30 सितंबर 2026 की शाम 5 बजे तकनीकी विकास बोर्ड (TDB) ने RDI Fund के तहत नई अर्जियां लेना बंद कर दिया। Business Standard के अनुसार नोटिस में वजह सिर्फ 'प्रशासनिक कारण' लिखी गई थी। यानी 1 लाख करोड़ रुपए की इस सरकारी योजना में फिलहाल नए आवेदन नहीं लिए जा रहे, जबकि पहला दौर पूरा हो चुका है और दूसरा दौर चल रहा है।
पहले: 1 लाख करोड़ रुपए का वादा
Deccan Herald (PTI) के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 3 नवंबर 2025 को RDI (Research, Development and Innovation) Fund लॉन्च किया। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसे 1 जुलाई 2025 को छह साल के लिए मंजूरी दी थी। मकसद निजी कंपनियों की रिसर्च को लंबी अवधि का और सस्ता पैसा देना है।
ढांचा दो स्तर का है। अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) के भीतर बना विशेष कोष (Special Purpose Fund) पूरी रकम का संरक्षक है। उसके नीचे TDB और BIRAC जैसे दूसरे स्तर के फंड मैनेजर कंपनियों तक पैसा पहुंचाते हैं। Deccan Herald के अनुसार यह कोष सीधे उद्योगों या स्टार्टअप में निवेश नहीं करता।
पहला दौर: 22 कंपनियां, 2,192 करोड़ रुपए
TDB ने पहली अर्जी-खिड़की फरवरी 2026 में खोली। Business Standard के अनुसार पहले दौर में 22 कंपनियां चुनी गईं। रिपोर्ट ने The ePlane Company (285 करोड़ रुपए), Tejas Networks (250 करोड़), Agnikul Cosmos (200 करोड़) और ideaForge (151 करोड़) के आंकड़े दिए हैं। Dhruva Space, Manastu Space और GalaxEye भी सूची में हैं।
Indian Pharma Post में दी गई सरकारी जानकारी के अनुसार इन 22 परियोजनाओं की कुल लागत 4,744 करोड़ रुपए है, जिसमें से 2,192 करोड़ रुपए RDI Fund से रियायती कर्ज के रूप में मंजूर हुए। यानी लागत का करीब 46% हिस्सा सरकारी कोष से आया। इनमें से एक कंपनी की कहानी हमारे GalaxEye को TDB की मदद वाले लेख में है।
अब: 30 सितंबर को क्या बदला
नीचे की तालिका में योजना की शुरुआती तस्वीर और अब की स्थिति साथ-साथ रखी गई है। सभी आंकड़े Business Standard की रिपोर्ट से हैं।
| पैमाना | पहले | अब |
|---|---|---|
| अर्जी की खिड़की | फरवरी 2026 में पहली बार खुली | 30 सितंबर 2026 को बंद |
| चुनी गई कंपनियां | पहले दौर में 22 | दूसरे दौर में 13 कंपनियां प्रक्रिया में |
| TDB के लिए पैसा | जरूरत का अनुमान 5,000 करोड़ रुपए | कुल मंजूर आवंटन 3,000 करोड़ रुपए |
TDB सचिव राजेश कुमार पाठक ने 28 सितंबर को Business Standard को पुष्टि की कि अतिरिक्त 1,000 करोड़ रुपए मिल चुके हैं और दूसरे दौर में लग रहे हैं। उन्होंने पहले कहा था कि पैसा आए बिना कंपनियों से समझौते नहीं हो सकते, पर मूल्यांकन रुका नहीं है। दूसरे दौर की 13 कंपनियों में 11 डीप-टेक स्टार्टअप हैं।
पैसा कम पड़ा या अर्जियां ज्यादा: दो बयान
Business Standard में DST के एक सूत्र के अनुसार मांग और TDB के पास मौजूद पूंजी में बेमेल है, क्योंकि ANRF से मिला पैसा आ रही परियोजनाओं के लिए काफी नहीं। Outlook Business ने Indian Express के हवाले से लिखा कि पहले दौर का पैसा खत्म होने के बाद नए ऑफर के लिए रकम नहीं पहुंची, और 300 से ज्यादा कंपनियां आवेदन कर चुकी हैं।
Moneycontrol के सूत्र अलग वजह बताते हैं। उसके अनुसार 230 से ज्यादा डीप-टेक प्रस्ताव जमा हो गए हैं और जून से सितंबर के बीच करीब 175 नए प्रस्ताव आए। इसलिए TDB ने बैकलॉग निपटाने के लिए नई अर्जियां रोकीं। रिपोर्ट के अनुसार TDB करीब 2,900 करोड़ रुपए 35 परियोजनाओं में प्रतिबद्ध कर चुका है।
Outlook Business के अनुसार फंड मैनेजर चुनने की प्रक्रिया भी धीमी रही। इस भूमिका के लिए आवेदन जनवरी में बंद हुए थे, और समिति ने सिफारिशें मई में तय कीं।
भारत पर इसका असर
TDB के लिए मंजूर 3,000 करोड़ रुपए पूरे 1 लाख करोड़ रुपए के कोष का सिर्फ 3% है। पाठक का अपना अनुमान 5,000 करोड़ रुपए का था, यानी जरूरत का 60% ही पूरा हुआ है। यह हमारी राय में शुरुआती नतीजे मांग की कमी नहीं, पैसा नीचे तक पहुंचने की रफ्तार की परीक्षा दिखाते हैं।
हार्डवेयर और स्पेस जैसे लंबे चक्र वाले स्टार्टअप के लिए खिड़की बंद होना योजना बनाने का जोखिम है। ऐसे में निजी डीप-टेक पूंजी की भूमिका बढ़ती है, जैसे IITM के डीप-टेक वेंचर फंड का पहला क्लोज। फिर भी सरकारी रियायती कर्ज की जगह निजी पैसा पूरी तरह नहीं ले सकता।
एक सीधा उदाहरण लें। मान लीजिए किसी हार्डवेयर स्टार्टअप को 100 करोड़ रुपए की परियोजना के लिए 46 करोड़ रुपए का रियायती कर्ज चाहिए, यानी पहले दौर का औसत अनुपात। अगर कर्ज की मंजूरी के बाद पैसा महीनों अटके, तो टेस्टिंग, फैक्ट्री और भर्ती की पूरी समयरेखा खिसक जाती है। यही वजह है कि रकम पहुंचने की रफ्तार घोषणा जितनी ही मायने रखती है।
किन सवालों के जवाब बाकी हैं
TDB ने खिड़की दोबारा खुलने की कोई तारीख सार्वजनिक नहीं की है। यह भी साफ नहीं कि ANRF आगे कितना और पैसा जारी करेगा। BIRAC ने Business Standard के अनुसार अब तक किसी स्टार्टअप को पैसा देने की प्रतिबद्धता नहीं जताई है।
आंकड़े भी रिपोर्टों में अलग हैं। Business Standard पहले दौर में 22 कंपनियां गिनता है, जबकि Moneycontrol 35 परियोजनाओं की बात करता है। शुरुआती आवंटन भी अलग बताया गया है, इसलिए अंतिम तस्वीर आधिकारिक घोषणा से ही साफ होगी।
अगली खबर पर नज़र
पहला, दूसरे दौर की 13 कंपनियों की घोषणा, जो पाठक के अनुसार पैसा मिलते ही होगी। दूसरा, BIRAC का पहला स्टार्टअप-निवेश। तीसरा, ANRF का और फंड मैनेजर नियुक्त करना और TDB की खिड़की दोबारा खुलना।
योजना बंद नहीं हुई है। रुका सिर्फ नई अर्जियों का सिलसिला है, और पहला साल पूरा होते-होते असली सवाल यह बन गया है कि घोषित रकम कंपनियों तक कितनी जल्दी पहुंचती है।
क्या RDI Fund बंद हो गया?
नहीं। रिपोर्टों के अनुसार सिर्फ TDB ने नई अर्जियां लेना रोका है। दूसरे दौर का मूल्यांकन जारी है और 1 लाख करोड़ रुपए की योजना कागज पर चालू है।
RDI Fund में अर्जी दोबारा कब खुलेगी?
अभी कोई तारीख सार्वजनिक नहीं है। TDB ने बंद करने की वजह 'प्रशासनिक कारण' बताई है, और खुलने की शर्त अतिरिक्त पैसे की उपलब्धता से जुड़ी बताई जा रही है।
RDI Fund का पैसा किन्हें मिला है?
Business Standard के अनुसार पहले दौर में 22 कंपनियां चुनी गईं, जिनमें ePlane, Agnikul Cosmos, ideaForge, Tejas Networks, Dhruva Space, Manastu Space और GalaxEye शामिल हैं।
RDI Fund में कर्ज और अनुदान का फर्क क्या है?
सरकारी जानकारी के अनुसार यह योजना गैर-वापसी अनुदान नहीं, बल्कि लंबी अवधि का रियायती कर्ज देती है। इसलिए कंपनियों को पैसा लौटाना होगा।
स्रोत: Business Standard, Outlook Business, Moneycontrol, Indian Express, Deccan Herald, Indian Pharma Post