ज़्यादातर फॉसिल में सिर्फ हड्डी ही क्यों बचती है, मांस और अंग कहां गायब हो जाते हैं? यह सवाल किसी भी म्यूज़ियम में डायनासोर की हड्डियां देखकर मन में आ सकता है। चीन में मिले एक 24.5 करोड़ साल पुराने समुद्री रेप्टाइल ने इसी सवाल का एक दुर्लभ अपवाद दिखाया है — इसमें पेट, लिवर और आंत तक के निशान बचे मिले हैं।
आम तौर पर फॉसिल में क्या बचता है, क्या नहीं
Sciencesensei की रिपोर्ट के अनुसार बैक्टीरिया और रासायनिक टूट-फूट नरम अंगों, जैसे पेट, लिवर और आंत को, मरने के कुछ दिन से कुछ हफ्तों के भीतर ही खत्म कर देती है। हड्डी और दांत ज़्यादा सख्त होने की वजह से लाखों साल तक टिक जाते हैं, इसलिए ज़्यादातर फॉसिल सिर्फ कंकाल ही होते हैं।
इसे एक रोज़मर्रा के उदाहरण से समझें: फ्रिज के बाहर रखा फल कुछ दिन में गल जाता है, पर उसका बीज या गुठली महीनों तक टिकी रह सकती है। लाखों साल की बात तो बीज जैसे सख्त हिस्सों के साथ भी मुश्किल है, नरम हिस्सों के साथ तो लगभग नामुमकिन।
चीन में मिला Austronaga minuta: यह जानवर कैसा था
Institute of Vertebrate Paleontology and Palaeoanthropology (IVPP) के Wei Wang और उनकी टीम ने इस फॉसिल का अध्ययन Science Advances में प्रकाशित किया। यह जानवर करीब 60 सेंटीमीटर लंबा था, इसका सिर छोटा, गर्दन लंबी और पूंछ उससे भी लंबी थी, और नुकीले दांतों से यह फिसलन वाली मछलियां पकड़ता था।
Sci.News के अनुसार यह जानवर Triassic काल के Tethys महासागर में, आज के चीन के Yunnan प्रांत वाले इलाके में रहता था। Spiekman के अनुसार यह ज़मीन पर रहने वाले रेप्टाइल के वंशजों में से था, पर इतनी जल्दी समुद्री जीवन के हिसाब से ढल गया था।
यह जानवर धरती के इतिहास के सबसे बड़े सामूहिक विनाश, Permian-Triassic Extinction, के ठीक बाद के दौर में रहता था, जब समुद्री जीवन फिर से नए सिरे से फल-फूल रहा था। Discover Magazine के अनुसार इसी दौर के ऐसे शुरुआती समुद्री रेप्टाइल बताते हैं कि जीवन कितनी तेज़ी से वापसी कर सकता है।
पेट, लिवर, आंत: आम फॉसिल से यह कितना अलग है
Wang के अनुसार पसलियों के बीच एक गहरे रंग का हिस्सा दिखा, जो जांच में एक बड़ा, थैली जैसा पेट, उसके पीछे गहरे लाल रंग का लिवर, और फिर एक लंबी, सीधी नली जैसी आंत निकला। लिवर में आज भी hemoglobin के निशान मिले, जिससे उसका रंग पहचाना जा सका।
| फॉसिल का प्रकार | आम तौर पर क्या बचता है |
|---|---|
| सामान्य रेप्टाइल फॉसिल | सिर्फ हड्डी और दांत |
| Austronaga minuta फॉसिल | हड्डी + पेट, लिवर, आंत के निशान |
पेट के अंदर छोटी मछली के छिलके भी मिले, यानी यह उस जानवर का आखिरी भोजन भी बता गया। टीम के अनुसार यह किसी रेप्टाइल का अब तक मिला सबसे पुराना, लगभग पूरा पचान-तंत्र है। इससे पहले इतनी उम्र के किसी भी रेप्टाइल फॉसिल में पेट या आंत के निशान इस तरह साफ नहीं मिले थे।
आज के पक्षी-मगरमच्छ से तुलना: पेट का एक हिस्सा या दो
Sci.News के अनुसार आज के पक्षी और मगरमच्छ के पेट के दो हिस्से होते हैं, जो खाने को अलग-अलग तरीकों से तोड़ते हैं। Austronaga minuta का पेट सिर्फ एक ही हिस्से का था, कुछ वैसा ही जैसा मछली खाने वाले आज के मॉनिटर लिज़र्ड में मिलता है।
| जानवर | पेट की बनावट |
|---|---|
| आज के पक्षी, मगरमच्छ | दो हिस्सों वाला पेट |
| Austronaga minuta (24.5 करोड़ साल पुराना) | सिर्फ एक हिस्से वाला, साधारण पेट |
इसका मतलब यह हुआ कि समुद्री जीवन के लिए शरीर का ढांचा जल्दी बदल गया, पर पाचन-तंत्र अब भी ज़मीन पर रहने वाले पुराने रिश्तेदारों जैसा ही सीधा-सादा रह गया था।
भारत के लिए मतलब: उसी Tethys Sea का एक कोना हिमाचल में भी है
यह जानवर जिस Tethys महासागर में रहता था, उसी समुद्र का एक हिस्सा आज के हिमाचल प्रदेश की Spiti Valley में भी फैला था। वहां मिले Early Triassic दौर के मछलियों के फॉसिल, जर्नल Journal of Paleontology में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, भारत के Triassic काल के सबसे पूर्ण जीवाश्मों में गिने जाते हैं।
हमारा अंदाज़ा है कि Spiti की ठंडी, बेहद ऊंचाई वाली चट्टानों में अब तक नए जीवाश्म मिलने की गुंजाइश बनी हुई है, वैसे ही जैसे चीन में यह दुर्लभ फॉसिल मिला।
जीवन के बेहद पुराने और अनोखे रिश्तों पर हमारी 500 Million साल पुरानी Symbiosis वाली स्टोरी भी पढ़ी जा सकती है। जीवाश्मों से कितनी बारीक जानकारी निकल सकती है, यह हमारी T. rex के तापमान वाली स्टोरी में भी देखा जा सकता है।
अभी क्या पता नहीं है
- यह जानवर कितनी गहराई तक गोता लगाता था या कितनी दूर तक तैरता था, यह अभी साफ नहीं है।
- लिवर पूरी तरह सुरक्षित नहीं मिला, इसलिए उसकी पूरी बनावट पर अभी कुछ सवाल बाकी हैं।
- इतनी अच्छी preservation सिर्फ इस एक जगह ही क्यों हुई, यह मिट्टी-रसायन की जांच अभी जारी है।
Austronaga minuta से जुड़े सीधे सवाल
क्या यह डायनासोर था?
नहीं। यह एक समुद्री रेप्टाइल था, डायनासोर नहीं। यह डायनासोर से अलग एक समूह से आया था, जो ज़मीन के रेप्टाइल से समुद्र में ढला।
क्या ऐसी preservation आम है?
नहीं, यह बहुत दुर्लभ है। शोधकर्ताओं ने इसे 'exquisitely preserved' यानी असाधारण रूप से सुरक्षित बताया है, क्योंकि नरम अंग आम तौर पर बचते ही नहीं।
क्या भारत में भी ऐसा कोई फॉसिल मिल सकता है?
Spiti Valley का भूगोल उसी Tethys Sea का हिस्सा रहा है, इसलिए संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, पर अभी तक वहां से ऐसा कोई सॉफ्ट-टिशू फॉसिल दर्ज नहीं हुआ है। वहां अब तक मुख्यतः मछलियों और ammonite जैसे कड़े खोल वाले जीवों के फॉसिल ही दर्ज हुए हैं।
आगे की रिसर्च में क्या देखा जाएगा?
टीम अब यह समझना चाहती है कि लिवर की बनावट इस जानवर की सांस लेने और ऊर्जा इस्तेमाल करने की रणनीति के बारे में क्या बताती है, और क्या इसी इलाके में और भी ऐसे फॉसिल मिल सकते हैं।
हड्डियां किसी जानवर का ढांचा बताती हैं, पर उसका आखिरी भोजन, उसका रंग और उसके अंदर का सिस्टम बताने के लिए कभी-कभी प्रकृति को भी असाधारण मेहरबानी करनी पड़ती है। Austronaga minuta के मामले में यही हुआ।
स्रोत: Science Advances, Sci.News, Sciencesensei, IVPP Beijing