पहले माना जाता था कि कोई भी eukaryote, यानी नाभिक (nucleus) वाली जटिल कोशिका, 60°C से ज़्यादा गर्मी में बंट (divide) नहीं सकती। अब California के एक गर्म पानी के स्रोत में मिली एक नई अमीबा ने यह रिकॉर्ड तोड़ दिया है — यह ठीक 63°C पर भी अपनी कोशिका बांट लेती है। यह खोज जर्नल Cell में 22 सितंबर 2026 को प्रकाशित हुई।

पहले क्या पता था: 60°C की दीवार अब तक किसी ने पार नहीं की थी

Sci.News के अनुसार अब तक दर्ज सबसे गर्मी-सहनशील अमीबा, Echinamoeba thermarum, 57°C तक ही बढ़ती देखी गई थी। बाकी eukaryote जैसे कुछ फंगस और लाल शैवाल (red algae) भी इसी सीमा के आसपास रुक जाते थे।

कुछ वैज्ञानिकों ने 62°C को एक सैद्धांतिक ऊपरी सीमा माना था, यह अंदाज़ा कोशिका के अंदर के organelle की झिल्ली (membrane) कितनी गर्मी सह सकती है, इस पर आधारित था। पर यह अंदाज़ा सीमित नमूनों पर टिका था, जिनमें 60°C से ऊपर फंगस उग ही नहीं पाई थी।

अब क्या बदला: Lassen Volcanic Park के गर्म पानी में मिली 'fire amoeba'

Syracuse University की Angela Oliverio और डॉक्टरल छात्रा Beryl Rappaport की टीम ने 2023 से 2025 तक, तीन साल California के Lassen Volcanic National Park में Hot Springs Creek की एक धार से नमूने जुटाए। वहां का तापमान 49°C से 65°C के बीच रहता है।

टीम को एक नई अमीबा मिली, जिसे नाम दिया गया Incendiamoeba cascadensis, यानी Cascades की 'fire amoeba'। यह Vermamoeba vermiformis से जुड़ी है, जो एक जाना-पहचाना गर्मी-सहनशील अमीबा है, पर वह सिर्फ 40-45°C तक ही टिकता है।

कैसे काम करता है: गर्मी में भी कोशिका कैसे टूटी-फूटी नहीं

नमूनों में अमीबा को बढ़ाने के लिए टीम ने पानी में गेहूं का एक दाना (wheatberry) डाला, जिससे बैक्टीरिया बढ़े, और उन्हीं बैक्टीरिया को खाकर अमीबा भी बढ़ने लगी। एक-दो हफ्ते में 57°C और 60°C पर अमीबा दिखने लगी, तीन हफ्ते में 63°C पर भी।

फिर धीरे-धीरे तापमान बढ़ाया गया। गर्म माइक्रोस्कोप की मदद से टीम ने असल में 63°C पर कोशिका को बंटते (mitosis) देखा, और 64°C तक यह हिलती-डुलती भी रही।

64°C के बाद अमीबा एक गोल, सुस्त cyst में बदल जाती है। तापमान 60°C पर लौटते ही यह फिर सामान्य बन जाती है, पर 80°C पर यह मर जाती है।

जीनोम जांच में प्रोटीन को सही आकार में बनाए रखने वाले जीन (proteostasis), DNA की मरम्मत वाले जीन, और आसपास के माहौल को भांपने वाले जीन ज़्यादा सक्रिय मिले। इसके प्रोटीन धन-आवेशित (positively charged) अमीनो एसिड के सहारे स्थिर रहते हैं, ठीक वैसे जैसे गर्मी-सहनशील बैक्टीरिया करते हैं।

इसे एक आसान उदाहरण से समझें: ज़्यादातर बैक्टीरिया अपनी प्रोटीन को कुछ तय जगहों पर मज़बूत रस्सी जैसी गांठ (salt bridge) से बांधते हैं। यह अमीबा इसके बजाय पूरी सतह पर बारीक जाल जैसी पकड़ बनाती है — तेज़ हवा में एक मजबूत जाल कुछ रस्सियों से ज़्यादा टिकता है, कुछ वैसा ही यहां हो रहा है।

धरती पर गर्मी के तीन चैंपियन

eukaryote में यह अमीबा नया रिकॉर्ड है, पर जीवन की दुनिया में सबसे गर्मी-सहनशील अब भी आर्किया और बैक्टीरिया ही हैं। हमारी T. rex के शरीर के तापमान वाली स्टोरी में भी बताया था कि तापमान किसी जीव को कितना समझा सकता है।

जीव समूहसबसे गर्मी-सहनशील उदाहरणऊपरी सीमा
आर्किया (Archaea)Methanopyrus kandleri122°C
बैक्टीरियाGeothermobacterium ferrireducens100°C
यूकैरियोट (Eukaryote)Incendiamoeba cascadensis63°C

यह फर्क इसलिए है क्योंकि eukaryote कोशिका के अंदर nucleus और दूसरे organelle जैसे नाज़ुक ढांचे होते हैं, जो बैक्टीरिया और आर्किया की सीधी-सादी बनावट से कहीं ज़्यादा जल्दी गर्मी से बिगड़ जाते हैं।

भारत के लिए मतलब: यहां के गर्म पानी के स्रोत अभी लगभग अनदेखे हैं

भारत में करीब 400 गर्म पानी के प्राकृतिक स्रोत हैं, पर एक अध्ययन के अनुसार अभी तक सिर्फ 28 पर ही ठीक से स्टडी हुई है। हिमाचल प्रदेश के Manikaran जैसे स्रोतों पर पानी मुख्य धार पर 96°C तक पहुंच जाता है।

सिक्किम के Yumthang और ओडिशा के Taptapani जैसे स्रोतों का तापमान भी 89-95°C तक पहुंचता है, फिर भी वहां ज़्यादातर बैक्टीरिया ही खोजे गए हैं।

अमीबा जैसे यूकैरियोट पर शोध लगभग नहीं हुआ। धरती के नीचे छिपी जीव-दुनिया पर हमारी Indo-Gangetic Plain की मछली वाली स्टोरी भी बताती है कि भारत में ऐसी छिपी खोजों की काफी गुंजाइश है।

अनसुलझे सवाल

  • eukaryote की असली सबसे ऊपरी तापमान सीमा अभी भी तय नहीं है; 63°C सिर्फ अभी तक का दर्ज रिकॉर्ड है, अंतिम सीमा नहीं।
  • यह अमीबा ठीक-ठीक किस molecular तरीके से 62°C की पुरानी सैद्धांतिक सीमा को पार करती है, यह अभी पूरी तरह साफ नहीं है।
  • यह भारत या दुनिया के दूसरे गर्म पानी के स्रोतों में मौजूद है या नहीं, इस पर अभी कोई डेटा नहीं है।
  • इस अमीबा के जंगली माहौल में बाकी किन जीवों के साथ संबंध हैं, यह भी अभी ठीक से पता नहीं है।

'fire amoeba' से जुड़े सीधे सवाल

क्या यह सबसे गर्मी-सहनशील जीव है?

नहीं, सिर्फ eukaryote में। आर्किया और बैक्टीरिया इससे कहीं ज़्यादा गर्मी में भी ज़िंदा रह सकते हैं, जैसा ऊपर टेबल में दिखाया गया है।

क्या इससे भी ज़्यादा गर्मी सहने वाला जीव मिल सकता है?

Oliverio के अनुसार हां, ऐसे और यूकैरियोट अभी खोजे जाने बाकी हैं, क्योंकि गर्म पानी के ज़्यादातर स्रोतों में यूकैरियोट पर ठीक से रिसर्च ही नहीं हुई है।

क्या इस खोज का मतलब सिर्फ धरती तक है?

नहीं। यह रिसर्च NASA से भी फंडेड है, क्योंकि इससे यह समझने में मदद मिलती है कि किसी और ग्रह या चांद के गर्म पानी में भी ऐसा जीवन टिक सकता है या नहीं। Mars की अंदरूनी गर्मी पर हमारी पुरानी स्टोरी में भी यही सवाल उठा था।

अगली रिसर्च में क्या देखा जाएगा?

Rappaport की टीम इस अमीबा के करीबी रिश्तेदारों का अध्ययन कर उसका evolution समझना चाहती है, ताकि जीवन की असली गर्मी-सीमा का बेहतर अंदाज़ा लग सके।

तो अगली बार जब किसी गर्म पानी के स्रोत के पास से गुज़रें, याद रखिए कि उस भाप के नीचे ऐसी कोशिकाएं भी हो सकती हैं जो हमारी अब तक की समझ से कहीं ज़्यादा गर्मी बर्दाश्त कर लेती हैं। विज्ञान की सीमाएं अक्सर वहीं टूटती हैं, जहां कोई देखने की ज़हमत उठाता है।

स्रोत: Cell Journal, Syracuse University, Sci.News, NASA Science

यह भी पढ़ें