आम धारणा है कि ब्लीच होकर सफ़ेद पड़ा कोरल (प्रवाल) मर चुका होता है। पर कोरल ब्लीचिंग का मतलब मौत नहीं, साझेदार शैवाल (algae) का निकल जाना है। Stanford की टीम ने Science Advances में 14 अक्टूबर 2026 को दिखाया कि प्रयोगशाला में एक ही क्लोन के स्वस्थ कोरल को छुआने पर सफ़ेद कोरल सात हफ़्ते में पूरी तरह लौट आए।

इस लेख में पूरी प्रक्रिया तीन चरणों में समझाई गई है, मकान और किराएदार की एक रोज़ की उपमा के साथ। आख़िर में उसे भारत की रीफ़ और 2027 की चेतावनी से मिलाकर देखा गया है।

ब्लीचिंग में असल में क्या होता है

कोरल एक जानवर है। Stanford के बयान के अनुसार पानी गर्म होने पर कोरल अपने ऊतकों में रहने वाले रंगीन, लाभकारी शैवाल को बाहर निकाल देते हैं। ये शैवाल कोरल को बढ़ने की ऊर्जा देते हैं। इन्हें खोने पर कोरल पीला-सफ़ेद, भूखा और कमज़ोर हो जाता है, और हानिकारक शैवाल उस पर हमला कर सकते हैं।

रोज़ की भाषा में: कोरल एक मकान है और शैवाल किराएदार, जो बिजली-राशन का इंतज़ाम करता है। भीषण गर्मी में मकान किराएदार को बाहर निकाल देता है। मकान खड़ा रहता है, पर बत्ती और राशन बंद हो जाते हैं। यह उपमा हमारी है, शोध की नहीं। ऐसी साझेदारी की एक और पुरानी कहानी जानवर-बैक्टीरिया की दोस्ती में है।

Stanford के अनुसार ब्लीचिंग से बचे कोरल को पूरी तरह उबरने में महीनों से सालों लगते हैं। इस प्रयोग का सवाल सीधा था: बाहर गए किराएदार को वापस कैसे लाया जाए?

पहला चरण: छूना और ऊतकों का जुड़ जाना

Stanford के अनुसार 2025 में Steve Palumbi ने देखा कि एक ही कॉलोनी के दो टुकड़े, एक सफ़ेद और एक स्वस्थ, टैंक में गिरकर एक-दूसरे को छू रहे थे। जहां वे छूते थे वहां रंग लौट आया था। PhD छात्र Danny Collins ने इसे प्रयोग बनाया: एक ही जीव के 10 जोड़े, जिनमें पांच जोड़े छूते हुए रखे गए और पांच में कुछ मिलीमीटर का फ़ासला छोड़ा गया।

माइक्रोस्कोप में दिखा कि संपर्क के बाद दोनों टुकड़ों के ऊतकों की सूक्ष्म नलियां एक सीध में आ गईं। Palumbi के अनुसार एक ही क्लोन के कोरल एक-दूसरे को पहचानकर जुड़ जाते हैं, ठीक वैसे जैसे इंसानों में जुड़वां भाई-बहन के बीच अंग-प्रत्यारोपण अक्सर सफल रहता है।

दूसरा चरण: तीन दिन में शैवाल का सफ़र

इन्हीं नलियों से लाभकारी शैवाल और उनके बनाए पोषक तत्व स्वस्थ टुकड़े से सफ़ेद टुकड़े में बहे। Stanford के अनुसार शैवाल संपर्क के तीन दिन के भीतर पहुंच गए। संपर्क की अलग-अलग अवधि परखने पर एक हफ़्ते के बाद, और कुछ मामलों में सिर्फ़ पांच दिन में, सफ़ेद टुकड़े को इतने शैवाल मिल चुके थे कि वह खुद उबर सके।

यानी पूरा इलाज नहीं, एक शुरुआती खुराक काफ़ी रही। Earth.com की रिपोर्ट के अनुसार जो सफ़ेद टुकड़े एक हफ़्ते या ज़्यादा छूते रहे, वे सब सात हफ़्ते में पूरी तरह उबर गए।

तीसरा चरण: सफ़ेद टुकड़े के भीतर शैवाल का तेज़ बढ़ना

सबसे अनपेक्षित नतीजा यह रहा कि संपर्क के बाद अलग कर देने पर भी रिकवरी में सात हफ़्ते ही लगे। इससे टीम ने समझा कि आगे की रिकवरी स्वस्थ टुकड़े से आते शैवाल से नहीं, सफ़ेद टुकड़े में पहुंचे शैवाल के बढ़ने से चली। Stanford के अनुसार संपर्क के दूसरे हफ़्ते में ये शैवाल हर चार दिन में दोगुने हुए, जो जंगली कोरल से करीब दस गुना तेज़ है।

सीधी गणना करें तो एक रुपये से शुरू होकर हर चार दिन में दोगुना होने पर बारह दिन में आठ रुपये बनते हैं। इसी हिसाब से जंगली कोरल में दोगुना होने में लगभग 40 दिन लगेंगे, यानी इस प्रयोग का सफ़ेद कोरल दस गुना तेज़ी से अपना रंग वापस ले रहा था।

सीमाएं और जो अभी पता नहीं

यह प्रयोग 10 जोड़ों का है और लैब में हुआ। नतीजे कैसे बदलते हैं, यह संपर्क की शर्त पर टिका है:

स्थितिनतीजा
एक ही क्लोन, संपर्क में (Stanford)शैवाल तीन दिन में पहुंचे; सफ़ेद टुकड़े सात हफ़्ते में पूरी तरह उबरे
एक ही क्लोन, कुछ मिमी का फ़ासला (Stanford)सफ़ेद टुकड़े मर गए
दूसरी कॉलोनी का स्वस्थ कोरल (Earth.com)कोई सफ़ेद टुकड़ा नहीं उबरा; नौ हफ़्ते में 6 में से 4 को स्वस्थ टुकड़े ने ढक लिया
  • Stanford के अनुसार हर सफ़ेद कोरल के लिए आनुवंशिक रूप से एक जैसा स्वस्थ कोरल चाहिए, जो रीफ़ के पैमाने पर संभव नहीं।
  • टीम अब ऐसे तरीके परखने की योजना बना रही है जिनमें लगातार संपर्क न चाहिए। वे अभी नतीजे नहीं, इरादे हैं।
  • ऑस्ट्रेलिया के एक अलग bioRxiv प्रीप्रिंट में दो प्रजातियों में जुड़ाव के बाद स्थानीय रिकवरी का संकेत मिला, पर उसमें peer-review बाकी है और आम फैलाव से अलग करने की ज़रूरत बताई गई है।

भारत की रीफ़ के लिए क्या मायने

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने दिसंबर 2024 में संसद में बताया कि चौथी वैश्विक ब्लीचिंग घटना ने अंडमान-निकोबार, मन्नार की खाड़ी, लक्षद्वीप और कच्छ की खाड़ी को छुआ। मंत्रालय के अनुसार लक्षद्वीप में ब्लीचिंग व्यापक थी, और NCCR ने मन्नार की खाड़ी और पाक खाड़ी में कोरल बहाली की है।

Coral Reefs जर्नल के 2026 के अध्ययन के अनुसार लक्षद्वीप में दरमियाने गर्मी-तनाव पर भी 37% तक कोरल कवर ब्लीच या मृत मिला, जबकि MGMNP क्षेत्र में 11.5%। सबसे ज़्यादा प्रभावित वंशों में Pocillopora भी थी। Newsy Today की रिपोर्ट के अनुसार Stanford का प्रयोग Pocillopora damicornis के टुकड़ों पर हुआ।

समय की घड़ी भी है। CMFRI के निदेशक Grinson George ने 10 जुलाई 2026 को कहा कि अप्रैल-मई 2027 में समुद्री लू और ऊंचे तापमान की संभावना है, जो कोरल ब्लीचिंग ला सकती है। El Niño 2026 के रिकॉर्ड तापमान के साथ यह चेतावनी जुड़ती है।

हमारा आकलन है कि तब तक यह तकनीक रीफ़ तक नहीं पहुंचेगी, इसलिए यह खोज निगरानी और मौजूदा बहाली योजनाओं का विकल्प नहीं, पूरक विचार है। मन्नार की खाड़ी और पाक खाड़ी के समुद्री पानी की रसायन-जांच पर भी हमने लिखा है।

आगे क्या देखें

  • Stanford टीम के बिना-संपर्क वाले तरीकों के नतीजे, जिन पर काम आने वाले महीनों में होना है।
  • गर्मी की लहर से पहले स्वस्थ कोरल से शैवाल जमा करके बाद में बांटने का परीक्षण। टीम इसे एक संभावित रास्ता मानती है।
  • दूसरी प्रजातियों और खुले समुद्र में दोहराव। अभी इसकी घोषणा नहीं है।
  • अप्रैल-मई 2027 में भारतीय रीफ़ों पर CMFRI की निगरानी और सलाह।

सबसे बड़ी बात यह है कि सफ़ेद कोरल को खो चुका मान लेने की आदत इस नतीजे से कमज़ोर पड़ी है। पर यह दरवाज़ा अभी लैब में खुला है, रीफ़ पर नहीं। असली सवाल यह रहेगा कि किराएदार को बड़े पैमाने पर वापस कैसे पहुंचाया जाए।

स्रोत: Stanford Doerr School of Sustainability, Science Advances, Earth.com, Coral Reefs, PIB (पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय), Newsy Today