1960 के दशक में दुनिया में सालभर में औसतन करीब 5 हीट स्टॉर्म सक्रिय रहते थे। इस दशक में यह औसत करीब 102 सालाना है। यह Reuters की 20 अक्टूबर 2026 की उस जांच का केंद्रीय आंकड़ा है, जिसमें बहुत बड़ी हीटवेव को "हीट स्टॉर्म" नाम दिया गया है और जो अब तक की सबसे बड़ी घटना को 367 दिन लंबी बताती है।
हीट स्टॉर्म आखिर है क्या?
Reuters ने दो दर्जन जलवायु शोधकर्ताओं से सलाह ली और 1960 से अब तक हर घंटे के वैश्विक तापमान का विश्लेषण किया। इसमें साधारण हीटवेव उसे माना गया जिसमें लगातार पांच या ज़्यादा दिन तापमान असामान्य रूप से ऊंचा रहे।
जो हीटवेव अपने चरम पर धरती की कम से कम 1% सतह को ढक लें, यानी कनाडा के करीब आधे क्षेत्रफल को, उन्हें Reuters ने हीट स्टॉर्म कहा है। यानी यह सरल भाषा में "बहुत बड़ी हीटवेव" है, कोई अलग मौसमी घटना नहीं।
Yale Program on Climate Change Communication के निदेशक Anthony Leiserowitz ने Reuters से कहा कि घटनाओं को नाम देना लोगों को यह समझाने का असरदार तरीका है कि कुछ हो रहा है। यही नामकरण की वजह है, कोई नई भौतिकी नहीं।
1960 के दशक से अब कितना बदला?
Reuters के अनुसार 1960 के दशक की सबसे बड़ी हीटवेव धरती के करीब 6% हिस्से तक पहुंची और अटलांटिक, लैटिन अमेरिका के हिस्सों और पश्चिम अफ्रीका के ऊपर 46 दिन चली। इस दशक की सबसे बड़ी घटना करीब 85% हिस्से तक पहुंची और 367 दिन चली।
| पैमाना | 1960 का दशक | 2020 का दशक |
|---|---|---|
| साल में औसत सक्रिय हीट स्टॉर्म | करीब 5 | करीब 102 |
| सबसे बड़ी घटना का दायरा | धरती का ~6% | धरती का ~85% |
| सबसे बड़ी घटना की अवधि | 46 दिन | 367 दिन |
बीते 65 साल में वायुमंडल में CO2 30% से ज़्यादा बढ़ी है। Reuters के अनुसार इसी दौरान हीटवेव और हीट स्टॉर्म से ढकी धरती का औसत हिस्सा 12 गुना से ज़्यादा बढ़ा। इस दशक में असामान्य रूप से गर्म दिनों का करीब 43% हिस्सा हीट स्टॉर्म के हिस्से आया है।
सोचिए किसी मोहल्ले में 1960 के दशक में साल में सिर्फ 5 बार बिजली जाती थी और अब 100 से ज़्यादा बार जाने लगी हो। यह सिर्फ समझाने वाली तुलना है, पर 5 से 102 की छलांग का आकार ऐसा ही दिखता है। Reuters के अनुसार इनमें से एक हीट स्टॉर्म इस साल की गर्मियों में यूरोप की जानलेवा गर्मी की वजह बना।
सबसे बड़ा हीट स्टॉर्म Vera क्या था?
Reuters ने 2023-2024 के 367 दिन लंबे इस रिकॉर्ड हीट स्टॉर्म को "Vera" नाम दिया। KELO पर छपी Reuters की स्पेशल रिपोर्ट के अनुसार फिलीपींस के कुछ हिस्सों में तापमान 38°C तक पहुंचा, जिससे ज़्यादातर बिना एयर कंडीशनिंग वाले स्कूलों के बच्चे परेशान हुए।
Reuters ने इसके असर की कहानियां भी जोड़ी हैं: टेक्सास में अस्पताल पहुंचा एक फुटबॉल खिलाड़ी, अमेज़न में मरती नदी डॉल्फिन और आइवरी कोस्ट का एक कोको किसान जिसकी आजीविका बर्बाद हुई। यानी यह सिर्फ तापमान का आंकड़ा नहीं, ज़मीन पर दिखा असर भी है।
"18 साल बिना रुके" का मतलब क्या है?
Reuters ने ऐसे हीट स्टॉर्म को भी पहचाना जो एक के बाद एक या एक साथ चलते हैं, जिन्हें उसने "कैस्केड" कहा। इसकी जांच के अनुसार 6 जुलाई 2008 से शुरू हुआ कैस्केड अब तक नहीं रुका है। 6,681 दिनों से, यानी 18 साल से ज़्यादा, धरती पर कम से कम एक हीट स्टॉर्म लगातार सक्रिय रहा है।
शहरों की तस्वीर भी बदली है। Reuters के मुताबिक फिलीपींस के तैकलोबान में 1960 के दशक में हीट स्टॉर्म सिर्फ 7 दिन रहे, जबकि साधारण हीटवेव 245 दिन। इस दशक में साधारण हीटवेव 40 दिन से कम रहीं, पर हीट स्टॉर्म ने शहर को 1,470 से ज़्यादा दिन घेरा।
भारत के लिए मतलब: इस ढांचे से क्या सीखें
हमारा आकलन है कि इस जांच का सबसे काम का आंकड़ा 102 बनाम 5 का है, यानी करीब 20 गुना। इसका मतलब यह नहीं कि भारत में भी हीट स्टॉर्म 20 गुना हुए, क्योंकि Reuters के उपलब्ध सार में भारत के लिए अलग आंकड़ा मौजूद नहीं मिला। पर यह दिखाता है कि हीटवेव को अब "कुछ दिन की घटना" की जगह लंबे, फैले हुए दौर की तरह देखना पड़ेगा।
भारत में गर्मी की मार हमने पहले भी कवर की है। अल-नीनो से गर्मी से जुड़ी अतिरिक्त मौतों का अनुमान और गर्भावस्था पर गर्मी का असर उसी बड़े चित्र के हिस्से हैं। अगर गर्मी के दौर लंबे और ज़्यादा फैले होंगे, तो हीट एक्शन प्लान और अस्पतालों की तैयारी भी उसी हिसाब से सोचनी होगी।
जो अभी पता नहीं
"हीट स्टॉर्म" Reuters की अपनी परिभाषा है, कोई आधिकारिक मौसम वैज्ञानिक श्रेणी नहीं। Reuters खुद लिखता है कि हीटवेव की कोई सर्वमान्य परिभाषा नहीं है। इसलिए 102 जैसे आंकड़े इसी परिभाषा और इसी विश्लेषण पर टिके हैं।
उपलब्ध सार में इन हीट स्टॉर्म से हुई कुल मौतों या आर्थिक नुकसान का वैश्विक आंकड़ा भी नहीं मिला। जांच ज़्यादातर तापमान के आकार, अवधि और आवृत्ति पर टिकी है, इसलिए इंसानी कीमत का हिसाब अलग शोध से ही आएगा।
यह भी साफ नहीं कि भारत के किन इलाकों पर इन हीट स्टॉर्म का कितना असर पड़ा। जांच ग्रीनहाउस गैसों और बढ़ती हीटवेव के बीच संबंध बताती है, पर किसी एक हीट स्टॉर्म को अकेले जलवायु परिवर्तन से जोड़ना जल्दबाज़ी होगी। वैज्ञानिक ऐसे मामलों की अलग-अलग जांच करते हैं।
एक और बात ध्यान देने लायक है: हीट स्टॉर्म आपस में मिल भी जाते हैं और बंट भी जाते हैं। इसलिए एक स्टॉर्म कब खत्म हुआ और दूसरा कब शुरू हुआ, यह तय करना खुद एक विश्लेषण-आधारित फैसला है, जो परिभाषा बदलने पर थोड़ा बदल सकता है।
आगे क्या देखें
पहला, Reuters का Heat Storm Tracker, जो हीट स्टॉर्म को असली समय में नाम देकर ट्रैक करता है। दूसरा, इस सर्दी में अल-नीनो के असर के आंकड़े, जिन पर हमने Niño-3.4 के रिकॉर्ड तापमान वाली रिपोर्ट में लिखा था। तीसरा, COP31, जो 9 नवंबर से शुरू होना है और जहां गर्मी से बचाव पर चर्चा फिर उठ सकती है।
हीटवेव कभी एक खबर होती थी, अब वह एक मौसम बनती दिख रही है। नाम देना भले एक पत्रकारिता का तरीका हो, पर उसके पीछे 5 से 102 का फर्क असली है।
स्रोत: Reuters, The Express Tribune, Minute Mirror, KELO, Mezha