Bitchat आख़िर है क्या, जिसे भारत सरकार ने ब्लॉक करने को कहा? यह Twitter के सह-संस्थापक Jack Dorsey का बनाया एक मैसेजिंग ऐप है, जो इंटरनेट या सिम कार्ड के बिना भी, सिर्फ़ Bluetooth से फ़ोन-दर-फ़ोन मैसेज भेज सकता है। 3 अक्टूबर 2026 को Apple ने इसे MeitY के आदेश पर भारत के App Store से हटा दिया।

तो यह ऐप असल में काम कैसे करता है, और सरकार को इससे परेशानी क्यों हुई? एक-एक कदम समझते हैं।

पहला कदम: बिना इंटरनेट के मैसेज भेजना

Pasqualepillitteri की रिपोर्ट के अनुसार Bitchat इंटरनेट, सिम या किसी सेंट्रल सर्वर के बिना चलता है। मान लीजिए कोई ट्रेक पर है, जहाँ मोबाइल नेटवर्क नहीं पहुँचता। दोनों तरफ़ के फ़ोन में Bitchat ऐप खुला हो, और वे Bluetooth की सीमा (करीब 30-100 मीटर) के भीतर हों, तो मैसेज सीधे एक फ़ोन से दूसरे फ़ोन में चला जाता है।

इसी वजह से भूकंप, बाढ़ या इंटरनेट बंद होने जैसी स्थिति में भी यह ऐप काम करता रहता है, जहाँ सामान्य मैसेजिंग ऐप पूरी तरह ठप हो जाते हैं।

नीचे यह आम मैसेजिंग ऐप्स से कैसे अलग है, एक नज़र में देखा जा सकता है।

पहलूWhatsApp/SignalBitchat
इंटरनेट ज़रूरी?हाँनहीं
फ़ोन नंबर ज़रूरी?हाँनहीं
सर्वरकेंद्रीय कंपनी के सर्वर सेकोई सर्वर नहीं, फ़ोन-से-फ़ोन
रेंजदुनिया में कहीं भीBluetooth रेंज या मेश चेन तक सीमित

दूसरा कदम: एक फ़ोन से दूसरे फ़ोन तक मैसेज की 'यात्रा'

अगर भेजने वाला और पाने वाला दोनों Bluetooth रेंज में न हों, तो भी मैसेज पहुँच सकता है। इसे 'mesh network' कहा जाता है: बीच में खड़ा कोई तीसरा फ़ोन, जिसमें Bitchat खुला है, मैसेज को अपने आप आगे के फ़ोन तक रिले कर देता है, जैसे हाथ से हाथ ज़ंजीर बनाकर कोई चिट्ठी आगे बढ़ाई जाए।

Blockonomi और अन्य रिपोर्टों के अनुसार इसमें कोई फ़ोन नंबर या central account नहीं चाहिए, और मैसेज end-to-end encrypted होते हैं। यानी बीच के फ़ोन वाले भी असली मैसेज नहीं पढ़ सकते, सिर्फ़ उसे आगे बढ़ाते हैं।

इसी वजह से किसी भीड़भाड़ वाली जगह पर, जैसे किसी बड़े मेले या त्योहार में, जहाँ मोबाइल नेटवर्क अक्सर जाम हो जाता है, आस-पास मौजूद Bitchat यूज़र्स की चेन बनकर मैसेज एक छोर से दूसरे छोर तक पहुँच सकता है, वह भी टावर या इंटरनेट के बिना।

तीसरा कदम: भारत ने क्यों रोका

IANS की रिपोर्ट के अनुसार जुलाई 2026 में सरकार ने GitHub को Bitchat के source code रिपॉज़िटरी हटाने का आदेश दिया था, यह कहते हुए कि यह तकनीक क़ानूनी निगरानी से बचने और गैरक़ानूनी गतिविधियों में मदद कर सकती है।

Cryptotimes और अन्य रिपोर्टों के अनुसार 3 अक्टूबर 2026 को MeitY ने Information Technology Act की धारा 69A के तहत Apple को सीधा आदेश दिया, जिसके बाद ऐप और उसका TestFlight बीटा वर्शन भी भारत से हटा दिया गया। धारा 69A सरकार को राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था जैसी वजहों से किसी भी ऐप या वेबसाइट को ब्लॉक करने का अधिकार देती है।

Jack Dorsey ने ख़ुद X पर Apple की नोटिस का स्क्रीनशॉट डालते हुए लिखा, 'government of India officially removes bitchat from the App Store.' नोटिस में यह भी कहा गया था कि TestFlight के ज़रिए सार्वजनिक टेस्टिंग लिंक भी अब भारत में काम नहीं करेंगे।

यह भारत का अकेला फ़ैसला नहीं

Mexc.com की रिपोर्ट के अनुसार फ़रवरी 2026 में चीन ने भी Cyberspace Administration of China के आदेश पर Bitchat को अपने App Store से हटवाया था, 'जनमत और सामाजिक लामबंदी' से जुड़े एक नियम के उल्लंघन का हवाला देकर।

Mexc.com के अनुसार Bitchat हाल के महीनों में Madagascar, Uganda, Nepal, Indonesia और Iran जैसे देशों में हुए प्रदर्शनों के दौरान लोकप्रिय हुआ था, जब सरकारों ने इंटरनेट बंद करने की कोशिश की थी। इसलिए कई सरकारें इसे संवेदनशील मानती हैं।

Cryptotimes के अनुसार भारत के मामले में Apple का नोटिस चीन में इस्तेमाल हुई भाषा (Guideline 5) से मिलता-जुलता था, यानी यह कोई अनोखा कदम नहीं, बल्कि कई देशों में दोहराया जा रहा एक पैटर्न जैसा दिखता है।

हम भारतीयों के लिए क्या बदलेगा

Cryptotimes के अनुसार Internet Freedom Foundation (IFF) ने जुलाई के GitHub आदेश को 'असंवैधानिक और सत्तावादी' कहा था। यानी सरकार और डिजिटल-अधिकार समूहों के बीच इस पर साफ़ मतभेद है।

यह हमारा आकलन है: Bitchat जैसी तकनीक दो तरह से देखी जा सकती है। आपदा में काम आने वाले संचार के साधन के तौर पर, या निगरानी से बचने के औज़ार के तौर पर। भारत का फ़ैसला दूसरी चिंता को प्राथमिकता देता है, जबकि Apple का नोटिस यह नहीं बताता कि वास्तव में कौन-सा 'गैरक़ानूनी कंटेंट' पाया गया।

भारत में हर साल बाढ़, चक्रवात और भूकंप जैसी आपदाओं में मोबाइल नेटवर्क अक्सर ठप हो जाता है। ऐसी स्थितियों में Bluetooth-mesh जैसी तकनीक मदद कर सकती थी, इसलिए इसका हटना सिर्फ़ एक सुरक्षा-फ़ैसला नहीं, एक मौके को भी बंद करने जैसा है।

अभी क्या साफ नहीं है

MeitY के आदेश का पूरा मूल दस्तावेज़ सार्वजनिक नहीं किया गया है। Apple के नोटिस में भी यह साफ़ नहीं बताया गया कि ऐप में ठीक कौन-सा कंटेंट 'भारत में गैरक़ानूनी' माना गया।

यह भी साफ़ नहीं कि क्या Dorsey या Bitchat की टीम MeitY के पास अपील करेगी, या भारत में ऐप को किसी बदलाव के साथ दोबारा उपलब्ध कराने की कोशिश होगी।

यह भी पता नहीं कि जिन लोगों के फ़ोन में ऐप पहले से इंस्टॉल है, वे इसे आगे इस्तेमाल कर सकेंगे या नहीं, क्योंकि App Store से हटना और डिवाइस से हटना दो अलग बातें हैं।

आगे किन बातों पर नज़र रहे

तीन चीज़ें आने वाले हफ़्तों में साफ़ करेंगी कि यह मामला कहाँ जाता है:

  • क्या MeitY या सरकार इस आदेश की वजह सार्वजनिक रूप से बताती है।
  • क्या IFF जैसे संगठन इस आदेश को अदालत में चुनौती देते हैं, जैसा जुलाई के आदेश पर उन्होंने संकेत दिया था।
  • क्या Bluetooth-mesh जैसी बिना-इंटरनेट तकनीकों पर भारत में कोई साफ़ नियम बनता है, ताकि आपदा के समय इनका इस्तेमाल और सुरक्षा-चिंता, दोनों को साथ संभाला जा सके।

फ़िलहाल जो साफ़ है: जो तकनीक किसी के लिए आपदा में जीवनरक्षक हो सकती है, वही किसी सरकार के लिए सुरक्षा का सवाल भी बन जाती है। Bitchat इसी उलझन के बीच खड़ा है।

स्रोत: IANS, Cryptotimes, Pasqualepillitteri, Blockonomi, Mexc.com

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