MumbaiSemi का DhruvaPro चिप NavIC, GPS, Galileo और BeiDou, चारों के संकेत एक ही RF चिप से पकड़ने के लिए बना है। YourStory में संस्थापक के अनुसार ज्यादातर मौजूदा चिप किसी एक नेविगेशन बैंड तक बंधे होते हैं, जबकि DhruvaPro को अलग-अलग बैंड के लिए प्रोग्राम किया जा सकता है। यानी पहले चिप बदलनी पड़ती थी, अब सिर्फ उसे दोबारा प्रोग्राम करना होगा, कंपनी के दावे के अनुसार।

पहले बनाम अब: एक बैंड से कई बैंड तक

IIT बॉम्बे से निकली स्टार्टअप MumbaiSemi 2024 में शुरू हुई। YourStory की 15 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार भारत ने अपना नेविगेशन सिस्टम NavIC बना लिया है, पर उसके संकेत पकड़ने वाला ज्यादातर हार्डवेयर अब भी आयात होता है। DhruvaPro इसी कमी को भरने की कोशिश है।

YourStory की अगस्त 2026 की रिपोर्ट के अनुसार सालों तक भारत में बिकने वाले उपकरण GPS तो पकड़ लेते थे, पर NavIC नहीं, क्योंकि उसे समर्थन देने वाला कोई वाणिज्यिक रिसीवर नहीं था। नीचे तालिका में पारंपरिक चिप और DhruvaPro का अंतर है। सभी बातें संस्थापक विजय कंचेतला और कंपनी के दावों पर आधारित हैं।

पहलूपारंपरिक चिपDhruvaPro
फ्रीक्वेंसी बैंडआमतौर पर एक खास बैंड तक बंधीकिसी भी बैंड के लिए प्रोग्राम हो सकती है
नया नेविगेशन सिस्टम जुड़ने परचिप बदलने की जरूरतरी-प्रोग्राम करके अनुकूलन
समर्थित सिस्टमअक्सर GPS केंद्रितNavIC, GPS, Galileo, BeiDou, और संस्थापक के अनुसार GLONASS भी

चिप कैसे काम करता है: छह कदम

YourStory के अनुसार एंटीना अंतरिक्ष से आने वाले बहुत कमजोर, उच्च-आवृत्ति संकेत पकड़ता है, और आगे का काम RF चिप करती है। क्रम यह है:

  • कदम 1, पकड़ना: एंटीना कमजोर उपग्रह संकेत उठाता है।
  • कदम 2, छानना: RF चिप अनचाहे संकेत हटाती है। IIT बॉम्बे के परियोजना पृष्ठ के अनुसार वह कमजोर, जरूरी नेविगेशन संकेतों को शोर से अलग करती है।
  • कदम 3, बढ़ाना: संकेत को प्रवर्धित (amplify) करती है।
  • कदम 4, आवृत्ति घटाना: उसे डाउन-कन्वर्ट करती है, यानी बहुत ऊंची आवृत्ति से संसाधन योग्य निचली आवृत्ति में लाती है।
  • कदम 5, डिजिटल बनाना: एनालॉग-टू-डिजिटल कन्वर्टर (ADC) संकेत को 0 और 1 में बदलता है।
  • कदम 6, गणना: यह बाइनरी डेटा रिसीवर के प्रोसेसर तक जाता है, जो स्थिति, गति और समय निकालता है।

एक रोजमर्रा की उपमा लें। मान लीजिए किसी भीड़ भरे बाजार में दूर खड़ा आदमी धीमी आवाज में पता बता रहा है। पहले आप शोर से उसकी आवाज अलग करते हैं, फिर उसे बढ़ाते हैं, फिर किसी रिकॉर्डर के लायक बनाते हैं, और आखिर में कोई उसे सुनकर पते का नक्शा खींचता है। चिप के कदम 2 से 5 वही शोर-छंटाई और रिकॉर्डिंग का काम करते हैं।

एक ट्रक ट्रैकर का उदाहरण

मान लीजिए किसी लॉजिस्टिक कंपनी के 500 ट्रकों में GPS ट्रैकर लगे हैं और वह NavIC भी जोड़ना चाहती है। उसे पूरा मॉड्यूल बदलना होगा, जिसमें RF और डिजिटल दोनों चिप होती हैं। कंचेतला के अनुसार वाहन ट्रैकिंग और फ्रेट जैसे बड़े क्षेत्रों के ग्राहक ऐसा मॉड्यूल चाहते हैं जिसे वे सीधे पुराने की जगह लगा सकें।

इसीलिए कंचेतला के अनुसार तैनाती के चक्र बहुत लंबे होते हैं। MumbaiSemi का जोर ऐसी बनावट पर है जिससे मॉड्यूल बनाने वाली कंपनियां अपना हार्डवेयर आसानी से बदल सकें और आयातित मॉड्यूल पर निर्भरता घटा सकें।

छह साल की रिसर्च से कंपनी तक

कंचेतला के अनुसार IIT बॉम्बे में करीब छह साल की रिसर्च हुई, जो शुरू में NavIC के लिए RF चिप बनाने की सरकारी परियोजना थी। टीम दो सिलिकॉन चरणों से गुजरी और दोनों सफल रहे। IIT बॉम्बे के परियोजना पृष्ठ के अनुसार DhruvaPro 65 नैनोमीटर CMOS में जुलाई 2022 में बना, और चिप अप्रैल 2023 में फाउंड्री से आई।

YourStory की अगस्त रिपोर्ट के अनुसार प्रो. राजेश जेले ने कहा कि चिप 18 महीने में बनी और उनकी प्रयोगशाला की पहली ऐसी रिसीवर चिप थी जिसे पूरी तरह छात्रों ने डिजाइन किया। MumbaiSemi की वेबसाइट के अनुसार DhruvaPro QFN-32 पैकेज में आती है और उसमें ESD सुरक्षा, ऑन-चिप टेस्टिंग और अत्यधिक तापमान में चलने वाले सर्किट हैं।

भारत के लिए मतलब

NavIC भारत की अपनी नेविगेशन प्रणाली है, जैसा NVS-03 उपग्रह वाले लेख में दिखा। पर उपग्रह सिर्फ संकेत भेजते हैं, उन्हें सुनने वाली चिप के बिना वे बेकार हैं। इसी अंतर को पाटने की कोशिश DhruvaPro की कहानी है।

Semiconductor for You के अनुसार जनवरी 2026 तक इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 23 चिप-डिजाइन परियोजनाओं को मंजूरी दी थी और 70 से ज्यादा फर्मों को उपकरण व ढांचे का समर्थन दिया था। यह हमारा आकलन है कि इस माहौल में DhruvaPro जैसी IIT-आधारित रिसर्च का कंपनी में बदलना सबसे व्यावहारिक रास्ता है। स्वदेशी VIHAAN चिप इसी कड़ी का एक और उदाहरण है।

कंचेतला खुद मानते हैं कि भारत को अब भी पैकेजिंग, सिस्टम इंटीग्रेशन और फैब्रिकेशन में क्षमता बनानी है। उनके शब्दों में तकनीक नई नहीं है, कारोबार और उसके आसपास का तंत्र नया है।

जो अभी पता नहीं

MumbaiSemi अभी राजस्व से पहले की अवस्था में है और कई पायलट पूरे कर चुकी है। सार्वजनिक रिपोर्टों में संवेदनशीलता, बिजली खपत या कीमत जैसे प्रदर्शन आंकड़े नहीं हैं, इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि चिप बड़े पैमाने पर आयातित चिप से मुकाबला कर पाएगी।

कंचेतला का यह दावा कि बैंड बदलने की सुविधा 'किसी के पास नहीं है' कंपनी का दावा है, स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं मिली। कंपनी की वेबसाइट और Bharat Innovates मंच इसे पहली स्वदेशी reconfigurable RFIC बताते हैं, जबकि संस्थापक YourStory में इसे 'पहली में से एक' कहते हैं। इस फर्क को ध्यान में रखना चाहिए।

आगे क्या देखें

तीन चीजें देखने लायक हैं। पहला, कंपनी का पहला राजस्व। दूसरा, कंचेतला के अनुसार छह महीने के भीतर औपचारिक फंडिंग राउंड। तीसरा, अंतिम-उपयोग के अनुप्रयोगों, जैसे वाहन और कीमती सामान की ट्रैकिंग, के लिए बनने वाली अगली पीढ़ी की नेविगेशन चिप।

चिप की कहानी लंबी रिसर्च से बाजार तक के सफर की है। असली परीक्षा तब होगी जब ट्रकों और ट्रैकरों में लगे असली मॉड्यूल इसे अपनाएंगे।

DhruvaPro क्या है?

यह IIT बॉम्बे की टीम की बनाई RF फ्रंट-एंड चिप है, जो नेविगेशन उपग्रहों के संकेत पकड़कर उन्हें प्रोसेसर के लिए डिजिटल रूप देती है। अब इसे MumbaiSemi व्यावसायिक रूप दे रही है।

MumbaiSemi कौन है?

यह IIT बॉम्बे के SINE इनक्यूबेटर में चलने वाली फैबलेस सेमीकंडक्टर स्टार्टअप है, जिसके सह-संस्थापक विजय कंचेतला और प्रो. राजेश जेले हैं। YourStory के अनुसार टीम में 11 लोग हैं।

क्या DhruvaPro पूरा नेविगेशन रिसीवर है?

नहीं। यह रिसीवर का RF फ्रंट-एंड है। कंचेतला के अनुसार पूरे मॉड्यूल में RF के साथ डिजिटल बेसबैंड चिप और इंटरफेस भी चाहिए, इसलिए ग्राहकों के लिए आसानी से जुड़ने वाला ढांचा बनाना कंपनी की प्राथमिकता है।

DhruvaPro किन नेविगेशन सिस्टम को सपोर्ट करती है?

कंपनी की वेबसाइट के अनुसार NavIC, GPS, Galileo और BeiDou। YourStory में संस्थापक ने GLONASS भी जोड़ा है।

स्रोत: YourStory, IIT बॉम्बे (Techpedia परियोजना पृष्ठ), MumbaiSemi वेबसाइट, Bharat Innovates, Semiconductor for You