13 अक्टूबर तक चेन्नई के Nungambakkam केंद्र पर अक्टूबर की कोई बारिश दर्ज नहीं थी (Skymet के अनुसार)। फिर 15 अक्टूबर को IMD ने उत्तर-पूर्वी मानसून 2026 की शुरुआत घोषित की। उसका मौसमी अनुमान दक्षिण भारत के लिए सिर्फ़ 'सामान्य' का है। उसी दिन दक्षिण-पश्चिम मानसून पूरे देश से लौट गया। इस साल प्रशांत में El Niño बहुत मज़बूत है, फिर भी 'भारी' बारिश का कोई अनुमान नहीं दिया गया है।
प्रशांत की गर्मी, भारत में उलटे नतीजे
IMD के 15 अक्टूबर के बुलेटिन के अनुसार प्रशांत में 'मज़बूत से बहुत मज़बूत' El Niño चल रहा है और साल के अंत तक और बढ़ने की संभावना है। मॉडल इसके जनवरी–मार्च 2027 तक टिकने की ओर इशारा करते हैं। हिंद महासागर द्विध्रुव (Indian Ocean Dipole, IOD) फिलहाल तटस्थ है। तापमान के आंकड़े हमारे Niño 3.4 वाले लेख में हैं।
देश के बड़े हिस्से के लिए यह जोड़ी भारी पड़ी। IMD के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून 759.4 मिमी बारिश पर खत्म हुआ, दीर्घावधि औसत (LPA) 868.6 मिमी से 12.6% कम और 2015 के बाद सबसे कमज़ोर। दक्षिण प्रायद्वीप में कमी 24.3% रही। पूरा ब्योरा मानसून 2026 की कमी पर लेख में है।
पर तमिलनाडु की कहानी अलग चलती रही है। इस क्षेत्र की अक्टूबर–दिसंबर बारिश का El Niño से रिश्ता जून–सितंबर वाले मानसून से उलटा दिखता है। El Niño और मानसून का रिश्ता पहले समझ लें, तो अगले आंकड़े आसानी से पढ़े जाएंगे।
तमिलनाडु के लिए यही असली बरसात क्यों है
IMD के अनुसार तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराइकल अपनी सालाना बारिश का करीब 48% अक्टूबर–दिसंबर में पाते हैं। पूरा दक्षिण प्रायद्वीप, यानी पांच उप-मंडल, इस मौसम में साल की करीब 30% बारिश लेता है। इसलिए यहां जून–सितंबर के नतीजे से ज़्यादा वज़न इसी मौसम का है।
महीनों का बंटवारा भी देखने लायक है। IMD की मोनोग्राफ के अनुसार तमिलनाडु क्षेत्र की मौसमी बारिश में अक्टूबर का हिस्सा 39%, नवंबर का 41% और दिसंबर का 20% रहता है। यानी आम तौर पर सबसे गीला महीना नवंबर है, और अभी सीज़न की शुरुआत भर हुई है।
शुरुआत की तारीख भी मायने रखती है। RMC चेन्नई के अनुसार तट पर इसका सामान्य आगमन 20 अक्टूबर के आसपास होता है, और यह नौ दिन आगे-पीछे हो सकता है। इस बार 15 अक्टूबर को शुरू हुआ, यानी सामान्य से करीब पांच दिन पहले।
इतिहास किस तरफ़ झुकता है
Hydrological Processes (2009) के अध्ययन में तमिलनाडु की उत्तर-पूर्वी मानसून बारिश का Southern Oscillation Index से उलटा रिश्ता मिला, यानी El Niño जैसे हालात में बारिश बढ़ने का झुकाव है। जुलाई में बेहद नकारात्मक SOI वाले सालों में बारिश सामान्य से 17.7% ज़्यादा रही। बेहद सकारात्मक सालों में 17.9% कम रही।
2015 इसकी सबसे जानी-पहचानी मिसाल है। Theoretical and Applied Climatology (2021) के अध्ययन के अनुसार उस साल अधिक बारिश बाढ़ में बदली, जबकि 2016 में लगभग उलटी स्थिति रही और सूखे जैसे हालात बने।
लेकिन उस कहानी में एक तीसरा खिलाड़ी भी था। उसी अध्ययन ने 2015 की बारिश को positive IOD से जोड़ा, जिसमें पश्चिमी हिंद महासागर ज़्यादा गर्म होता है। चेन्नई के ब्लॉग COMK के 2015 के विश्लेषण में अच्छी बारिश वाले 12 सालों में से 7 में El Niño के साथ positive IOD भी मिला। इस बार IMD के अनुसार IOD तटस्थ है, हालांकि पश्चिमी हिस्सा पूर्वी से ज़्यादा गर्म है।
पहले दो हफ़्तों की सूखी शुरुआत
IMD के आंकड़ों के अनुसार 1–14 अक्टूबर 2026 में दक्षिण प्रायद्वीप में औसतन 20.7 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य 74.9 मिमी है। यह 72% की कमी है। पूरे देश में कमी 69% रही। तमिलनाडु में 9, 10 और 13 अक्टूबर को कुछ जगहों पर भारी बारिश हुई, पर क्षेत्र का औसत नीचे ही रहा।
| पैमाना | आंकड़ा | स्रोत |
|---|---|---|
| अक्टूबर–दिसंबर का LPA, दक्षिण प्रायद्वीप (1971–2020) | 334.13 मिमी | IMD |
| 'सामान्य' का दायरा (LPA का 88–112%) | करीब 294 से 374 मिमी (LPA से गुणा करके) | IMD का दायरा |
| 1–14 अक्टूबर 2026, असल बारिश | 20.7 मिमी | IMD |
| 1–14 अक्टूबर, सामान्य बारिश | 74.9 मिमी (अंतर: 72% कम) | IMD |
| चेन्नई में अक्टूबर का औसत | करीब 300 मिमी | Skymet |
सीधा गणित: 'सामान्य' की निचली सीमा छूने के लिए पूरे सीज़न में करीब 294 मिमी चाहिए। शुरुआती 14 दिन के 20.7 मिमी के बाद बाकी करीब 78 दिन में लगभग 273 मिमी बचते हैं, जबकि इसी अवधि का सामान्य करीब 259 मिमी है। यानी निचली सीमा के लिए भी औसत से करीब 5% ज़्यादा बारिश चाहिए। पूरा LPA छूने को करीब 21% ज़्यादा। यह गणना पूरे दक्षिण प्रायद्वीप की है।
भारत के लिए मतलब: खेत, शहर और जलाशय
IMD की रूपरेखा में तस्वीर इलाके के हिसाब से बंटी है:
- दक्षिणी तमिलनाडु और केरल: सामान्य से ऊपर की संभावना।
- बाकी दक्षिण प्रायद्वीप: ज़्यादातर इलाकों में सामान्य से कम बारिश की संभावना। IMD के अनुसार इससे मिट्टी की नमी पर दबाव, सिंचाई की ज़रूरत और जलाशयों का कम भराव हो सकता है।
- तापमान: अधिकतम और न्यूनतम, दोनों सामान्य से ऊपर रहने की संभावना।
- चक्रवात: IMD प्रमुख के अनुसार El Niño के साल में चक्रवात कम बनते हैं और उनकी ताकत व उम्र भी कम रहती है। पर दक्षिणी या दक्षिण-पूर्वी खाड़ी में बनकर वे तमिलनाडु, पुडुचेरी, दक्षिणी आंध्र और श्रीलंका की ओर बढ़ सकते हैं।
तमिलनाडु के आपदा प्रबंधन आयुक्त ने 1 अक्टूबर को बताया कि ज़्यादा जल-जमाव वाले स्थान चिह्नित हो चुके हैं। चेन्नई में तीन दिन पहले बाढ़ की चेतावनी देने वाला Integrated Flood Warning System भी बन चुका है (DT Next)।
हमारा आकलन: असली जोखिम औसत में नहीं, बंटवारे में है। एक तरफ़ चेन्नई जैसे शहर में कुछ घंटों की तेज़ बारिश से जल-जमाव, दूसरी तरफ़ वे इलाके जहां IMD कम बारिश का अनुमान दे रहा है। तैयारी भी दो तरह की होगी: पहली जगह जल-निकासी, दूसरी जगह सिंचाई प्रबंधन।
जो अभी तय नहीं है
IMD खुद मानता है कि इस मौसम में मौसमी पूर्वानुमान की सटीकता सीमित है। वजह है पूर्वी हवाओं की गड़बड़ियां और मैडेन-जूलियन दोलन (MJO), जो दिन-ब-दिन उतार-चढ़ाव लाते हैं। मौसमी अनुमान सिर्फ़ 'सामान्य' जैसा दायरा देता है। किसी एक चक्रवात या एक दिन की बारिश का नहीं।
दूसरी अनिश्चितता El Niño के रिश्ते की मज़बूती है। IMD प्रमुख के अनुसार El Niño का उत्तर-पूर्वी मानसून पर आम तौर पर बड़ा नकारात्मक असर नहीं पड़ता, पर यह रिश्ता समय के साथ बदला है। ऊपर के आंकड़े रुझान हैं, गारंटी नहीं।
तीसरी बात IOD की है। अगस्त में IMD के मॉडल सितंबर में positive IOD का संकेत दे रहे थे। 15 अक्टूबर तक वह तटस्थ ही रहा और मॉडल उसे तटस्थ ही रखते दिखते हैं। IMD यह भी कहता है कि ग्लोबल वार्मिंग से चरम बारिश की घटनाएं बढ़ने की आशंका है। पर किसी एक घटना को इससे जोड़ने के लिए अलग attribution अध्ययन चाहिए; वैज्ञानिक अभी जांच रहे हैं।
अगले दो हफ़्तों में क्या देखें
- 22 अक्टूबर: IMD का अगला साप्ताहिक विस्तारित पूर्वानुमान, जो हर गुरुवार आता है।
- 22–28 अक्टूबर: IMD के अनुसार सप्ताह के बीच में दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी में निम्न-दबाव क्षेत्र बनने की संभावना है, और दक्षिण प्रायद्वीप में सामान्य से ज़्यादा बारिश का अनुमान है।
- नवंबर: मौसमी बारिश का सबसे बड़ा हिस्सा आम तौर पर इसी महीने आता है।
अक्टूबर के पहले दो हफ़्तों ने अनुमान की रेखा अभी नहीं छुई है, पर सीज़न का ज़्यादातर हिस्सा बाकी है। दक्षिण भारत की बारिश इस साल दो सवालों पर टिकी है: क्या El Niño का पुराना झुकाव दोहराएगा, और क्या वह कुछ ही इलाकों तक सिमट जाएगा।
स्रोत: IMD, Theoretical and Applied Climatology, Hydrological Processes, DT Next, Skymet, COMK