परमाणु रिएक्टर वाला अंतरिक्ष यान आख़िर चलता कैसे है? SR-1 Freedom में रिएक्टर यान को सीधे धक्का नहीं देता: NASA के अनुसार वह नाभिकीय विखंडन (fission) से गर्मी बनाता है, गर्मी से बिजली बनती है और उसी बिजली से electric thrusters चलते हैं। NASA ने 20 अक्टूबर 2026 को इसके पावर मॉड्यूल पर नई contract कार्रवाइयां बताईं।

चार हिस्से, एक कड़ी: SR-1 Freedom की बनावट

NASA के अनुसार SR-1 Freedom पहला ऐसा यान होगा जो पृथ्वी की कक्षा के बाहर fission-बिजली का प्रदर्शन करेगा। उसकी बिजली का स्रोत सूरज की धूप नहीं, रिएक्टर होगा। उसका परमाणु पावर मॉड्यूल यान के boom के सिरे पर लगेगा। पूरी व्यवस्था को चार हिस्सों में समझा जा सकता है।

  • रिएक्टर: अमेरिकी ऊर्जा विभाग (DOE) की Idaho National Laboratory इसे डिज़ाइन और विकसित कर रही है (NASA)।
  • बिजली-परिवर्तक: Sierra Lobo Inc. का closed Brayton cycle सिस्टम (NASA)।
  • थ्रस्टर वाला हिस्सा: Power and Propulsion Element (PPE), जिसे Lanteris Space Systems बना रही है और जो पहले Gateway के लिए डिज़ाइन हुआ था (SpaceNews)।
  • पेलोड: SkyFall, यानी Ingenuity से विकसित तीन Mars helicopters (NASA)।

पहला चरण: रिएक्टर सिर्फ़ गर्मी बनाता है

NASA के अनुसार रिएक्टर विखंडन से गर्मी पैदा करता है। रोज़ की तुलना में यह बॉयलर जैसा है: वह खुद पंखा नहीं घुमाता, सिर्फ़ गर्मी देता है, जिसे आगे की मशीन को बिजली में बदलना है।

SpaceNews के अनुसार मार्च 2026 की योजना में रिएक्टर HALEU (high-assay low-enriched uranium) ईंधन पर चलकर लगभग 20 kW बिजली देने वाला था। 20 अक्टूबर की NASA घोषणा में बिजली की मात्रा दोबारा नहीं बताई गई, इसलिए इसे योजना ही मानें।

सुरक्षा के बारे में NASA कहता है कि रिएक्टर वाला हिस्सा तब तक निष्क्रिय रहेगा जब तक यान पृथ्वी की कक्षा से बाहर नहीं निकल जाता। साथ में interagency सुरक्षा समीक्षाएं और NASA के chief safety officer की लगातार निगरानी रहेगी।

दूसरा चरण: गर्मी से बिजली, closed Brayton cycle

NASA के अनुसार Sierra Lobo रिएक्टर की thermal ऊर्जा को बिजली में बदलने वाला closed Brayton cycle सिस्टम देगी। सामान्य सिद्धांत में इसमें एक बंद घेरे में गैस घूमती है: गर्म होकर टरबाइन घुमाती है, टरबाइन generator चलाता है, फिर गैस ठंडी होकर लौटती है। यह हमारा सरल विवरण है; NASA ने अभी डिज़ाइन का ब्योरा नहीं दिया।

ताप-बिजलीघर में भी यही सिद्धांत दिखता है, फ़र्क बस ठंडा करने का है। धरती पर हवा या पानी बचा हुआ ताप ले जाता है; अंतरिक्ष में यह ताप सिर्फ़ विकिरण से बाहर फेंका जा सकता है।

पैमाने के लिए: 20 kW की योजना-संख्या लगभग दस ऐसे 2 kW के electric geyser एक साथ चलाने भर की बिजली है। यह हमारी तुलना है, मिशन का आधिकारिक आंकड़ा नहीं।

तीसरा चरण: बिजली से धक्का, यानी nuclear electric propulsion

Daily Galaxy की रिपोर्ट के अनुसार nuclear thermal propulsion रिएक्टर की गर्मी से सीधे propellant को गर्म करता है, जबकि nuclear electric propulsion पहले बिजली बनाता है और उससे electric thrusters चलाता है। NASA के अनुसार SR-1 Freedom दूसरा रास्ता लेगा। SpaceNews के अनुसार PPE की electric propulsion रिएक्टर की बिजली से चलेगी।

झूले का उदाहरण लें: रासायनिक रॉकेट बड़ा धक्का थोड़ी देर देता है, जबकि electric thruster झूले को हल्के-हल्के धक्के बार-बार देता रहता है। हर धक्का छोटा होता है, पर महीनों लगातार लगे तो गति बड़ी बन जाती है।

SpaceNews के अनुसार PPE मूल रूप से Gateway को बिजली और electric propulsion देने के लिए डिज़ाइन हुआ था और अब उसे SR-1 के लिए ढाला जाएगा। यानी यान का थ्रस्टर वाला हिस्सा पहले से बना-बनाया ढांचा है; नया सिर्फ़ रिएक्टर से बिजली लेने का जोड़ है।

भारत के लिए मतलब: सूरज की कमी और चांद की रात

Mars सूरज से लगभग 1.52 गुना दूर है, इसलिए वहां धूप पृथ्वी की तुलना में लगभग 43% रह जाती है (दूरी के वर्ग के उलटे अनुपात से, हमारा गणित)। बाहर के ग्रहों की ओर यह कमी और बढ़ती जाती है।

चांद पर समस्या धूप की दूरी नहीं, रात की लंबाई है। Deccan Herald में ISRO चेयरमैन S Somanath के हवाले से आया था कि Chandrayaan-3 के लैंडर और रोवर को चंद्र-रात से पहले सुला दिया जाएगा। NASA के अनुसार fission-आधारित प्रणालियां उसकी Moon Base को अंधेरे की अवधि में चलाने के लिए बन रही हैं; दक्षिणी ध्रुव के बेस में भारत की भूमिका हम अलग लेख में देख चुके हैं।

हमारा आकलन: जब भारत चांद पर लंबे समय टिकने वाले अभियान सोचेगा, तब रात की बिजली सबसे बड़ी इंजीनियरिंग शर्त होगी, और SR-1 के नतीजे दिखाएंगे कि fission-बिजली कितनी व्यावहारिक है। Mars के लिए Mangalyaan के बाद ISRO की योजनाएं और वहां के वाहनों की स्वायत्तता पर Perseverance का ड्राइविंग रिकॉर्ड भी पढ़ने लायक हैं।

जो अभी पता नहीं

NASA ने contract कार्रवाइयों की घोषणा की है, पर रिएक्टर या पावर मॉड्यूल के परीक्षण-परिणाम नहीं बताए। कार्यक्रम निदेशक Steve Sinacore के अनुसार ये कार्रवाइयां तकनीकी जोखिम घटाती हैं और 2028 की ओर रफ़्तार बनाए रखती हैं; यह दावा NASA का है, उड़ान की गारंटी नहीं।

जोखिम का पुराना इतिहास भी है। SpaceNews के अनुसार Sinacore ने कहा था कि अंतरिक्ष में परमाणु बिजली और propulsion पर कई कोशिशों में कुल मिलाकर 20 अरब डॉलर खर्च होने के बावजूद दशकों में कम प्रगति हुई। SR-1 को इन्हीं पैटर्न से अलग बताया गया है।

Mars पहुंचने और SkyFall तैनात करने के बाद यान क्या करेगा, यह मार्च में SpaceNews के अनुसार अभी अध्ययन में था। नई NASA घोषणा में इस पर कोई बदलाव दर्ज नहीं है।

आगे क्या देखें

  • एकीकरण: Sierra Lobo की power conversion प्रणाली का रिएक्टर के साथ जुड़कर पूरा नाभिकीय पावर मॉड्यूल बनना (NASA)।
  • उड़ान: NASA का लक्ष्य 2028 के आख़िर में लॉन्च का है।
  • रिएक्टर चालू होना: यान के पृथ्वी की कक्षा छोड़ने के बाद ही (NASA)।
  • Mars पर: SkyFall की तीन helicopters की तैनाती।
  • चांद की ओर: NASA के अनुसार SR-1 का रास्ता उसकी Moon Base के लिए fission-बिजली की नींव भी बनेगा।

एक रिएक्टर, एक बिजली-परिवर्तक और कुछ electric thrusters: सुनने में तीन चीज़ें, पर इन्हें एक यान में 2028 तक जोड़ना ही असली इम्तिहान है। अगली घोषणाओं में यह दिखेगा कि गर्मी से बिजली तक की कड़ी कागज़ से हार्डवेयर तक कितनी पहुंची।

स्रोत: NASA, SpaceNews, Daily Galaxy, Deccan Herald