AQI (वायु गुणवत्ता सूचकांक) कैसे निकलता है, इसका छोटा जवाब यह है: हर प्रदूषक का अलग अंक बनता है और उनमें सबसे ऊंचा अंक ही स्टेशन का AQI बन जाता है।

मंगलवार शाम दिल्ली में रावण के पुतले जले और बुधवार सुबह 7 बजे CPCB का आंकड़ा 227 था, जबकि शाम 4 बजे के बुलेटिन में 179। एक रात में 48 अंक का उछाल। इस अंक के बनने की प्रक्रिया तीन कदमों में समझी जा सकती है।

पहला कदम: आठ प्रदूषक और उनका चलता औसत

CPCB के अनुसार राष्ट्रीय AQI आठ प्रदूषकों पर टिका है: PM10, PM2.5, NO₂, SO₂, CO, O₃, NH₃ और सीसा (Pb)। सरकारी संदर्भ-पोर्टल Arthapedia के अनुसार यह सूचकांक 17 अक्टूबर 2014 को शुरू हुआ, यानी इसे चलते 12 साल हो गए। इन आठों के लिए छोटी अवधि के राष्ट्रीय मानक तय हैं, इसीलिए इन्हें चुना गया।

स्टेशन का सेंसर स्तर को माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर (µg/m³) में दर्ज करता है; CO की इकाई mg/m³ है। PM2.5, PM10, NO₂, SO₂ और NH₃ का पिछले 24 घंटे का औसत लिया जाता है, जबकि CO और O₃ का 8 घंटे का। इसलिए सुबह 6 बजे का AQI पिछले दिन सुबह 6 बजे से आज सुबह 6 बजे तक का चलता औसत होता है।

कुछ शर्तें भी हैं। AQI तभी बनता है जब कम से कम तीन प्रदूषकों के आंकड़े हों और उनमें PM2.5 या PM10 ज़रूर हो। किसी प्रदूषक का अंक निकालने के लिए कम से कम 16 घंटे का डेटा चाहिए। CPCB की रिपोर्ट के अनुसार सीसे का स्तर रियल-टाइम में नहीं मिलता, इसलिए वह बीते दिनों के हिसाब में ही काम आता है।

दूसरा कदम: माइक्रोग्राम को अंक में बदलना

CPCB ने हर प्रदूषक के लिए छह श्रेणियों की सीमाएं तय की हैं। मापा गया स्तर जिस पट्टी में आता है, उसी के भीतर सीधी रेखा (linear interpolation) से उसका अंक निकलता है। नीचे PM2.5 और PM10 की सीमाएं हैं, दोनों 24 घंटे के औसत के लिए, µg/m³ में।

श्रेणीAQI अंकPM2.5PM10
अच्छा (Good)0–500–300–50
संतोषजनक (Satisfactory)51–10031–6051–100
मध्यम (Moderate)101–20061–90101–250
खराब (Poor)201–30091–120251–350
बहुत खराब (Very poor)301–400121–250351–430
गंभीर (Severe)401–500250 से ऊपर430 से ऊपर

अब एक काल्पनिक उदाहरण, जो हमने समझाने के लिए बनाया है। मान लें किसी स्टेशन पर 24 घंटे का औसत PM2.5 110, PM10 240 और NO₂ 60 µg/m³ है। PM2.5 ‘खराब’ वाली 91–120 की पट्टी में है, जहां अंक 201 से 300 के बीच चलते हैं। तीनों के अंक ऐसे निकलते हैं:

  • PM2.5: (300−201) ÷ (120−91) × (110−91) + 201 ≈ 266
  • PM10: (200−101) ÷ (250−101) × (240−101) + 101 ≈ 193
  • NO₂: (100−51) ÷ (80−41) × (60−41) + 51 ≈ 75

तीसरा कदम: औसत नहीं, सबसे ख़राब अंक चुना जाता है

ऊपर के तीनों अंक 266, 193 और 75 हैं। CPCB इनका औसत नहीं निकालता, वह सबसे ऊंचा अंक उठाकर स्टेशन का AQI घोषित करता है। यानी हमारे काल्पनिक स्टेशन का AQI लगभग 266 होगा और प्रमुख प्रदूषक PM2.5। औसत लेते तो आंकड़ा करीब 178 आता और हवा ‘मध्यम’ लगती, जबकि असल में वह ‘खराब’ श्रेणी में है।

रोज़ की भाषा में समझें तो दस जांचों वाली ब्लड रिपोर्ट में नौ सामान्य हों और एक बहुत ऊपर, तो असली फ़िक्र उसी एक की होती है।

CPCB की रिपोर्ट के अनुसार अधिकतम वाला तरीका इसलिए चुना गया कि जोड़ने या औसत लेने वाले सूचकांकों में एक प्रदूषक की ऊंची मात्रा बाकी के अच्छे अंकों के नीचे दब जाती है (eclipsing)। दूसरी वजह यह दी गई कि कई प्रदूषकों के साथ मिलने का स्वास्थ्य असर ठीक से पता नहीं है।

दिल्ली के लिए भी यही दिखता है। CPCB के 17 अक्टूबर के बुलेटिन में शहर का AQI 159 और प्रमुख प्रदूषक PM2.5 दर्ज है।

एक ही दिल्ली में 227 भी और 314 भी

ऊपर का हिसाब एक स्टेशन का है। दिल्ली में 59 निगरानी स्टेशन हैं और बुधवार सुबह उनमें से 56 से आंकड़े आए। India.com के अनुसार उसी समय जहांगीरपुरी में AQI 308 और पूसा में 314 था, यानी ‘बहुत खराब’, जबकि शहर का आंकड़ा 227 रहा।

इसलिए खबर में लिखा ‘दिल्ली का AQI’ शहर का संयुक्त आंकड़ा है, किसी मोहल्ले का नहीं। CPCB का बुलेटिन शहर के सामने भाग लेने वाले स्टेशन भी गिनाता है, जैसे 17 अक्टूबर को 59 में से 55। एक ही शहर में स्टेशन-दर-स्टेशन फ़र्क का मामला हम एक ही शहर में अलग-अलग प्रदूषण वाली स्टोरी में भी देख चुके हैं।

दो तरह के आंकड़े आम हैं: रोज़ शाम 4 बजे का बुलेटिन, जिसमें पिछले 24 घंटे का औसत होता है, और हर घंटे अपडेट होने वाला चलता आंकड़ा। India.com के अनुसार 18, 19 और 20 अक्टूबर के आंकड़े 187, 139 और 179 रहे, और बुधवार सुबह 7 बजे का घंटावार आंकड़ा 227।

दिल्ली वालों के लिए इस अंक का मतलब

सबसे काम की बात यह है कि शहर का अंक 227 हो तो भी आपका मोहल्ला 300 के पार हो सकता है, और उलटा भी। सैर या बच्चों के खेलने का फैसला करते समय अपने नज़दीकी स्टेशन का आंकड़ा देखना शहर के एक अंक से ज़्यादा काम का है। यह हमारा आकलन है, CPCB की सलाह नहीं।

CPCB की श्रेणी-सूची के अनुसार ‘खराब’ (201–300) में लंबे समय तक रहने पर सांस में तकलीफ़ और दिल के मरीज़ों को परेशानी हो सकती है।

Daily Jagran ने इस उछाल के साथ दशहरे की आतिशबाज़ी, 10 किमी प्रति घंटे से कम हवा और पंजाब-हरियाणा की पराली की आग का ज़िक्र किया है। Hindustan Times के हवाले से अख़बार ने लिखा कि NASA उपग्रह ने 18 से 20 अक्टूबर के बीच 182 घटनाएं गिनीं।

AQI यह नहीं बताता कि इनमें से किसका कितना हिस्सा है, वह सिर्फ़ हवा में मौजूद कणों को मापता है। इस सीज़न की पराली की तस्वीर के लिए पराली जलाने के आंकड़े वाला हमारा लेख देखें।

जो अभी साफ़ नहीं है

CPCB की 2014 की रिपोर्ट मानती है कि PM के लिए भारत-विशेष अध्ययन तब उपलब्ध नहीं थे। ऊपरी श्रेणियों की सीमाएं अमेरिकी EPA और चीन के पैमानों से ली गईं, जबकि निचली दो में भारत का अपना बैकग्राउंड स्तर (PM2.5 के लिए 17–28 µg/m³ का अनुमान) गिना गया। ये सीमाएं 2014 की रिपोर्ट की हैं; बाद में कोई संशोधन हुआ हो तो CPCB की ताज़ा तालिका ही अंतिम मानी जाए।

दूसरी अनिश्चितता शहर के आंकड़े की है। बुलेटिन में शहर का अंक कई स्टेशनों से बनता है, पर स्टेशनों को जोड़ने का सटीक नियम बुनियादी AQI दस्तावेज़ में नहीं है। बुधवार सुबह शहर का 227 सबसे ख़राब स्टेशन के 314 से कम रहा, इसलिए यह अंक अकेले सबसे ख़राब स्टेशन का तो नहीं है। इससे आगे का दावा हम नहीं कर रहे।

आगे क्या देखें

  • अगले कुछ दिन: Daily Jagran ने पूर्वानुमान के हवाले से लिखा है कि हवा 28 अक्टूबर तक ‘खराब’ रह सकती है।
  • 1 नवंबर से: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 1 नवंबर से 28 फरवरी तक का Winter Action Plan घोषित किया है, जिसमें ‘No PUC, No Fuel’, निर्माण पर रोक और 50% वर्क-फ्रॉम-होम शामिल हैं (Daily Jagran)।
  • पाबंदियों का ढांचा: AQI की श्रेणियां आगे की पाबंदियों से कैसे जुड़ती हैं, यह GRAP कैसे काम करता है में है।

227 कोई एक माप नहीं, एक चुनाव है: आठ में से सबसे ख़राब अंक का चुनाव। अगली बार किसी खबर में AQI दिखे तो साथ में प्रमुख प्रदूषक और स्टेशन का नाम भी खोजिए। असली कहानी अक्सर वहीं मिलती है।

स्रोत: CPCB, Daily Jagran, India.com, Oneindia News, Arthapedia (IES)