क्या अगले महीने से बिना लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन के सड़क पर ज्यादा दमदार मोटर वाला ई-स्कूटर चलाना कानूनी हो जाएगा? सड़क परिवहन मंत्रालय (MoRTH) के नए मसौदे के अनुसार जवाब हां है, पर एक हद तक। मोटर पावर सीमा 250W से बढ़ाकर 600W करने का प्रस्ताव है, जबकि रफ़्तार अभी भी 25 किमी/घंटा पर ही रुकेगी।

नया मसौदा असल में बदलता क्या है

MoRTH ने 21 अगस्त 2026 को Central Motor Vehicles Rules, 1989 के Rule 2(u) में बदलाव का मसौदा जारी किया। इसमें लो-स्पीड इलेक्ट्रिक वाहनों की मोटर पावर सीमा 250W यानी 0.25kW से बढ़ाकर 600W यानी 0.6kW करने की बात कही गई है।

अधिकतम रफ़्तार की सीमा 25 किमी/घंटा पर वही बनी रहेगी, इसमें कोई बदलाव प्रस्तावित नहीं है। साथ ही मसौदे में अभी की 60 किलो खाली वजन सीमा को पूरी तरह हटाने का प्रस्ताव भी शामिल है।

पैमानाअभी का नियममसौदे में प्रस्ताव
मोटर पावर250W (0.25kW)600W (0.6kW)
अधिकतम रफ़्तार25 किमी/घंटा25 किमी/घंटा, कोई बदलाव नहीं
खाली वजन सीमा60 किलोसीमा हटाने का प्रस्ताव

बिना रजिस्ट्रेशन वाली छूट अभी कैसे काम करती है

पावर, रफ़्तार और वजन, तीनों शर्तें पूरी करने वाले वाहन को कानून में लगभग साइकिल जैसा माना जाता है। ऐसे वाहन को रजिस्ट्रेशन, ड्राइविंग लाइसेंस और हेलमेट, तीनों से छूट मिलती है।

मान लीजिए एक डिलीवरी वर्कर को रोज़ाना 5 किमी के भीतर पार्सल पहुंचाने हैं। अगर उसका स्कूटर तय सीमा के भीतर है, तो उसे नंबर प्लेट या हेलमेट में से किसी की ज़रूरत नहीं पड़ती। यही छूट भारत में लाखों वाहनों को बिना कागज़ी झंझट के सड़क पर रखती है।

यह ढांचा महिलाओं, कम आय वाले परिवारों और छोटी दूरी की यात्रा के लिए बनाया गया था, ताकि सस्ती इलेक्ट्रिक गाड़ी आसानी से अपनाई जा सके। मसौदे में यही ढांचा बना रहेगा, बस पावर और वजन की सीमा बदल रही है।

मसौदा लागू कैसे होगा, जांच कौन करेगा

ऑटोकार प्रोफेशनल के अनुसार वाहन को AIS-049 के Annex A में दी सुरक्षा शर्तें पूरी करनी होंगी, और इसकी पुष्टि AIS-041 के तहत अधिकृत टेस्टिंग एजेंसी करेगी। यानी हर मॉडल को छूट पाने से पहले लैब टेस्ट से गुज़रना होगा, सिर्फ कंपनी के दावे पर भरोसा नहीं किया जाएगा।

GKToday की रिपोर्ट के अनुसार नया नियम 1 अक्टूबर 2026 से लागू होने की उम्मीद है, पर यह तारीख अंतिम अधिसूचना जारी होने पर निर्भर करती है। 21 अगस्त के मसौदे पर आपत्ति देने की 30 दिन की समयसीमा सितंबर के आखिर में खत्म हो रही है।

दुरुपयोग पहले से चिंता की वजह क्यों है

ऑटोकार प्रोफेशनल के अनुसार MoRTH पहले भी राज्यों को आगाह कर चुका है कि कुछ डीलर 250W और 25kmph पर टेस्ट पास कराकर बाद में तेज़ मोटर और बड़ी बैटरी लगा देते हैं, जिससे असली रफ़्तार 40 से 55 किमी/घंटा तक पहुंच जाती है।

2023 में केरल के मोटर व्हीकल डिपार्टमेंट के छापों में 250W, 25kmph वाले स्कूटरों में 1,000W मोटर और बड़ी बैटरी लगाकर बेचे जाने का मामला सामने आया था। कई शोरूम बंद हुए, और सिर्फ एक RTO क्षेत्र में टैक्स नुकसान करीब ₹100 करोड़ आंका गया।

मुंबई में भी परिवहन विभाग ने गिग वर्कर्स द्वारा इस्तेमाल हो रहे बिना रजिस्ट्रेशन वाले ई-बाइक पर सख्ती शुरू की है, क्योंकि दुर्घटना के बाद वाहन का पता लगाना मुश्किल हो जाता है।

भारत और दुनिया के लिए मतलब

600 वॉट को समझने के लिए घर की एक मिसाल लें: एक आम सीलिंग फैन करीब 75 वॉट बिजली खींचता है, यानी नई सीमा करीब आठ फैन जितनी मोटर की ताकत के बराबर होगी। हमारा आकलन है कि इतनी ताकत चढ़ाई और भारी बैटरी वाले स्कूटर के लिए मददगार हो सकती है, पर भीड़भाड़ वाली सड़क पर टक्कर की ताकत भी उसी अनुपात में बढ़ती है।

BGauss जैसी कंपनियां इसे बाज़ार बढ़ने का मौका मानती हैं, क्योंकि आधुनिक लीथियम बैटरी वजन में भारी होती है और आज की 60 किलो सीमा नई डिज़ाइन को मुश्किल बनाती है। BusinessLine के हवाले से आ रही रिपोर्ट के अनुसार FY26 में लो-स्पीड ई-टूव्हीलर बिक्री करीब 2.3 से 2.6 लाख यूनिट रहने का अनुमान है, जो FY25 के 1.8-2.1 लाख से ज़्यादा है।

  • ज्यादा पावर से स्कूटर चढ़ाई और ओवरब्रिज पर बेहतर परफॉर्म कर सकता है।
  • भारी लीथियम बैटरी वाले नए डिज़ाइन को वजन सीमा से राहत मिलेगी।
  • दुरुपयोग रोकने के लिए जांच और निगरानी की जिम्मेदारी भी उतनी ही बढ़ जाएगी।

यह उछाल भारत के बड़े इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाज़ार की उसी बढ़त का हिस्सा है, जहां अगस्त 2026 में पहली बार बिक्री हिस्सेदारी 10% पार कर गई। यूरोपीय संघ में 250W और 25km/h की सीमा सिर्फ पैडल-असिस्ट साइकिल पर लागू होती है, थ्रॉटल वाले भारतीय स्कूटर जैसी नहीं; तेज़ मोपेड और स्पीड-पेडेलेक के लिए वहां अलग, रजिस्टर्ड कैटेगरी है। चीन में भी ज़्यादातर शहरों में ऐसे वाहनों पर प्लेट और हेलमेट अनिवार्य है।

जो अभी पता नहीं, आगे क्या देखना है

यह अभी साफ नहीं कि वजन सीमा पूरी तरह हटाने पर मौजूदा 250W वाले पुराने स्कूटरों को दोबारा टेस्ट कराना होगा या नहीं। यह भी तय नहीं कि सरकार पावर और वजन के साथ हेलमेट अनिवार्य करने जैसी कोई नई सुरक्षा शर्त जोड़ेगी या नहीं।

आगे तीन चीज़ों पर नज़र रखनी होगी: अंतिम अधिसूचना का ठीक मसौदा, 16-17 साल के किशोरों को 1,500W तक के ई-टूव्हीलर चलाने की अलग चल रही चर्चा का नतीजा, और Yulu जैसी कंपनियों की आपत्ति पर सरकार का जवाब।

तीन सवाल जिनके जवाब अभी अधूरे हैं

क्या 1 अक्टूबर से यह नियम तुरंत लागू हो जाएगा?

तारीख प्रस्तावित है, पक्की नहीं। GKToday के अनुसार यह अंतिम अधिसूचना के प्रकाशन पर निर्भर है, और आपत्तियों की समयसीमा के बाद ही मसौदा अंतिम रूप लेगा।

क्या इससे तेज़ रफ़्तार वाले स्कूटर सड़क पर आ जाएंगे?

रफ़्तार सीमा 25 किमी/घंटा पर वही रहेगी। बदलाव सिर्फ मोटर की ताकत और वजन में है, कागज़ पर रफ़्तार नहीं बढ़ रही, हालांकि दुरुपयोग की आशंका बनी रहती है।

Yulu और BGauss के बीच असल विवाद किस बात पर है?

Yulu ने 12 सितंबर 2026 को कहा कि वजन एक भौतिक सीमा है जिसे बदला नहीं जा सकता, जबकि इलेक्ट्रॉनिक स्पीड लिमिट को बाद में छेड़ा जा सकता है। BGauss जैसे OEM इसे बाज़ार के लिए ज़रूरी सुधार मानते हैं।

कुल मिलाकर यह मसौदा भारत की सबसे सस्ती और सबसे बेरोकटोक इलेक्ट्रिक मोबिलिटी कैटेगरी का दायरा बड़ा करता है। असली इम्तिहान यह होगा कि नियम कागज़ पर जितना संतुलित दिखता है, सड़क पर उतना ही संतुलित निकलता है या नहीं।

स्रोत: MoRTH, GKToday, Autocar Professional, BusinessLine, Entrepreneur India

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