क्या El Niño 2026 रिकॉर्ड तोड़ रहा है? Copernicus के अनुसार सितंबर 2026 में प्रशांत के Niño 3.4 क्षेत्र का मासिक समुद्री तापमान 29.70°C रहा, जो 1982/83, 1997/98 और 2015/16 के बहुत मज़बूत El Niño के शिखर से भी ऊपर है। पर तापमान का रिकॉर्ड और असर का रिकॉर्ड एक चीज़ नहीं होते।
भारत के लिए IMD का अनुमान फिलहाल यह है कि अक्टूबर की बारिश सामान्य से कम रह सकती है।
इस लेख में Copernicus के आंकड़ों को IMD के 30 सितंबर के अक्टूबर–दिसंबर आउटलुक के सामने रखा गया है। प्रतिशत को मिलीमीटर में बदला गया है, ताकि किसान और शहर का पाठक दोनों अपने हिसाब से पढ़ सकें।
सितंबर 2026 में Copernicus ने क्या दर्ज किया?
यूरोपीय संघ की Copernicus Climate Change Service (C3S) के 12 अक्टूबर 2026 के बुलेटिन में तीन आंकड़े सबसे अहम हैं:
| माप | सितंबर 2026 | तुलना |
|---|---|---|
| वैश्विक हवा का औसत तापमान | 16.27°C (पूर्व-औद्योगिक स्तर से 1.63°C ऊपर) | दूसरा सबसे गर्म सितंबर; सितंबर 2023 से 0.11°C ठंडा |
| समुद्र सतह तापमान (60°S–60°N) | 21.05°C | पिछला सितंबर रिकॉर्ड 20.92°C (2023) |
| Niño 3.4 का मासिक तापमान | 29.70°C | 1982/83, 1997/98 और 2015/16 के शिखर से ऊपर |
C3S के अनुसार नवंबर 2025 के बाद पहली बार लगातार दो महीने (अगस्त और सितंबर) 1.5°C के ऊपर रहे। यह दो महीनों का मासिक आंकड़ा है, पेरिस समझौते की दीर्घकालिक औसत सीमा का फैसला नहीं।
Yale Climate Connections के अनुसार NOAA ने 9 अक्टूबर को भी सितंबर 2026 को दूसरा सबसे गर्म सितंबर बताया। वहीं Zeke Hausfather और NASA का अनुमान है कि 2026 सबसे गर्म या दूसरा सबसे गर्म साल रहेगा और 2027 के रिकॉर्ड तोड़ने की संभावना ज़्यादा है। ये अनुमान हैं, मापे हुए आंकड़े नहीं।
Niño 3.4 का 29.70°C किस बात का संकेत है?
Niño 3.4 भूमध्य रेखा के पास प्रशांत का वह हिस्सा है जिसके तापमान से El Niño की ताकत आंकी जाती है। C3S के मुताबिक इस बार के रिकॉर्ड के साथ यह घटना संभवतः अब तक की सबसे मज़बूत घटनाओं में से एक बन रही है। C3S यह भी कहता है कि 1.5°C से ऊपर का यह दौर 2027 तक चलने की संभावना है।
एक सावधानी ज़रूरी है। यह समुद्र का पूरा तापमान है, सामान्य से अंतर नहीं। हमारा आकलन है कि दशकों की सामान्य गर्माहट भी इस आंकड़े में जुड़ी होगी, इसलिए ‘सबसे ताकतवर’ का ठप्पा लगाने से पहले सामान्य से अंतर वाले सूचकांक भी देखने होंगे।
El Niño का भारत की बारिश से रिश्ता क्या है?
IMD के 30 सितंबर के आउटलुक के अनुसार भूमध्य रेखा के प्रशांत में इस समय मज़बूत El Niño है और MMCFS समेत प्रमुख मॉडलों के हिसाब से वह साल के अंत तक और मज़बूत होगा। हिंद महासागर का डाइपोल (IOD) तटस्थ है और वैसा ही रहने की संभावना है।
सितंबर के C3S नक्शे में भारतीय उपमहाद्वीप के आसपास भी तस्वीर असमान रही। पाकिस्तान औसत से सूखे इलाकों में गिना गया, जबकि उपमहाद्वीप के उत्तर में मध्य एशिया के कुछ हिस्से औसत से गीले रहे। यह मासिक अवलोकन है, मौसमी अनुमान नहीं।
इस साल का मानसून पहले ही बड़ी कमी के साथ खत्म हुआ है। El Niño और मानसून के रिश्ते की पूरी कहानी पिछले विश्लेषण में है; यहां ध्यान अब मानसून के बाद के मौसम पर है।
भारत के लिए IMD आउटलुक का मतलब: मिलीमीटर में
IMD ने अक्टूबर 2026 में देशभर की बारिश सामान्य से कम (दीर्घकालिक औसत LPA के 85% से नीचे) रहने का अनुमान दिया है। इसे हमने मिलीमीटर में बदला:
| क्षेत्र और अवधि | IMD का अनुमान | मिलीमीटर में (हमारी गणना) |
|---|---|---|
| पूरा देश, अक्टूबर 2026 (LPA 75.4 मिमी) | LPA के 85% से कम | 64.1 मिमी से कम |
| दक्षिण प्रायद्वीप, अक्टूबर–दिसंबर (LPA 334.1 मिमी) | सामान्य: LPA का 88–112% | लगभग 294 से 374 मिमी |
अंतर को पैमाने पर देखें: 75.4 और 64.1 मिमी में सिर्फ 11.3 मिमी का फर्क है। PTI के हवाले से ThePrint के अनुसार 15 अक्टूबर की दोपहर 11:30 से 2:30 के बीच दिल्ली के सफदरजंग में ही 15.9 मिमी बारिश हुई। यह राष्ट्रीय औसत और एक स्टेशन की तुलना है, इसलिए सिर्फ पैमाना समझाने के लिए; एक दिन की बारिश से पूरे मौसम का अनुमान नहीं बदलता।
IMD के अनुसार अक्टूबर में ज़्यादातर हिस्सों में अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य से ऊपर रह सकते हैं। LPA यहां 1971–2020 का औसत है।
दक्षिण भारत और बाकी देश का हिसाब अलग क्यों दिख रहा है?
IMD के अनुसार दक्षिण प्रायद्वीप को साल की लगभग 30% बारिश अक्टूबर–दिसंबर के उत्तर-पूर्वी मानसून में मिलती है। तमिलनाडु, पुदुचेरी और कराइकल के लिए यह हिस्सा करीब 48% है। इसी वजह से वहां का ‘सामान्य’ अनुमान उतना ही अहम है जितना बाकी देश का ‘सामान्य से कम’।
IMD का आउटलुक कहता है कि देश के ज़्यादातर हिस्सों में अक्टूबर–दिसंबर में बारिश सामान्य से कम रह सकती है, सिर्फ उत्तर-पश्चिम और दक्षिणी प्रायद्वीप के कुछ इलाके अपवाद हैं। रबी के मौसम में इससे मिट्टी की नमी, सिंचाई की ज़रूरत और जलाशयों-भूजल के रिचार्ज पर दबाव पड़ सकता है। IMD ने सिंचाई और जल-उपयोग की समीक्षा की सलाह दी है।
जो अभी वैज्ञानिक तय नहीं कर पाए
- El Niño अंत में कितना मज़बूत होगा: C3S और IMD दोनों ‘और मज़बूत’ कह रहे हैं, पर शिखर का स्तर अभी अनुमान है।
- किसी एक मौसमी घटना को सीधे जलवायु परिवर्तन से जोड़ना: इसके लिए अलग attribution study चाहिए। वैज्ञानिक अभी जांच रहे हैं।
- उत्तर-पश्चिम और दक्षिण के ‘सामान्य से ज़्यादा’ वाले इलाकों में असल बारिश कितनी होगी: IMD के मॉडल में कुछ जगह कोई संकेत नहीं है।
IMD यह भी याद दिलाता है कि इस मौसम में चरम घटनाएं कम होती हैं, पर स्थानीय स्तर पर उन्हें खारिज नहीं किया जा सकता। इसका बड़े परिदृश्य से रिश्ता 1.5°C पार होने की बहस में भी दिखता है।
आगे क्या देखें?
- IMD का नवंबर 2026 का आउटलुक, जो अक्टूबर के अंत में आना है
- Copernicus का अक्टूबर का अगला मासिक बुलेटिन: क्या 1.5°C से ऊपर की कड़ी जारी रहती है
- दक्षिण भारत में उत्तर-पूर्वी मानसून की शुरुआती बारिश की मात्रा
तस्वीर दो हिस्सों में पढ़ें। प्रशांत में रिकॉर्ड तापमान मापा जा चुका है, जबकि भारत पर उसका असर अभी अनुमान है। दक्षिण में सामान्य और बाकी देश में कम बारिश का अनुमान बताता है कि इस बार पानी का हिसाब इलाके के हिसाब से अलग बैठेगा।
स्रोत: Copernicus Climate Change Service, IMD (भारत मौसम विज्ञान विभाग), Down To Earth, Yale Climate Connections, PTI/ThePrint