IT मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 23 अक्टूबर 2026 को NDTV World Summit में कहा कि 23 अक्टूबर 2028 तक भारत में डिज़ाइन, निर्माण और ब्रांड, तीनों से भारतीय मोबाइल फ़ोन होंगे। यह भारतीय ब्रांड स्मार्टफ़ोन का सरकारी लक्ष्य है, किसी कंपनी की घोषणा नहीं। सरकारी आँकड़ों के अनुसार 2014-15 में भारत का मोबाइल निर्यात ₹1,500 करोड़ था, FY26 में ₹2.59 लाख करोड़। सवाल अब निर्यात का नहीं, मालिकाने का है।
इस लेख में आज के असेंबली मॉडल और 2028 के लक्ष्य की सीधी तुलना है। साथ में Apple India की फ़ाइलिंग के सहारे यह हिसाब भी कि डिज़ाइन और ब्रांड का मालिक होना कितना बड़ा फ़र्क़ डालता है।
वैष्णव ने क्या कहा, और जनवरी के बयान से फ़र्क़
IANS के अनुसार मंत्री ने श्रोताओं से तारीख़ याद रखने को कहा और भारत के अपने ‘Apple और Samsung जैसे पल’ की बात की। उनके मुताबिक फ़ोन में रेडियो सिस्टम, एंटीना, प्रोसेसर, मेमोरी, कैमरा मॉड्यूल, डिस्प्ले और पावर मैनेजमेंट एक छोटे ढाँचे में बैठाने पड़ते हैं, इसीलिए डिज़ाइन बेहद जटिल है।
Tribune के अनुसार तीन साल पहले सरकार ने भारतीय डिज़ाइनरों को मोबाइल का PCB यानी मदरबोर्ड बनाने की चुनौती दी थी। मंत्री का दावा है कि एक कंपनी ने 5G-plus फ़ोन डिज़ाइन किया, जो अमेरिका के एक बड़े टेलीकॉम प्रदाता के ग्राहकों तक पहुँच चुका है। रिपोर्टों में कंपनी का नाम नहीं है।
यही बात जनवरी में थोड़े अलग रूप में कही गई थी:
- 23 जनवरी 2026 (Davos, All India Radio): अगले 18 महीनों में भारत के अपने मोबाइल ब्रांड आने की उम्मीद, यानी लगभग जुलाई 2027।
- 23 अक्टूबर 2026 (NDTV World Summit): भारतीय डिज़ाइन, निर्माण और ब्रांड वाला फ़ोन 23 अक्टूबर 2028 तक।
शर्तें दोनों बार अलग हैं: जनवरी में ‘अपने ब्रांड’ की बात थी, अक्टूबर में तीनों की। फिर भी समय-सीमा करीब 15 महीने आगे खिसकी दिखती है।
आमने-सामने: आज का मॉडल बनाम 2028 का लक्ष्य
| पहलू | आज का मॉडल (असेंबली और निर्यात) | 2028 का लक्ष्य (वैष्णव के अनुसार) |
|---|---|---|
| डिज़ाइन का मालिक | iPhone जैसे ब्रांडों में विदेशी कंपनी | भारतीय डिज़ाइनर और कंपनी |
| ब्रांड | विदेशी ब्रांड | भारतीय ब्रांड |
| निर्माण | भारत में; FY26 में उत्पादन ₹6.27 लाख करोड़ | भारत में |
| घरेलू मूल्य-वृद्धि | करीब 15-16% (Axis Capital, ANI के अनुसार) | नई कंपोनेंट नीति का लक्ष्य 40-50% |
| अब तक का सबूत | निर्यात ₹2.59 लाख करोड़ (FY26) | PCB डिज़ाइन से बना 5G-plus फ़ोन, अमेरिका में |
तालिका की आख़िरी पंक्ति से साफ़ है कि दोनों मॉडल अलग चीज़ें नापते हैं। आज के आँकड़े बताते हैं कि भारत कितना बनाता है। 2028 का लक्ष्य पूछता है कि उसमें से कितना भारत का अपना है। घरेलू मूल्य-वृद्धि वाली पंक्ति इसीलिए सबसे अहम है: जब तक वह 15-16% के आसपास है, तब तक असेंबली और अपने ब्रांड के बीच बड़ा फ़ासला बना रहेगा।
आज की ताक़त: असेंबली और निर्यात के आँकड़े
सरकार के 14 अगस्त 2026 के आँकड़ों (KNN के हवाले से) के अनुसार मोबाइल उत्पादन FY15 के ₹18,000 करोड़ से बढ़कर FY26 में ₹6.27 लाख करोड़ हो गया। निर्यात ₹1,500 करोड़ से ₹2.59 लाख करोड़ पहुँचा, यानी 165 गुना। मोबाइल अब भारत का सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद है।
इन्हीं आँकड़ों से निकलता है कि उत्पादन का करीब 41% निर्यात हो रहा है। Business Today के अनुसार स्मार्टफ़ोन निर्यात में iPhone का हिस्सा 75% से ज़्यादा है। यानी निर्यात की रीढ़ एक ही विदेशी ब्रांड है, जिसके डिज़ाइन और नाम पर भारत का मालिकाना नहीं।
बड़ी तस्वीर में भी यही रुझान है। उसी सरकारी जानकारी के अनुसार FY26 में इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात ₹4.24 लाख करोड़ (करीब $47.96 अरब) रहा, और इलेक्ट्रॉनिक सामान पेट्रोलियम उत्पादों और मशीनरी के बाद भारत की तीसरी सबसे बड़ी निर्यात श्रेणी बन गया। निर्यात की इस उछाल में मोबाइल सबसे आगे है।
डिज़ाइन और ब्रांड की क़ीमत: Apple India का उदाहरण
मालिकाने का फ़र्क़ Apple India की फ़ाइलिंग में दिखता है। Inc42 के अनुसार FY26 में उसने लाइसेंस शुल्क के रूप में ₹10,373.7 करोड़ चुकाए, जबकि शुद्ध मुनाफ़ा ₹5,311 करोड़ रहा। पूरा ब्योरा Apple India के राजस्व की तस्वीर में है।
यानी लाइसेंस शुल्क मुनाफ़े का करीब दोगुना है। यह रकम Apple India नाम की भारतीय इकाई की है, जो घरेलू बाज़ार में बेचती है; Business Today के अनुसार निर्यात की असेंबली Tata Electronics और Foxconn जैसे साझेदार करते हैं। इसलिए दोनों को सीधे नहीं जोड़ सकते, पर इशारा साफ़ है कि डिज़ाइन और ब्रांड का मालिक कमाई का बड़ा हिस्सा ले जाता है।
भारत के लिए मतलब: पुर्ज़ों से भरोसे तक
हमारा आकलन है कि 2028 तक ‘भारतीय डिज़ाइन और ब्रांड’ वाला फ़ोन बनना ज़्यादा संभव है, ‘पूरी तरह भारतीय पुर्ज़ों’ वाला नहीं। मंत्री की अपनी सूची में प्रोसेसर और मेमोरी हैं, और भारत के देसी चिप मिशन की स्थिति बताती है कि इस स्तर पर रास्ता अभी लंबा है।
पुर्ज़ों के लिए ECMS योजना है। Outlook Business के अनुसार इसे 2025 में ₹22,919 करोड़ के परिव्यय से शुरू किया गया; PIB के अनुसार Budget 2026-27 में परिव्यय ₹40,000 करोड़ हुआ और दिसंबर 2025 तक ₹1.15 लाख करोड़ के निवेश की प्रतिबद्धता आई।
मेमोरी की आपूर्ति कितनी नाज़ुक है, Micron Taiwan की हड़ताल का मामला दिखाता है। एक नए भारतीय ब्रांड को ऐसे पुर्ज़ों के लिए बड़े सप्लायरों से लंबे अनुबंध चाहिए होंगे। साथ में सर्विस नेटवर्क, सॉफ़्टवेयर अपडेट और रीसेल वैल्यू पर भरोसा बनाना अलग चुनौती है।
जो अभी पता नहीं
- 2028 का फ़ोन किस कंपनी या ब्रांड से आएगा: रिपोर्टों में कोई नाम नहीं है।
- ‘भारतीय डिज़ाइन’ की परिभाषा: क्या प्रोसेसर भी भारतीय होगा, या सिर्फ़ मदरबोर्ड और फ़ोन का ढाँचा, यह साफ़ नहीं।
- जिस 5G-plus फ़ोन का ज़िक्र हुआ, उसकी डिज़ाइन कंपनी और अमेरिकी टेलीकॉम प्रदाता का नाम सामने नहीं आया।
- बिक्री, क़ीमत या सरकारी सहायता का कोई ठोस लक्ष्य अब तक नहीं बताया गया।
आगे क्या देखें
- कंपनी या ब्रांड का नाम और पहला प्रोटोटाइप, जिससे ‘भारतीय डिज़ाइन’ की परिभाषा साफ़ होगी।
- ECMS के तहत पुर्ज़ों की नई परियोजनाओं की मंज़ूरियाँ, ख़ासकर डिस्प्ले, कैमरा मॉड्यूल और मेमोरी में।
- अगली सरकारी निर्यात रिपोर्ट, जिसमें घरेलू मूल्य-वृद्धि का आँकड़ा बताएगा कि प्रगति असल में कितनी है।
भारत फ़ोन बनाने में दुनिया के शीर्ष देशों में है, यह आँकड़ों से साबित है। अपना ब्रांड बनाना उससे अलग और कठिन काम है। 2028 की तारीख़ का वज़न उसी दिन पता चलेगा जब बाज़ार में असली फ़ोन की क़ीमत और स्पेसिफ़िकेशन सामने होंगे।
स्रोत: IANS, Tribune India, All India Radio, PIB, Business Today, Outlook Business