Apple India का राजस्व (revenue) वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में ₹1,03,853 करोड़ रहा, पर शुद्ध मुनाफ़े (net profit) के रूप में कंपनी के पास ₹5,311 करोड़ ही बचे। Free Press Journal के अनुसार ये आँकड़े Registrar of Companies (RoC) की फ़ाइलिंग से आए हैं। Business Today के मुताबिक FY21 में यही कारोबार ₹22,845 करोड़ का था, यानी पाँच साल में करीब 4.5 गुना।

इतना बड़ा उछाल सुर्खियाँ भी बनाता है और भ्रम भी। नीचे चार आम ग़लतफ़हमियाँ हैं, साथ में ₹100 की बिक्री का बँटवारा, निर्यात और घरेलू बिक्री का फ़र्क़, और Apple को चुकाए गए लाइसेंस शुल्क की बात।

पहला भ्रम: ₹1 लाख करोड़ यानी Apple ने इतना कमाया

राजस्व बिक्री की कुल रकम है, बचत नहीं। Inc42 के अनुसार FY26 में कुल ख़र्च 28% बढ़कर ₹96,224 करोड़ रहा। सबसे बड़ा हिस्सा बेचे गए सामान की ख़रीद का है: ₹78,228.7 करोड़।

मदFY25 (₹ करोड़)FY26 (₹ करोड़)
परिचालन राजस्व79,0601,03,853
कुल ख़र्च75,190.796,224
शुद्ध मुनाफ़ा3,1965,311
मुनाफ़ा मार्जिन4.0%5.1%

इन्हीं आँकड़ों से ₹100 की बिक्री का बँटवारा निकालें तो करीब ₹75 सामान की ख़रीद में जाते हैं, ₹10 लाइसेंस शुल्क (licence fee) में, ₹3.4 कर्मचारियों पर और ₹1 विज्ञापन-मार्केटिंग पर। मुनाफ़े में आते हैं करीब ₹5। बाक़ी रकम दूसरे ख़र्चों और टैक्स में चली जाती है।

दूसरा भ्रम: इसमें भारत में बने iPhone का निर्यात भी शामिल है

Inc42 के अनुसार राजस्व का बड़ा हिस्सा traded goods यानी ख़रीदकर बेचे गए सामान से आया: ₹99,068 करोड़, जो FY25 के ₹74,680 करोड़ से करीब 33% ज़्यादा है। Apple Care जैसी सहायता सेवाओं से ₹4,292.8 करोड़ और मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट से ₹492.4 करोड़ मिले।

निर्यात की कहानी अलग है। IANS के अनुसार vendor data में FY26 का iPhone निर्यात रिकॉर्ड ₹2 लाख करोड़ रहा, जबकि Business Today ने इसे अप्रैल-फरवरी के 11 महीनों के आँकड़ों पर आधारित बताया। निर्यात का काम Apple के असेंबली साझेदार Tata Electronics और Foxconn संभालते हैं।

राजस्व की जो मदें रिपोर्टों में गिनाई गईं, उनमें निर्यात की कोई मद नहीं है। अगर वह जुड़ता, तो आँकड़ा ₹3 लाख करोड़ के आसपास पहुँचता। इसलिए दोनों संख्याओं को जोड़ना या एक को दूसरी का हिस्सा मानना ग़लत पढ़ाई होगी।

तीसरा भ्रम: मुनाफ़ा 66% बढ़ा, यानी सब कुछ पहले से बेहतर

मुनाफ़ा ₹3,196 करोड़ से ₹5,311 करोड़ हुआ, पर Inc42 के अनुसार लाइसेंस शुल्क के रूप में Apple India ने ₹10,373.7 करोड़ चुकाए। FY25 में यह रकम ₹4,257.8 करोड़ थी, यानी मद करीब 2.4 गुना हो गई। राजस्व के अनुपात में यह लगभग 5.4% से बढ़कर 10% के क़रीब आ गई।

फिर भी मुनाफ़ा तेज़ी से बढ़ा, क्योंकि सामान की ख़रीद का ख़र्च 21.6% बढ़ा जबकि traded goods की बिक्री करीब 33% बढ़ी। कर्मचारियों पर ख़र्च 13% और मार्केटिंग पर 22.6% बढ़ा। यानी बिक्री का पैमाना ख़र्च से आगे निकला, पर मार्जिन अब भी सिर्फ़ 5.1% है।

सामान की बिक्री और ख़रीद का सीधा अंतर देखें तो ₹99,068 करोड़ की बिक्री में से ₹78,228.7 करोड़ ख़रीद में गए। बचे करीब ₹20,840 करोड़, यानी बिक्री का लगभग 21%। इसी रकम से लाइसेंस शुल्क, तनख़्वाहें और विज्ञापन चुकाए गए। यह गणना सिर्फ़ इन दो मदों पर टिकी है, इन्वेंटरी का हिसाब इसमें नहीं है।

चौथा भ्रम: Apple ने Samsung को पीछे छोड़ दिया

मई 2026 में Business Today ने Kotak Mahindra म्यूचुअल फ़ंड की रिपोर्ट के हवाले से लिखा था कि Apple India FY26 में ₹1.4 लाख करोड़ पार कर सकती है। उसी रिपोर्ट में Samsung का अनुमान ₹1.1 लाख करोड़ था। फ़ाइलिंग का असल आँकड़ा ₹1,03,853 करोड़ है, यानी उस अनुमान से करीब ₹36,000 करोड़ कम।

फ़र्क़ की वजह रिपोर्टों से साफ़ नहीं होती, दोनों की गिनती का आधार अलग हो सकता है। इतना ज़रूर है कि Samsung के ₹1.1 लाख करोड़ के अनुमान से यह आँकड़ा नीचे है। इसलिए ‘Apple आगे निकल गया’ वाला दावा इन आँकड़ों से साबित नहीं होता।

भारत के लिए मतलब: प्रीमियम माँग मज़बूत, सप्लाई का जोखिम बड़ा

PTI के हवाले से Counterpoint के अनुसार FY26 में iPhone शिपमेंट 24% बढ़कर करीब 1.4 करोड़ यूनिट रहा। Free Press Journal के अनुसार वॉल्यूम की बढ़त FY25 के 11% से दोगुनी से ज़्यादा हुई।

राजस्व 31.4% बढ़ा, यानी प्रति इकाई औसत करीब 6% ऊपर गया। इसमें Mac और iPad भी शामिल हैं, इसलिए इसे सिर्फ़ iPhone की क़ीमत-वृद्धि मानना ठीक नहीं।

हमारा आकलन है कि अगला जोखिम माँग का नहीं, सप्लाई का है। Apple ने 30 जुलाई 2026 की Q3 कॉल में कहा कि सितंबर तिमाही में सप्लाई की तंगी काफ़ी बढ़ेगी, और Sky News के अनुसार विश्लेषक iPhone की क़ीमतें बढ़ने की उम्मीद कर रहे हैं। मेमोरी चिप की कमी का असर भारत के बाज़ार में पहले ही दिख चुका है।

सहायता सेवाओं का हिस्सा राजस्व में करीब 4% है, यानी भारत में Apple की कमाई अभी लगभग पूरी तरह हार्डवेयर पर टिकी है। Inc42 के अनुसार Apple Pay पिछले महीने Axis Bank के साथ शुरू हुआ है, और Apple Pay का भारत में सफ़र इस हिस्से को आगे बदल सकता है।

जो अभी पता नहीं: आँकड़ों की सीमाएँ

RoC की फ़ाइलिंग से आए ये आँकड़े बहुत कुछ बताते हैं, पर कई बातें खुलकर नहीं आतीं:

  • iPhone, Mac और iPad का अलग-अलग राजस्व: रिपोर्टों में सिर्फ़ traded goods का कुल योग है।
  • लाइसेंस शुल्क किसे और किस समझौते के तहत गया, यह रिपोर्टों में नहीं बताया गया।
  • Counterpoint का 1.4 करोड़ का आँकड़ा शिपमेंट का है, ग्राहकों को हुई अंतिम बिक्री का नहीं।
  • Apple Inc. देश-वार राजस्व अलग से नहीं बताती, इसलिए भारत की तस्वीर सिर्फ़ इस सहायक कंपनी की फ़ाइलिंग से बनती है।
  • ये आँकड़े 31 मार्च 2026 को ख़त्म हुए साल के हैं; उसके बाद की तिमाहियाँ इनमें नहीं हैं।

आगे क्या देखें

  • Apple की अगली तिमाही के नतीजे: कंपनी के अनुसार सितंबर तिमाही में राजस्व वृद्धि 9-11% रहने का अनुमान है।
  • iPhone की क़ीमतों में बदलाव: Sky News के अनुसार विश्लेषकों को आने वाले महीनों में बढ़ोतरी की उम्मीद है, और भारत जैसे प्रीमियम-उभरते बाज़ार में इसका असर माँग पर दिखेगा या नहीं, यह देखना होगा।
  • अगले साल की RoC फ़ाइलिंग: FY27 के आँकड़े बताएँगे कि 5.1% का मार्जिन टिका या नहीं, और लाइसेंस शुल्क का बोझ कैसा रहा।

₹1 लाख करोड़ का आँकड़ा सही है, पर वह बिक्री का है, बचत का नहीं। जो बचा, यानी ₹5,311 करोड़, वह भी तेज़ी से बढ़ा है। असली सवाल अब यह है कि चिप और मेमोरी की तंगी के बीच यह रफ़्तार कितनी टिकती है।

स्रोत: RoC फ़ाइलिंग (AltInfo के हवाले से), Inc42, Free Press Journal, IANS, Business Today, Apple Q3 FY26 कॉल