कंप्रेस्ड बायोगैस (compressed biogas, CBG) का प्लांट लगाने से पहले हर निवेशक और किसान एक ही सवाल पूछता है: गैस बनाकर बेचूंगा किसे, और किस दाम पर? पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 15 सितंबर 2026 को ₹23,731 करोड़ की GOBARdhan योजना के लिए ऑपरेशनल गाइडलाइंस जारी की, जिनमें 100% तक खरीद की गारंटी और 10 साल तक तय दाम का वादा है।

क्या हुआ और क्यों जरूरी था: GOBARdhan की नई गाइडलाइंस

मंत्रालय के अनुसार GOBARdhan यानी नेशनल सर्कुलर बायोएनर्जी स्कीम अगस्त 2026 में मंत्रिमंडल से मंजूर हुई थी और यह 2026-27 से 2035-36 तक चलेगी। इसका लक्ष्य घरेलू CBG उत्पादन को लगभग दस गुना बढ़ाना है।

बिज़नेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार अब CBG बनाने वाली कंपनियां तकनीकी और परिचालन क्षमता के हिसाब से अपनी बिकने लायक गैस का 100% तक ऑफटेक (offtake, खरीद की गारंटी) नामांकित कर सकती हैं। यह गैस शहर गैस वितरण (City Gas Distribution, CGD) कंपनियों या पाइपलाइन नेटवर्क से जोड़ी जाएगी।

इससे पहले SATAT जैसी योजनाओं में पूंजी अनुदान तो मिलता था, पर प्लांट लगने के बाद भी यह तय नहीं रहता था कि गैस कौन खरीदेगा और किस दाम पर। नतीजा यह होता कि कई प्लांट बनने के बाद भी अनिश्चितता में अटक जाते।

गाइडलाइंस के अनुसार 1 सितंबर 2026 से SATAT को GOBARdhan में मिला दिया गया है, हालांकि पुरानी योजना के तहत पहले से किए गए वादे पूरे किए जाते रहेंगे। मौजूदा SATAT रिटेल आउटलेट्स को नई योजना में जोड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

छह हिस्सों में बंटा पूरा ढांचा

PIB और मंत्रालय के दस्तावेज़ों के अनुसार GOBARdhan को छह हिस्सों में बांटा गया है:

  • CBG ऑफटेक एश्योरेंस मैकेनिज्म — खरीद की गारंटी
  • CBG प्राइसिंग फ्रेमवर्क — कम से कम 10 साल तय दाम
  • कैपिटल असिस्टेंस — नए प्लांट के लिए पूंजी सहायता
  • पाइपलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर — प्लांट को नेटवर्क से जोड़ना
  • क्रेडिट गारंटी सपोर्ट — छोटे उद्यम (MSME) प्रोमोटरों के लिए कर्ज गारंटी
  • CBG इकोसिस्टम चैलेंज फंड — जिला स्तर पर योजना और क्षमता निर्माण

ईटीवी भारत की रिपोर्ट के अनुसार शुरुआत में CGD कंपनी पर कोई टेक-या-पे (take-or-pay) बंधन नहीं होगा, पर दूसरे साल से उसे नामांकित मात्रा के 90% तक खरीदने का जिम्मा उठाना होगा। दूसरी तरफ, प्लांट को भी दूसरे साल से तय मात्रा के 50% तक सप्लाई करने की ज़िम्मेदारी लेनी होगी।

एलान से अमल तक: पूंजी सहायता में बदलाव

अगस्त 2026 की कैबिनेट मंजूरी में नए प्लांट के लिए ₹2 करोड़ प्रति टन-प्रतिदिन (tonne per day, TPD) क्षमता तक पूंजी सहायता की बात हुई थी। पर सितंबर की ऑपरेशनल गाइडलाइंस में यह आंकड़ा बदल गया है।

पड़ावपूंजी सहायताऊपरी सीमा
अगस्त 2026, कैबिनेट एलान₹2 करोड़/TPDतय नहीं की गई
सितंबर 2026, ऑपरेशनल गाइडलाइंस₹1.25 करोड़/TPD₹30 करोड़ प्रति प्रोजेक्ट

बिज़नेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार प्रति-यूनिट सहायता घटी है, पर हर प्रोजेक्ट के लिए साफ ऊपरी सीमा तय होने से बजट का हिसाब लगाना बैंकों और निवेशकों दोनों के लिए आसान हो गया है। साथ में सिंक्रो ऑपरेटर को 10 साल तक ₹10 प्रति किलो तक की एफोर्डेबिलिटी सपोर्ट भी मिलेगी।

भारत पर इसका असर

मान लीजिए, किसी जिले में गन्ने की पत्ती, पराली और गोबर से एक CBG प्लांट लगता है। अब तक निवेशक के लिए सबसे बड़ा जोखिम यही रहता था कि गैस बिकेगी या नहीं। GOBARdhan के तहत तय ऑफटेक और तय दाम मिलने से बैंक से कर्ज लेने के लिए भी आसान हिसाब दिखाया जा सकता है।

हमें लगता है कि इसका सबसे बड़ा असर पराली जलाने की समस्या पर पड़ सकता है, क्योंकि जिस बायोमास का पहले कोई तय खरीदार नहीं था, उसे अब एक तय दाम पर ग्राहक मिल जाता है। PIB के आंकड़ों के अनुसार 17 सितंबर 2026 तक देशभर में 1,314 GOBARdhan बायोगैस प्लांट चालू थे।

इंडियन बायोगैस एसोसिएशन के अनुमान के अनुसार इससे भारत का प्राकृतिक गैस आयात बिल करीब $5 अरब तक घट सकता है, क्योंकि आयातित LNG की जगह घरेलू CBG इस्तेमाल होगी। कृषि कचरे से बनने वाले अन्य innovation जैसे Bio-Bricks भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

अभी क्या साफ नहीं है

गाइडलाइंस में दाम और खरीद की गारंटी साफ है, पर हर प्लांट की जगह पाइपलाइन या CGD नेटवर्क से कितनी नज़दीक है, यह अलग-अलग इलाके में अलग होगी। जहां नेटवर्क दूर है, वहां सिर्फ दाम की गारंटी काफी नहीं होगी।

यह भी साफ नहीं है कि मीथेन (methane) कंटेंट की लगातार जांच किस रफ्तार से हर छोटे प्लांट तक पहुंचेगी, या फीडस्टॉक (feedstock, कच्चा माल) की लागत तय दाम पर हर इलाके में मुनाफे में रहेगी या नहीं। solar ऊर्जा में grid की अटकी समस्या से पता चलता है कि क्लीन एनर्जी योजनाओं में सिर्फ नीति बनने से नेटवर्क की अड़चन खत्म नहीं होती।

आगे किन बातों पर नज़र रहे

CGD कंपनियों के लिए CBG ब्लेंडिंग की सीमा 2026-27 में 3%, 2027-28 में 4% और 2028-29 से 5% तय की गई है। यह देखना दिलचस्प होगा कि कंपनियां इस लक्ष्य को समय पर पूरा कर पाती हैं या नहीं।

पुराने डीज़ल वाहनों को साफ बनाने वाली तकनीक की तरह ही, GOBARdhan के नए प्लांट कितनी तेज़ी से ज़मीन पर उतरते हैं, यह अगले एक-दो साल के रजिस्ट्रेशन और निवेश के आंकड़ों से साफ होगा।

बायोगैस की कहानी अब सिर्फ ग्रामीण चूल्हे तक सीमित नहीं रही। तय खरीद और तय दाम मिलने के बाद असली परीक्षा यह होगी कि कितने प्लांट बैंक से कर्ज लेकर असल में ज़मीन पर बनते हैं।

पाठकों के तीन सवाल

GOBARdhan और SATAT में क्या फर्क है?

SATAT में मुख्यतः पूंजी सहायता और रिटेल नेटवर्क जोड़ने पर ज़ोर था, गैस बिकेगी या नहीं इसकी गारंटी नहीं थी। GOBARdhan में अब 100% तक खरीद और 10 साल तक तय दाम जैसी गारंटी जुड़ गई है, इसलिए बैंकों के लिए प्लांट को कर्ज देना आसान होगा।

क्या यह योजना सिर्फ बड़ी कंपनियों के लिए है?

नहीं। गाइडलाइंस में छोटे उद्यम (MSME) आधारित प्रोजेक्ट्स के लिए अलग क्रेडिट गारंटी सपोर्ट रखा गया है, ताकि छोटे प्रोमोटर भी बैंक से कर्ज ले सकें। कैपिटल असिस्टेंस की ऊपरी सीमा प्रति प्रोजेक्ट ₹30 करोड़ तय की गई है, जो छोटे और मझोले प्लांट के लिए काफी है।

इससे किसानों को सीधे क्या फायदा होगा?

पराली, गोबर और कृषि कचरे को अब पास के CBG प्लांट में तय दाम पर बेचा जा सकता है, बजाय जलाने या फेंकने के। बचे हुए बायो-स्लरी को खेत के लिए जैविक खाद के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

स्रोत: Business Standard, ETV Bharat, UNI India, PIB, Indian Biogas Association

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