23 अक्टूबर 2026 की सुबह 5:30 बजे पूर्व-मध्य और उससे सटे दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र बन गया। चक्रवात कैसे बनता है, इसका जवाब इसी सिस्टम में दिखता है: IMD के अनुसार यह 26 अक्टूबर की सुबह तक चक्रवाती तूफान बन सकता है, पर अभी यह चक्रवात नहीं है, सिर्फ उसकी संभावना है।

पहला चरण: गर्म समुद्र पर कम दबाव कैसे बनता है

चक्रवात का ईंधन गर्म समुद्री सतह है। मौसम-विज्ञान की मानक समझ में पानी का तापमान करीब 26.5°C से ऊपर हो, तो उसके ऊपर की हवा गर्म होकर ऊपर उठती है और नीचे दबाव घट जाता है। आसपास की हवा उस खाली जगह को भरने दौड़ती है और धरती के घूमने से मुड़कर घूमने लगती है।

उत्तर हिंद महासागर में मानसून के बाद का अक्टूबर से दिसंबर का दौर चक्रवातों का दूसरा मौसम माना जाता है, और बंगाल की खाड़ी इसमें ज़्यादा सक्रिय रहती है। इसलिए इस समय कम दबाव के हर नए क्षेत्र पर मौसम विभाग खास नज़र रखता है।

एक रोज़मर्रा की तुलना: नाली खोलने पर बाल्टी का पानी बीच की खाली जगह की तरफ घूमता हुआ भागता है। यह सिर्फ समझाने वाली उपमा है, असली तूफान में गर्मी और नमी का खेल इससे कहीं बड़ा है। इस बार IMD के अनुसार अंडमान सागर के ऊपर बना चक्रवाती परिसंचरण पहले पश्चिम-उत्तर की तरफ बढ़ा, फिर उसी के असर में कम दबाव का क्षेत्र बना।

दूसरा चरण: IMD हवा की रफ्तार से ताकत कैसे नापता है

IMD सिस्टम को सिर्फ बारिश से नहीं, अधिकतम निरंतर हवा की रफ्तार से आंकता है। उसके मानक के अनुसार हर अगली श्रेणी तभी मिलती है जब हवा तय सीमा पार कर ले। नीचे वह पैमाना है:

श्रेणीहवा (नॉट)हवा (km/h)
कम दबाव का क्षेत्र17 से कम31 से कम
डिप्रेशन17-2731-49
डीप डिप्रेशन28-3350-61
चक्रवाती तूफान34-4762-88
गंभीर चक्रवाती तूफान48-6389-117
बहुत गंभीर चक्रवाती तूफान64-89118-167
अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफान90-119168-221
सुपर साइक्लोन120 या ज़्यादा221 से ज़्यादा

हमारा आकलन है कि इस पैमाने की सबसे दिलचस्प बात उसकी बारीकी है। 1 नॉट करीब 1.852 km/h के बराबर होता है, यानी 33 नॉट (करीब 61 km/h) पर सिस्टम डीप डिप्रेशन है, और 34 नॉट (करीब 63 km/h) पर चक्रवाती तूफान। सिर्फ 2 km/h का फर्क श्रेणी, नाम और चेतावनी बदल देता है।

पैमाने का मतलब आम भाषा में यह है कि "डिप्रेशन" और "डीप डिप्रेशन" भी बारिश और तेज़ हवा लाते हैं, पर उन्हें चक्रवात नहीं कहा जाता। असली चक्रवाती नाम, सख्त तटीय चेतावनियां और बड़े पैमाने की निकासी की बात आमतौर पर इसके बाद के चरणों में उठती है।

तीसरा चरण: नाम कब और कैसे मिलता है

नाम चक्रवात बनने के बाद ही मिलता है, यानी जब हवा 34 नॉट पार कर ले। यह नाम उत्तर हिंद महासागर के देशों की साझा सूची से क्रम में लिया जाता है। "अर्नब" बांग्लादेश का दिया नाम है, जिसका बंगाली में मतलब "समुद्र" है, और खबरों में इसे अगला संभावित नाम बताया जा रहा है।

यहां एक उलझन समझना ज़रूरी है। सितंबर 2026 में भी एक डीप डिप्रेशन के साथ "अर्नब" नाम चर्चा में आया था, पर Business Standard के अनुसार IMD ने तब कहा था कि वह सिस्टम चक्रवात नहीं बनेगा। Wikipedia की सीज़न तालिका के अनुसार 2026 में अब तक कोई चक्रवाती तूफान दर्ज नहीं हुआ है, यानी नाम अब तक इस्तेमाल ही नहीं हुआ।

चौथा चरण: चेतावनी कैसे चलती है और इस बार का हिसाब

IMD का 23 अक्टूबर का पूर्वानुमान सीढ़ी की तरह है: 24 अक्टूबर को डिप्रेशन, 25 को डीप डिप्रेशन और 26 की सुबह तक पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती तूफान। बारिश के लिए आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में 27 और 28 अक्टूबर को, और ओडिशा में 28 अक्टूबर को "अत्यंत भारी बारिश" की लाल चेतावनी है।

तुलना के लिए, Wikipedia के अनुसार अक्टूबर 2024 में चक्रवात दाना 22 अक्टूबर को डिप्रेशन बना, 23 को नाम पाया और 24 अक्टूबर तक ओडिशा तट से टकरा गया।

यानी दाना में डिप्रेशन से तट तक करीब दो दिन लगे, जबकि मौजूदा सिस्टम के लिए पूर्वानुमान की अवधि इससे काफी लंबी है। इसे ज़्यादा समय मिलने का संकेत माना जा सकता है, पर नतीजा सिस्टम के असली व्यवहार पर निर्भर है।

तटीय आंध्र प्रदेश और ओडिशा के लिए मतलब

Times Now Navbharat के अनुसार 28 अक्टूबर के आसपास आंध्र प्रदेश, ओडिशा और आसपास के तटीय इलाकों में असर दिख सकता है और मछुआरों को सतर्क किया गया है। IMD के अनुसार 23 अक्टूबर को पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी में समुद्र की हालत मध्यम से खराब रहने की संभावना है।

बंगाल की खाड़ी का यह दौर उत्तर-पूर्वी मानसून के मौसम में आ रहा है, जिसे हमने उत्तर-पूर्वी मानसून 2026 और अल-नीनो की रिपोर्ट में कवर किया था। तटीय अर्थव्यवस्था की तैयारी पर हमारी राष्ट्रीय तटीय मिशन 2.0 की रिपोर्ट भी इसी संदर्भ में पढ़ी जा सकती है।

जो अभी पता नहीं

सबसे बड़ा अनिश्चित सवाल यह है कि सिस्टम चक्रवाती तूफान बनेगा या डीप डिप्रेशन पर ही रुक जाएगा। Asianet News के अनुसार अमेरिकी GFS मॉडल ओडिशा की तरफ तट दिखाता है, जबकि यूरोपीय ECMWF मॉडल 28 अक्टूबर की दोपहर काकीनाडा के आसपास आंध्र प्रदेश दिखाता है। दोनों समय और जगह में अलग हैं।

तूफान की अंतिम ताकत, तट पर टकराने का सही समय और ज़िलेवार असर अभी तय नहीं। किसी एक मौसम सिस्टम को सीधे जलवायु परिवर्तन से जोड़ना भी जल्दबाज़ी होगी, वैज्ञानिक ऐसे मामलों की अलग से जांच करते हैं।

आगे क्या देखें

पहला, 24 और 25 अक्टूबर के IMD बुलेटिन, जो बताएंगे कि सिस्टम डिप्रेशन और डीप डिप्रेशन की सीढ़ी पर पूर्वानुमान के हिसाब से चढ़ा या नहीं। दूसरा, क्या 26 अक्टूबर तक IMD इसे चक्रवाती तूफान घोषित करता है और "अर्नब" नाम पहली बार आधिकारिक रूप से इस्तेमाल होता है। तीसरा, तटीय ज़िलों में प्रशासन की निकासी और राहत की तैयारी।

चक्रवात एक पल में नहीं बनता, सीढ़ी-दर-सीढ़ी बनता है, और हर सीढ़ी पर नाम या चेतावनी बदलने की एक तय शर्त होती है। असली खबर तब बनेगी जब हवा उस 34 नॉट की रेखा को पार करेगी।

स्रोत: IMD, IMD मानक संचालन प्रक्रिया, Times Now Navbharat, The Daily Jagran, Business Standard, Asianet News