बहुत लोग Artemis Accords को कोई एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय संधि समझ लेते हैं, जैसे संयुक्त राष्ट्र की कोई संधि। असल में यह अलग-अलग देशों के साथ अमेरिका के द्विपक्षीय समझौतों का सिलसिला है, कोई एक बंधनकारी ट्रीटी नहीं। 24 सितंबर 2026 को आइवरी कोस्ट यानी कोत दिव्वार इसका 75वां सदस्य बना।
24 सितंबर को क्या हुआ
NASA के मुताबिक कोत दिव्वार ने वॉशिंगटन में समझौते पर दस्तखत कर 75वें सदस्य का दर्जा हासिल किया। यह अक्टूबर 2020 में शुरू हुए इस सिलसिले में अब तक की सबसे तेज़ बढ़त का हिस्सा है, और अफ्रीकी देशों में इसकी बढ़ती दिलचस्पी को भी दिखाता है।
Artemis Accords और ILRS: दो अलग रास्ते
Artemis Accords अक्टूबर 2020 में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, इटली, जापान, लक्ज़मबर्ग, UAE और ब्रिटेन ने मिलकर शुरू किए थे। यह पारदर्शिता, इंटरऑपरेबिलिटी और चांद के संसाधनों के इस्तेमाल जैसे सिद्धांतों पर टिका दस्तावेज़ है, और 1967 की Outer Space Treaty पर आधारित है।
दूसरी तरफ चीन और रूस ने अपना अलग रास्ता चुना, International Lunar Research Station यानी ILRS। यह कोई सिद्धांतों की सूची नहीं बल्कि चरणबद्ध प्रोग्राम है, जिसमें मिशन, सिस्टम, उपकरण और डेटा सहयोग जैसी अलग-अलग श्रेणियां हैं, जिन्हें एक Joint Working Group चलाता है।
Artemis Accords में डेटा को सार्वजनिक करने, चांद पर सुरक्षा ज़ोन बनाने और संसाधनों के इस्तेमाल के अधिकार जैसे मुद्दे साफ तौर पर लिखे गए हैं। ILRS अपने Guide for Partnership दस्तावेज़ में चांद की भूगर्भ विज्ञान अध्ययन से लेकर चांद-आधारित खगोलशास्त्र तक के लक्ष्य रखता है, पर सिद्धांतों की जगह मिशन-दर-मिशन योजना पर ज़्यादा ज़ोर देता है।
दोनों की सीधी तुलना
| पहलू | Artemis Accords | ILRS |
|---|---|---|
| शुरुआत | अक्टूबर 2020 | 2021 के आसपास |
| अगुवाई | अमेरिका | चीन और रूस |
| ढांचा | साझा सिद्धांत दस्तावेज़ + द्विपक्षीय समझौते | चरणबद्ध प्रोग्राम ब्लूप्रिंट |
| सदस्य संख्या (सितंबर 2026) | 75 | सार्वजनिक रूप से साफ नहीं, दर्जन भर के आसपास |
| कानूनी आधार | 1967 Outer Space Treaty पर आधारित | अपनी अलग गवर्नेंस संरचना |
75 सदस्यों का मतलब है संयुक्त राष्ट्र के करीब 193 सदस्य देशों में से लगभग 39% अब Artemis Accords से जुड़ चुके हैं, यह आंकड़ा बताता है कि यह अब एक छोटा गुट नहीं रहा।
एक रिपोर्ट के मुताबिक पूरे Artemis प्रोग्राम की लागत 2025 तक करीब 93 अरब डॉलर आंकी गई थी, यानी सिर्फ Accords पर दस्तखत ही नहीं, असली मिशन खर्च भी बहुत बड़ा है। ILRS का ऐसा कोई सार्वजनिक कुल बजट अनुमान अभी उपलब्ध नहीं है।
सदस्य कैसे बढ़े, कौन तेज़ है
- 2024 में Artemis Accords में 19 नए देश जुड़े
- 2025 में सिर्फ 7 देश जुड़े
- 2026 में अब तक करीब 14 देश जुड़ चुके हैं, जनवरी के 61 से सितंबर के 75 तक
- ILRS की रफ्तार कहीं धीमी और ज़्यादा नियंत्रित रही है, नए सदस्यों की पुष्टि सार्वजनिक रूप से कम होती है
Turkey ने अगस्त 2026 में Artemis Accords जॉइन किया, जबकि 2024 में वह ILRS के लिए भी आवेदन कर चुका था। यह दिखाता है कि कुछ देश अभी भी दोनों खेमों के बीच अपना रास्ता तय कर रहे हैं।
असल में यह मामला सिर्फ या-या वाला नहीं है। थाईलैंड और सेनेगल जैसे देशों ने Artemis Accords और ILRS दोनों पर दस्तखत किए हैं, यानी हर देश को एक ही खेमे में चुनना ज़रूरी नहीं। यही बात उस आम गलतफहमी को और तोड़ती है कि चांद की राजनीति सिर्फ दो सख्त खेमों में बंटी है।
भारत और पड़ोसियों का पक्ष
भारत ने जून 2023 में ही Artemis Accords पर दस्तखत कर दिए थे, यानी शुरुआती दौर में ही, जब कुल सदस्य संख्या अभी 20 के आसपास ही थी। NASA Artemis Programme में ISRO Partnership पहले से चर्चा में है, अब यह साझेदारी और गहरी हो रही है।
पड़ोस में पाकिस्तान ने अक्टूबर 2023 में उल्टा रास्ता चुना और ILRS जॉइन किया, उसी महीने अज़रबैजान और बेलारूस भी ILRS से जुड़े थे। हमारा अंदाज़ा है कि दोनों पड़ोसी देशों का अलग-अलग खेमों में जाना आने वाले दशक में साझेदारी और तकनीक हस्तांतरण के मौकों को भी अलग-अलग दिशा में मोड़ सकता है।
भारत सिर्फ अमेरिका पर निर्भर नहीं है, ESA के साथ भी समझौता 2032 तक बढ़ाया जा चुका है, यानी भारत एक साथ कई साझेदारों से जुड़ा रहना चाहता है।
जो अभी साफ नहीं, आगे क्या देखें
ILRS के सिद्धांत अभी तक सार्वजनिक रूप से पूरी तरह साफ नहीं हैं, यह भी साफ नहीं कि उन्हें मानना सदस्यता की शर्त है या नहीं।
चांद पर प्रस्तावित सुरक्षा ज़ोन को लेकर भी कानूनी बहस जारी है, क्योंकि Outer Space Treaty किसी देश को चांद पर ज़मीन का दावा करने से रोकती है। यह भी नहीं पता कि आने वाले सालों में कितने देश दोनों गुटों के बीच अपना रुख बदलेंगे।
- क्या Artemis Accords 2026 के अंत तक 80 का आंकड़ा छू लेता है
- क्या ILRS भी अपने सदस्यों की पूरी सूची सार्वजनिक करता है
- NASA के Moon Base प्लान में भारत की भूमिका आगे कितनी बढ़ती है
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Artemis Accords में अभी कितने देश शामिल हैं?
24 सितंबर 2026 तक कोत दिव्वार के जुड़ने के बाद कुल 75 देश शामिल हो चुके हैं, अक्टूबर 2020 में सिर्फ 8 देशों से शुरुआत हुई थी।
भारत किस गुट में है?
भारत जून 2023 से ही Artemis Accords का सदस्य है और ILRS का हिस्सा नहीं है, जबकि पड़ोसी पाकिस्तान अक्टूबर 2023 में ILRS से जुड़ा था।
चीन और रूस Artemis Accords में क्यों नहीं हैं?
दोनों देशों ने इसे अमेरिका-केंद्रित ढांचा बताकर आलोचना की है, और अमेरिकी कानून वैसे भी NASA को चीन के साथ सीधे सहयोग से रोकता है, इसलिए दोनों ने अपना अलग ILRS प्रोग्राम शुरू किया।
क्या कोई देश दोनों गुटों में शामिल हो सकता है?
हां, थाईलैंड और सेनेगल जैसे देश Artemis Accords और ILRS दोनों से जुड़े हैं। यह ज़रूरी नहीं कि हर देश को सिर्फ एक तरफ चुनना पड़े।
75 सदस्यों तक पहुंचना Artemis Accords के लिए एक आंकड़ा भर नहीं, बल्कि यह दिखाता है कि चांद की राजनीति अब दो साफ खेमों में बंट रही है, भले ही कुछ देश बीच का रास्ता भी अपना रहे हों। भारत जैसे देशों के लिए असली चुनौती यही रहेगी कि दोनों तरफ से मिलने वाले मौके कैसे साधे जाएं।
स्रोत: NASA, Secure World Foundation, ThePrint, Britannica