बेंगलुरु की इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल कंपनी Ultraviolette Automotive ने Series E राउंड में 85 मिलियन डॉलर जुटाए हैं, अपनी स्थापना के करीब आठ साल बाद। यह पैसा सीधे अमेरिका, लैटिन अमेरिका और साउथईस्ट एशिया में विस्तार और तमिलनाडु की नई फैक्ट्री में लगेगा।

23 सितंबर 2026 को हुई यह घोषणा कंपनी के लिए मोड़ है। पहले आठ साल ज्यादातर रिसर्च और तकनीक बनाने में गए, अब कंपनी बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन और ग्लोबल मार्केट की तरफ बढ़ रही है।

क्या हुआ: राउंड की पूरी डिटेल

Business Standard और EVreporter के अनुसार यह Series E राउंड Yali Capital (डीप टेक फंड) और TDK Ventures की अगुवाई में हुआ। साथ ही Walden International के चेयरमैन और Intel के CEO लिप-बू टैन ने निजी तौर पर निवेश किया और कंपनी के सलाहकार (advisor) के तौर पर जुड़े हैं।

अभी Ultraviolette भारत और यूरोप के 20 देशों में अपनी F77 और X-47 Crossover इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिलें बेचती है। कंपनी की स्थापना 2016 में नारायण सुब्रमण्यम (CEO) और नीरज राजमोहन (CTO) ने की थी।

क्यों निवेशकों को भरोसा हुआ

Yali Capital के फाउंडिंग मैनेजिंग पार्टनर गणपति सुब्रमण्यम के अनुसार उन्हें Ultraviolette की बैटरी, पावरट्रेन, सॉफ्टवेयर और रडार तक फैली इन-हाउस इंजीनियरिंग गहराई ने आकर्षित किया। कंपनी ने X-47 में रडार-आधारित सेफ्टी फीचर भी शामिल किए हैं।

लिप-बू टैन के अनुसार उन्हें कंपनी की गहरी इंजीनियरिंग, मजबूत IP और मुश्किल समस्याओं से जूझने की इच्छा पसंद आई। कंपनी ने 48V से 400V तक की बैटरी आर्किटेक्चर शुरू से खुद बनाई है, ना कि बाहर से खरीदी।

TDK Ventures के इन्वेस्टमेंट डायरेक्टर रवि जैन के अनुसार बेहतर तकनीक वाले प्रोडक्ट्स ही इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर अपनाने की रफ्तार बढ़ा सकते हैं, और उनका मानना है कि Ultraviolette इस बदलाव में आगे रहने की स्थिति में है।

पैसा कहां खर्च होगा: तमिलनाडु की नई फैक्ट्री

यह फंडिंग कंपनी के तमिलनाडु के होसुर में नई BIGGA फैक्ट्री के ऐलान के तुरंत बाद आई है। 5paisa और EMobility+ के अनुसार इस फैक्ट्री में करीब 779 करोड़ रुपए (करीब 82 मिलियन डॉलर) अगले पांच सालों में लगेंगे।

होसुर फैक्ट्री शुरुआत में हर साल 2.5 लाख गाड़ियां बना सकेगी, जिसे बाद में 5 लाख तक बढ़ाया जा सकता है। बेंगलुरु के मौजूदा प्लांट की क्षमता सिर्फ 50,000 गाड़ी सालाना है, यानी होसुर की शुरुआती क्षमता ही उससे 5 गुना और पूरी क्षमता 10 गुना होगी।

आठ साल की रणनीति में बदलाव

TechStory की रिपोर्ट के अनुसार CEO नारायण सुब्रमण्यम ने कहा कि कंपनी के पहले आठ साल का ज्यादातर पैसा रिसर्च और कई गाड़ियों के लिए साझा तकनीकी प्लेटफॉर्म बनाने में गया। यह Series E राउंड उस दौर के बाद स्केलिंग और ग्लोबल विस्तार की तरफ बदलाव दिखाता है।

कंपनी की अगली गाड़ियां, Tesseract इलेक्ट्रिक स्कूटर और Shockwave एंड्यूरो मोटरसाइकिल, मौजूदा F77 और X-47 से सस्ते सेगमेंट में आएंगी। इससे Ultraviolette प्रीमियम से आगे बढ़कर बड़े बाजार तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

Wikipedia के अनुसार Ultraviolette को 2022 में TVS Motor और Zoho Corporation से 15 मिलियन डॉलर का Series C मिला था। उस दौर में कंपनी सिर्फ एक गाड़ी, F77, बेच रही थी। आज कंपनी के पास दो प्रोडक्ट बाजार में हैं और दो नए रास्ते में हैं, यानी चार साल में उसका पोर्टफोलियो दोगुना हो चुका है।

हम भारतीयों के लिए क्या बदलेगा

StartupTalky की रिपोर्ट के अनुसार भारत में 2026 के पहले आठ महीनों में 10 लाख से ज्यादा इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बिके, और अगस्त 2026 में पहली बार इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर कुल टू-व्हीलर बिक्री के 10% से ऊपर पहुंचे। McKinsey के अनुसार FY2030 तक यह हिस्सेदारी 40-45% तक जा सकती है।

ठीक वैसे ही जैसे स्पेसटेक फंडिंग की हकीकत में दिखा कि डीप टेक स्टार्टअप्स के लिए असली चुनौती बाजार तक पहुंचना है, Ultraviolette के लिए भी अगला कदम सिर्फ नई गाड़ी बनाना नहीं, बड़े पैमाने पर बेचना और सर्विस देना है। कंपनी की इन-हाउस बैटरी और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स तकनीक VIHAAN जैसे स्वदेशी चिप प्रोजेक्ट्स जैसी सोच दिखाती है: शुरू से खुद बनाना, बाहर से खरीदना नहीं।

अभी क्या साफ नहीं है

यह साफ नहीं है कि 85 मिलियन डॉलर में से कितना पैसा सीधे होसुर फैक्ट्री में जाएगा और कितना अमेरिका, यूरोप और लैटिन अमेरिका के विस्तार में। कंपनी ने यह ब्रेकअप अभी सार्वजनिक नहीं किया है।

यह भी साफ नहीं है कि अमेरिका जैसे मुश्किल बाजार में मैन्युफैक्चरिंग, डिस्ट्रिब्यूशन, सर्विस नेटवर्क और कीमत का पूरा ढांचा 2027 तक कैसे और कितना तैयार होगा। अभी सिर्फ इरादा घोषित हुआ है, पूरी योजना नहीं।

आगे क्या देखें

तीन चीजों पर नजर रखना जरूरी होगा। पहला, Tesseract इलेक्ट्रिक स्कूटर की लॉन्चिंग, जो Yali Capital के अनुसार अगले साल की शुरुआत में आ सकती है। दूसरा, Shockwave एंड्यूरो मोटरसाइकिल का बाजार में आना।

तीसरा, होसुर फैक्ट्री का चरणबद्ध शुरू होना और 2027 में अमेरिकी बाजार में असली एंट्री, जो तय करेगी कि यह विस्तार सिर्फ ऐलान रहता है या असली ग्लोबल कारोबार बनता है। इसके साथ यह भी देखना होगा कि लिप-बू टैन जैसे सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के दिग्गज की सलाह कंपनी की हार्डवेयर रणनीति को कैसे प्रभावित करती है।

Ultraviolette अब तक ज्यादातर भारत और यूरोप में एक प्रीमियम ब्रांड रही है। 85 मिलियन डॉलर और नई फैक्ट्री के साथ कंपनी बड़े पैमाने के कारोबार में कदम रख रही है, पर असली परीक्षा तब होगी जब गाड़ियां असल में अमेरिका की सड़कों पर उतरेंगी।

Ultraviolette अभी कहां अपनी गाड़ियां बेचती है?

कंपनी अभी भारत और यूरोप के 20 देशों में F77 और X-47 Crossover मोटरसाइकिलें बेचती है। अमेरिका, लैटिन अमेरिका और साउथईस्ट एशिया में एंट्री अभी योजना के स्तर पर है।

नई फंडिंग का पैसा किन कामों में लगेगा?

कंपनी के अनुसार पैसा मौजूदा और आने वाली गाड़ियों के प्रोडक्शन, नए EV प्लेटफॉर्म और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार पर खर्च होगा, जिसमें तमिलनाडु की नई फैक्ट्री भी शामिल है।

Ultraviolette अमेरिका में कब उतरेगी?

कंपनी ने 2027 में अमेरिका बाजार में एंट्री का लक्ष्य रखा है, पर पूरी लॉन्च योजना, कीमत या डीलर नेटवर्क की जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं हुई है।

कंपनी के फाउंडर कौन हैं और कब शुरू हुई?

Ultraviolette की शुरुआत 2016 में नारायण सुब्रमण्यम (CEO) और नीरज राजमोहन (CTO) ने बेंगलुरु में की थी। 2022 में कंपनी को TVS Motor और Zoho से Series C फंडिंग मिली थी।

स्रोत: Business Standard, EVreporter, TechStory, StartupTalky, 5paisa

यह भी पढ़ें