaan G1, जिसकी उड़ान की तारीख अभी तय नहीं बताई गई।
Artemis III चांद की यात्रा नहीं, उसकी रिहर्सल है। नतीजा इस पर टिका है कि तीन यान तीन रॉकेट से सही समय पर उड़कर कक्षा में मिल पाते हैं या नहीं। 2028 की लैंडिंग का सवाल उसके बाद ही सुलझेगा।
स्रोत: NASA (Artemis III मिशन पेज), NASA (Lander Development रिलीज़), Space.com, Deccan Herald (PTI), The Statesman, NewsBytes