दिल्ली से वैष्णो देवी जाने वाली रेलवे लाइन के कटरा स्टेशन पर एक छोटी सी टीम कई महीनों से एक सिस्टम टेस्ट कर रही थी जो बताता है कि चलती ट्रेन में कब कुछ गड़बड़ होने वाली है। यह टीम Pradivya Software की थी, और सितंबर 2026 में उसने यह साइट भारतीय रेलवे को सौंप दी।
क्या हुआ: 15 स्टार्टअप्स में से 6 की असली छलांग
Kotak Mahindra Bank की CSR पहल Kotak BizLabs Accelerator Programme के दूसरे Cohort ने अभी अपना छह महीने का सफर पूरा किया है। FITT यानी IIT Delhi की Foundation for Innovation and Technology Transfer के साथ मिलकर चलाए गए इस Cohort में हेल्थकेयर, एग्रीटेक, सस्टेनेबिलिटी, डीपटेक और मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों के 15 स्टार्टअप्स को चुना गया था।
कंपनी के अनुसार इन छह महीनों में फाउंडर्स ने सिर्फ पैसा नहीं लिया, बल्कि बूटकैंप, निवेशकों से मुलाकात, गवर्नेंस ट्रेनिंग और उद्योग जगत से जुड़ाव जैसे कदम भी उठाए। नतीजा यह है कि इनमें से 6 स्टार्टअप्स की कहानियां अब साफ तौर पर आगे बढ़ती दिख रही हैं।
रेलवे की सुरक्षा से लेकर कैंसर के इलाज तक
Pradivya Software के अनुसार उसकी AI, IoT और 5G आधारित तकनीक चलती ट्रेनों की सुरक्षा और रखरखाव का पहले से अंदाजा लगाने में मदद करती है। कटरा साइट भारतीय रेलवे को सौंपे जाने के बाद कंपनी का ऑर्डर पाइपलाइन ₹8 करोड़ से ऊपर पहुंच गया है, और उसने 2026 में एक जर्मन मंत्रालय की गोलमेज बैठक में भी अपनी तकनीक दिखाई।
वहीं Easiofy Solutions कैंसर के इलाज की योजना बनाने के तरीके को आसान बना रही है। कंपनी के अनुसार इसका AI प्लेटफॉर्म ट्यूमर और अंगों की पहचान करके रेडिएशन थेरेपी की योजना बनाने में डॉक्टरों की मदद करता है। इस टीम को 2026 में TiEcon Silicon Valley में TiE50 ग्लोबल अवॉर्ड मिला और Impact Global AI Pitchfest में टॉप 5 में जगह भी।
खेत का पानी बचाने से लेकर बिना पानी की रंगाई तक
Open Spectrum AI मिट्टी, सिंचाई और फसल की सेहत से जुड़े फैसलों में AI और IoT का इस्तेमाल करती है। कंपनी के अनुसार हिम्मतनगर के एक अनार के बाग में इसकी तकनीक से 60 लाख लीटर पानी बचाया गया, साथ ही खाद के इस्तेमाल में भी कमी आई। यह डिवाइस अब तक 15 से ज्यादा बागवानी फसलों पर आजमाई जा चुकी है।
भारत में भूजल का घटता स्तर पहले से ही एक बड़ी चिंता है, इसलिए खेती में हर बूंद बचाने वाली तकनीक का महत्व सिर्फ किसान की जेब तक सीमित नहीं है। दूसरी तरफ Indigotex सदियों पुरानी कपड़ा रंगाई प्रक्रिया को कम पानी में करने पर काम कर रही है। कंपनी के अनुसार उसने ऊन की बिना पानी वाली इंडिगो रंगाई का तरीका खोजा है, और इसके लिए उसे ₹4.9 करोड़ की फंडिंग भी मिली है।
कपड़ा उद्योग में पानी की बर्बादी कोई नई समस्या नहीं है। IIT Madras की ECOOP तकनीक भी इसी दिशा में ट्रीटमेंट लागत घटाने पर काम कर चुकी है, यानी इस समस्या पर कई कोणों से काम हो रहा है।
रक्षा तकनीक और महिलाओं की सुरक्षित मोबिलिटी
Bravecore रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र के लिए AI आधारित निगरानी और स्वचालित सिस्टम बनाती है। कंपनी के अनुसार उसने भारतीय सेना को स्वार्म ड्रोन सिस्टम सौंपे हैं, नौसेना के लिए Tube Launch Drone तकनीक विकसित की है, और दिल्ली मेट्रो में उसका SmartCop AI रोबोटिक निगरानी सिस्टम तैनात है।
Fery Rides महिलाओं के लिए सुरक्षित मोबिलिटी और रोज़गार, दोनों पर काम करती है। यह महिलाओं द्वारा चलाया जाने वाला EV राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म है। कंपनी के अनुसार इसे Indian Angel Network के नेतृत्व में एक बड़ा सीड राउंड मिला, और छह महीनों में इसका कमर्शियल कैब बेड़ा तीन गुना हो गया।
| स्टार्टअप | क्षेत्र | छह महीने में उपलब्धि |
|---|---|---|
| Pradivya Software | रेलवे सुरक्षा (डीपटेक) | कटरा साइट रेलवे को सौंपी, ₹8 करोड़+ ऑर्डर पाइपलाइन |
| Easiofy Solutions | हेल्थकेयर AI | TiE50 ग्लोबल अवॉर्ड, कैंसर थेरेपी प्लानिंग |
| Open Spectrum AI | एग्रीटेक | 60 लाख लीटर पानी बचाया, 15+ फसलों पर परीक्षण |
| Indigotex | क्लीनटेक (टेक्सटाइल) | बिना पानी की रंगाई, ₹4.9 करोड़ फंडिंग |
| Bravecore | रक्षा तकनीक | सेना-नौसेना को तकनीक, दिल्ली मेट्रो में तैनाती |
| Fery Rides | EV मोबिलिटी | कैब बेड़ा 3 गुना, सीड फंडिंग |
यह accelerator मॉडल असल में काम क्यों करता है
Entrackr और Entrepreneur India की रिपोर्टों के अनुसार Kotak BizLabs का पहला Cohort अक्टूबर 2024 से चला था, जिसमें 1,500 से ज्यादा आवेदन आए, 500 से ज्यादा फाउंडर्स जुड़े, और 55 स्टार्टअप्स को मेंटरशिप मिली, जिनमें से 32 को फंडिंग सहायता भी मिली। दूसरा Cohort इसी बुनियाद पर बना और IIT Delhi के FITT को साथ जोड़ा गया ताकि उत्तर भारत में पहुंच बढ़े।
हमें लगता है कि इस मॉडल के काम करने की बड़ी वजह यह है कि यह सिर्फ एक बार का पिच इवेंट नहीं है। पैसा, मेंटरशिप, निवेशकों से मुलाकात और बाज़ार तक पहुंच, यह सब एक साथ और छह महीने तक लगातार मिलता है, जिससे स्टार्टअप्स को टेक्नोलॉजी से आगे बढ़कर असली ग्राहक और असली ऑर्डर तक पहुंचने का समय मिलता है।
भारत के लिए मतलब, अनजान बातें और आगे क्या
भारत के लिए ऐसे एक्सेलेरेटर मॉडल का मतलब है कि IIT जैसे संस्थानों की तकनीकी गहराई और बड़े बैंकों की CSR पूंजी, दोनों मिलकर छोटे स्टार्टअप्स को सरकारी अनुबंधों और बड़े ग्राहकों तक पहुंचा सकते हैं, खासकर उन क्षेत्रों में जहां रिस्क ज़्यादा और रिटर्न धीमा होता है, जैसे रक्षा तकनीक और रेलवे सुरक्षा।
अभी यह साफ नहीं है कि इन 6 स्टार्टअप्स के दावे लंबे समय तक टिकेंगे या नहीं, क्योंकि ज़्यादातर आंकड़े अभी कंपनियों के अपने अनुभव पर आधारित हैं, स्वतंत्र ऑडिट पर नहीं। यह तस्वीर आने वाले महीनों में साफ होगी।
आगे तीन चीज़ों पर नज़र रखनी होगी: Kotak BizLabs का तीसरा Cohort कब शुरू होता है, इसके लिए आवेदन अभी खुले हैं; इनमें से कितने स्टार्टअप्स अगले फंडिंग राउंड तक पहुंचते हैं; और क्या दूसरे बैंक या संस्थान भी इसी तरह IIT जैसे संस्थानों के साथ मिलकर एक्सेलेरेटर मॉडल अपनाते हैं।
असली कहानी सिर्फ छह स्टार्टअप्स की नहीं है। यह इस बात की है कि सही मेंटरशिप और सही समय पर मिला मौका किसी आइडिया को असली ऑर्डर और असली तैनाती तक कैसे पहुंचा सकता है।
स्रोत: Business Standard, Entrackr, Entrepreneur India