क्या चुंबकत्व का तीसरा रूप 2026 में खोजा गया, और क्या उसने सौ साल की भौतिकी गलत कर दी? नहीं। Altermagnetism का सिद्धांत 2019 से 2022 के बीच आया और पहला प्रयोगात्मक प्रमाण फ़रवरी 2024 में छपा। Mainz विश्वविद्यालय की विज्ञप्ति के अनुसार 2026 की खबर पुरस्कार की है: Europhysics Prize Jairo Sinova, Libor Šmejkal और Tomas Jungwirth को मिला।
इस लेख में 'पहले बनाम अब' का क्रम है: चुंबकत्व के दो पुराने परिवार, तीसरे तक पहुंचने की कड़ियां, और भारत में चल रहे काम की झलक।
पहले: चुंबकत्व के दो परिवार
हर इलेक्ट्रॉन एक छोटे चुंबक की तरह बर्ताव करता है, जिसकी दिशा को स्पिन (spin) कहते हैं। Paul Scherrer Institute (PSI) के अनुसार चुंबकीय पदार्थ की बुनियादी अवस्था इन स्पिनों और परमाणुओं की बनावट से तय होती है। फ्रिज पर चिपकने वाला चुंबक फेरोमैग्नेट है: सारे स्पिन एक दिशा में, इसलिए कुल चुंबकत्व (net magnetisation) बनता है। PSI के अनुसार यह शाखा कई हज़ार साल से ज्ञात है।
करीब एक सदी पहले एंटीफेरोमैग्नेट की खोज से समझ बनी कि चुंबकत्व फ्रिज तक सीमित नहीं। इनमें स्पिन बारी-बारी उलटी दिशाओं में होते हैं, तो कुल चुंबकत्व शून्य रहता है और ये फ्रिज पर नहीं चिपकते। PSI के अनुसार तब से चुंबकीय पदार्थ इन्हीं दो शाखाओं में बंटे माने जाते थे। पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र की कहानी में चुंबकत्व की बुनियादी बातें पहले लिखी जा चुकी हैं।
बदलाव की कड़ियां: 2019 से 2026
- 2019: PSI के अनुसार Jungwirth और चेक विज्ञान अकादमी व Mainz के सिद्धांतकारों ने ऐसे पदार्थों का एक वर्ग पहचाना जिसकी स्पिन-बनावट पुराने दोनों वर्णनों में नहीं बैठती थी।
- 2022: उसी टीम ने भविष्यवाणियां छापीं। PSI के अनुसार दो सौ से ज़्यादा संभावित पदार्थ मिले, जिनमें कुचालक, अर्धचालक, धातुएं और अतिचालक शामिल हैं।
- फ़रवरी 2024: Nature में Krempaský और साथियों का पेपर छपा। Swiss Light Source पर मैंगनीज़ टेलुराइड (MnTe) में अलग स्पिन-अवस्थाओं के ऊर्जा-स्तरों का बंटना दिखा, जबकि कुल चुंबकत्व शून्य था।
- 5 अक्टूबर 2026: ScienceDaily की रिपोर्ट के अनुसार एक और पदार्थ, कोबाल्ट-युक्त टैंटलम डाइसेलेनाइड (Co₁/₄TaSe₂), में altermagnetism के प्रायोगिक संकेत मिले।
- 2026: EPS की Condensed Matter Division ने तीनों सिद्धांतकारों को Europhysics Prize के लिए चुना। Mainz के अनुसार समारोह सितंबर 2026 में Graz में तय था।
अब: तीसरा परिवार और उसकी पहचान
PSI के अनुसार altermagnet में स्पिन एंटीफेरोमैग्नेट की तरह बारी-बारी उलटे होते हैं, इसलिए कुल चुंबकत्व नहीं बनता। फिर भी क्रिस्टल की समरूपता के कारण इलेक्ट्रॉनों की ऊर्जा-पट्टियों में स्पिन-ध्रुवीकरण दिखता है, जो दिशा के साथ पलटता है। नाम 'alter' इसी पलटने से आया है।
| पहलू | फेरोमैग्नेट | एंटीफेरोमैग्नेट | Altermagnet |
|---|---|---|---|
| कुल चुंबकत्व | है | शून्य | शून्य |
| फ्रिज पर चिपकना | हां | नहीं | नहीं |
| मज़बूत स्पिन-निर्भर प्रभाव | हां | कमी | हां (फेरोमैग्नेट जैसे) |
| स्पिंट्रोनिक्स में अड़चन | कुल चुंबकत्व से bits में crosstalk | उपयोगी स्पिन-प्रभाव का अभाव | दोनों खूबियां, पर सब खोज-स्तर पर |
रोज़ की भाषा में समझें, और यह उदाहरण हमारा है: हॉल में आधे लोग दाएं और आधे बाएं मुंह करके बैठे हैं, तो कुल मिलाकर संतुलन है। पर कुर्सियों की बनावट ऐसी हो कि पूरब से आने वाले को हमेशा दाएं मुंह वाले और उत्तर से आने वाले को बाएं मुंह वाले मिलें, तब आने-जाने वाले के लिए हॉल 'चुंबकीय' लगेगा।
क्यों बदला: दोनों पुरानी खूबियां एक साथ
PSI के अनुसार स्पिंट्रोनिक्स में जानकारी ढोने के लिए इलेक्ट्रॉन के आवेश के साथ उसका स्पिन भी इस्तेमाल होता है। फेरोमैग्नेट में मज़बूत स्पिन-प्रभाव मिलते हैं, पर कुल चुंबकत्व bits के बीच crosstalk पैदा करता है और उपकरणों को छोटा करने में बाधा बनता है। एंटीफेरोमैग्नेट में कुल चुंबकत्व नहीं, इसलिए वे छोटे और ऊर्जा-कुशल बन सकते हैं, पर उपयोगी स्पिन-प्रभाव कमज़ोर रहते हैं।
Altermagnet इन दोनों को जोड़ते हैं। Jungwirth ने PSI के बयान में कहा कि जिसे लोग असंभव मानते थे, वह संभव निकला। उनके अनुसार ये ऐसे क्रिस्टलों में भी हैं जो लोगों की दराज़ में पहले से थे। MnTe जैसा सीधा दो-तत्व वाला पदार्थ परंपरा से सिर्फ़ एंटीफेरोमैग्नेट माना जाता था।
Mainz की विज्ञप्ति के अनुसार इसके तार टोपोलॉजिकल घटनाओं, अपारंपरिक अतिचालकता और प्रबल इलेक्ट्रॉन-अंतःक्रिया वाले क्वांटम पदार्थों से भी जुड़ते हैं। इसलिए इसे सिर्फ़ मेमोरी की खबर मानना अधूरा होगा।
भारत के लिए क्या मायने
PTI की रिपोर्ट (The Tribune पर, अगस्त 2026) के अनुसार IIT भुवनेश्वर के Manish Kumar Mohanta की टीम ने Virginia Commonwealth University के साथ तीन-परमाणु-मोटी FeCl₃ परत में 'i-wave' altermagnetism की सैद्धांतिक भविष्यवाणी की। यह Nano Letters में छपी। यह first-principles गणना है, यानी कंप्यूटर से निकला अनुमान। पदार्थ को प्रयोगशाला में बनाकर परखने का ज़िक्र हमें नहीं मिला।
हमारा आकलन है कि भारत के लिए मौका ठीक यहीं है: 2022 की सूची खुद सैद्धांतिक थी, और उससे प्रयोग-योग्य उम्मीदवार छांटने में कंप्यूटर-आधारित भौतिकी वाले समूह हिस्सा ले सकते हैं। पर किसी भारतीय प्रयोगशाला में altermagnet के प्रायोगिक प्रदर्शन का स्रोत हमें नहीं मिला।
रोशनी से चुंबकीय अवस्था बदलने वाली सामग्री पर भारतीय काम को IISc की स्मार्ट अणु-सामग्री में देखा जा सकता है। वह altermagnet का मामला नहीं है, पर चुंबकीय पदार्थों में भारत की दिलचस्पी का एक उदाहरण है।
जो अभी पता नहीं
- शीर्षक बनाम सबूत: Mainz की विज्ञप्ति इसे सौ साल पुरानी समझ को चुनौती देने वाला बताती है, जबकि PSI अपने 2024 के बयान में इसे चुंबकीय परिवार में 'नया सदस्य' कहता है। पुराने दोनों वर्गों के गलत सिद्ध होने का कोई संकेत हमें इन स्रोतों में नहीं मिला।
- हर पदार्थ की पहचान पक्की नहीं: ScienceDaily (27 अगस्त 2026) के अनुसार RuO₂ पर लंबी बहस रही और आम सहमति है कि उसका बल्क रूप चुंबकीय नहीं है। पतली परत पर तनाव डालने से altermagnetism के संकेत मिले।
- Co₁/₄TaSe₂ में प्रायोगिक 'संकेत' हैं। रिपोर्ट इसे आगे के अध्ययन का मंच बताती है, अंतिम नतीजा नहीं।
- उपकरण: इन स्रोतों में किसी altermagnet-आधारित मेमोरी या ट्रांज़िस्टर के प्रदर्शन का ज़िक्र नहीं है। PSI के अनुसार स्पिंट्रोनिक्स खुद अभी शुरुआती अवस्था में है।
आगे क्या देखें
- सूची के और पदार्थों की ARPES और विद्युत-परिवहन जांच। Mainz के अनुसार इस पर कुछ ही सालों में सैकड़ों पेपर आ चुके हैं।
- RuO₂ जैसे विवादित पदार्थों पर स्पष्टता।
- भारत में FeCl₃ जैसी भविष्यवाणियों का प्रयोगशाला में संश्लेषण और माप। अभी इसकी घोषणा नहीं मिली।
पहले चुंबकत्व दो खानों में बंटा था और तीसरा खाना खाली दिखता था। अब वह खाना भरा है, पर कमरे में अभी बहुत सामान नहीं है। असली परीक्षा अब उपकरणों की है: कौन-सा पदार्थ, किस तापमान पर, कितने काम का।
स्रोत: Johannes Gutenberg University Mainz, Paul Scherrer Institute, Nature, ScienceDaily, Nano Letters, The Tribune (PTI)