Gaganyaan पर काम 2017 में शुरू हुआ था, और अब, करीब नौ साल बाद, उसका पहला बिना इंसान वाला उड़ान टेस्ट अगले दो महीनों के भीतर संभव बताया जा रहा है। ISRO ने इस मिशन, यानी G1, के क्रू मॉड्यूल की इंटीग्रेशन और टेस्टिंग पूरी कर ली है। सवाल यह है कि क्या यह उड़ान सच में इसी साल हो पाएगी।
क्या हुआ: G1 का क्रू मॉड्यूल तैयार
Mezha की रिपोर्ट के अनुसार ISRO के लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम्स सेंटर के निदेशक एन. जयन ने एक भारतीय टीवी इंटरव्यू में बताया कि पहले मानव-रहित उड़ान के लिए क्रू मॉड्यूल की लंबे समय से तय इंटीग्रेशन और टेस्टिंग पूरी हो गई है। यह रिपोर्ट 9 अक्टूबर 2026 की है।
उड़ान के लिए Human-rated LVM3 यानी HLVM3 रॉकेट इस्तेमाल होगा। इसका आधिकारिक विवरण ISRO की वेबसाइट पर मिलता है: रॉकेट करीब 53 मीटर ऊंचा है और उसका वजन लगभग 640 टन है।
अब तक कौन-से टेस्ट पास हुए
G1 से पहले ISRO कई छोटे और बड़े टेस्ट कर चुका है। इनमें से हर एक का मकसद किसी एक खतरे को पहले ही परख लेना था, ताकि असली उड़ान में कम से कम चौंकाने वाली बातें सामने आएं।
| टेस्ट | कब | क्या परखा गया |
|---|---|---|
| TV-D1 | 21 अक्टूबर 2023 | उड़ान के दौरान क्रू एस्केप सिस्टम |
| एयर ड्रॉप टेस्ट | 10 अप्रैल 2026 | क्रू मॉड्यूल और पैराशूट से उतराई |
| HLVM3 ग्राउंड टेस्टिंग | 2026 तक पूरी | मानव-योग्य रॉकेट का विकास और जमीनी परीक्षण |
DD India के अनुसार ISRO ने जीवन-रक्षक प्रणाली (ECLSS) का इंजीनियरिंग मॉडल, क्रू मॉड्यूल अप-राइटिंग सिस्टम और थर्मल प्रोटेक्शन सिस्टम जैसी जरूरी तकनीकें भी बनाकर परखी हैं।
पैराशूट पर भी अलग से काम हुआ। Douglas Messier के सब्सटैक पर छपे ISRO अपडेट के अनुसार IMAT-05 टेस्ट का मकसद G1 में आने वाले अधिकतम भार के हालात में मुख्य पैराशूट की मजबूती परखना था, और उसके सफल होने से पैराशूट सिस्टम पर भरोसा बढ़ा।
उसी अपडेट में क्रू मॉड्यूल के तीन और क्वालिफिकेशन टेस्ट गिनाए गए: पानी में उतरने के बाद मॉड्यूल को सीधा करने वाले सिस्टम का फ्लोट इन्फ्लेशन टेस्ट, सर्विस मॉड्यूल से जुड़ने-अलग होने वाले कनेक्टर का टेस्ट, और एपेक्स कवर अलग होने के भार वाला स्ट्रक्चर टेस्ट। इन सबके नतीजे डिजाइन मार्जिन के भीतर रहे।
देरी क्यों हुई
2025 में ISRO अध्यक्ष वी. नारायणन ने कहा था कि G1 की उड़ान दिसंबर में होगी, और उसमें आधा-इंसानी रोबोट Vyommitra जाएगा। यह तारीख अब खिसककर 2026 के आखिर तक आ पहुंची है।
उस वक्त ISRO अधिकारियों ने खुद बताया था कि ऑर्बिटल मॉड्यूल की इंटीग्रेशन, थर्मोवैक टेस्ट, डायनेमिक और एकॉस्टिक टेस्ट, और प्रोपेलेंट भरने जैसे कई काम बाकी हैं। इनमें हर चरण को पूरी तसल्ली से पूरा करना जरूरी है, क्योंकि एक भी कमजोर कड़ी आगे की मानव उड़ान को खतरे में डाल सकती है।
हमारा हिसाब: अगर G1 नवंबर या दिसंबर 2026 में उड़ता है, तो 2017 की शुरुआत से यहां तक पहुंचने में करीब नौ से दस साल लगे होंगे।
G1 में असल में क्या होगा
यह उड़ान बिना किसी अंतरिक्ष यात्री के होगी। Mezha की रिपोर्ट के मुताबिक इसमें लाइफ सपोर्ट सिस्टम का एक प्रोटोटाइप जाएगा, जबकि पूरा सिस्टम अगले मानव-रहित मिशन से पहले तैयार किया जाएगा।
DD India के अनुसार ECLSS का एक घटाया हुआ वर्जन आने वाले मानव-रहित मिशनों में परखा जाएगा, और उसके बाद ही उसे मानव उड़ान में लगाया जाएगा। यानी G1 पूरे इंतजाम की पहली असली रिहर्सल है।
जमीन पर भी तैयारी चल रही है। ISRO ने दूसरे लॉन्च पैड में क्रू एक्सेस आर्म, बबल लिफ्ट और आपात स्थिति में भागने के लिए जिप-लाइन जैसी सुविधाएं जोड़ी हैं, और दूसरी व्हीकल असेंबली बिल्डिंग में भी बदलाव किए गए हैं।
मिशन का मकसद क्रू मॉड्यूल को कक्षा में भेजना, उसके सिस्टम परखना और फिर पैराशूट के सहारे सुरक्षित उतारना है। यही वह कसौटी है, जिस पर आगे की मानव उड़ान टिकी है।
भारत पर इसका असर
हमारी राय में G1 की कामयाबी सिर्फ एक रॉकेट टेस्ट की जीत नहीं होगी। यह उस पूरे भरोसे की परीक्षा है, जिस पर भारत के आगे के मानव मिशन और Bharatiya Antariksh Station जैसी योजनाएं टिकी हैं।
रॉकेट की ताकत भी इसी कहानी का हिस्सा है। LVM3 के CE20 क्रायोजेनिक इंजन की हाल की टेस्टिंग दिखाती है कि ISRO भारी पेलोड वाले मिशनों के लिए इंजन को और दमदार बना रहा है।
जमीन पर बनी सुविधाओं का फायदा भी लंबे समय तक मिलेगा। दूसरा लॉन्च पैड और असेंबली बिल्डिंग में हुए बदलाव सिर्फ G1 के लिए नहीं, बल्कि आगे की हर मानव उड़ान के लिए इस्तेमाल होंगे।
इसके उलट, अगर G1 में फिर देरी होती है, तो उसका असर बाद के मिशनों की पूरी कतार पर पड़ेगा, क्योंकि हर अगला कदम इसी उड़ान के नतीजों पर निर्भर है।
अभी क्या पता नहीं है और आगे क्या देखना है
अभी ISRO ने G1 की कोई पक्की लॉन्च तारीख आधिकारिक रूप से घोषित नहीं की है। जो अनुमान सामने है, वह एक इंटरव्यू पर आधारित है, और आम तौर पर ऐसी तारीखें जांच के नतीजों के हिसाब से बदलती भी रहती हैं।
- GSLV F18 की लॉन्च तारीख, क्योंकि रिपोर्ट के मुताबिक G1 उसके करीब एक महीने बाद उड़ेगा
- ऑर्बिटल मॉड्यूल की बाकी इंटीग्रेशन और थर्मोवैक व एकॉस्टिक टेस्ट
- ISRO की तरफ से आधिकारिक लॉन्च विंडो की घोषणा
Gaganyaan का सफर लंबा रहा है, पर G1 पहली बार ऐसा मौका बनता दिख रहा है जब पूरा सिस्टम एक साथ कसौटी पर कसा जाएगा। अब बस उड़ान की घड़ी का इंतजार है।
क्या G1 में इंसान होंगे?
नहीं। G1 एक मानव-रहित उड़ान है। इसका मकसद क्रू मॉड्यूल, रॉकेट और उतराई के सिस्टम परखना है, ताकि आगे की मानव उड़ान के लिए भरोसा बन सके।
G1 कब उड़ेगा?
Mezha की 9 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार नवंबर-दिसंबर 2026 की उम्मीद है। लेकिन ISRO ने अभी कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की है, इसलिए इसे अनुमान ही मानना ठीक है।
Vyommitra क्या है?
Vyommitra ISRO का आधा-इंसानी रोबोट है। ISRO अध्यक्ष वी. नारायणन के पहले के बयान के अनुसार उसे G1 में भेजने की योजना थी, ताकि इंसानों से पहले हालात परखे जा सकें।
स्रोत: ISRO, Mezha, DD India, The Tribune, Wikipedia