RDI Fund के फंड मैनेजर अब 19 हो गए हैं। सरकार ने 12 अक्टूबर 2026 को पहली खेप घोषित की, जिसकी कुल प्रतिबद्धता ₹7,131 करोड़ है। मान लीजिए पुणे की एक टीम का बैटरी-सेल लैब में चल चुका है, पर फैक्ट्री के लिए पूंजी नहीं मिल रही। अब तक सरकारी पूंजी के उसके सामने लगभग दो ही दरवाज़े थे, अब गिनती 19 है।
ज़्यादातर रिपोर्टें संख्या और नाम गिनाकर रुक जाती हैं। यहां देखिए कि रास्ता पहले कैसा था, अब कैसा है, और औसत निकालने पर हर मैनेजर के हिस्से क्या आता है।
पहले: दो खिड़कियां, मंज़ूरी आगे और वितरण पीछे
नवंबर 2025 में शुरू हुए ₹1 लाख करोड़ के RDI Scheme में पैसा सीधे कंपनियों को नहीं जाता। PIB की संसदीय-प्रश्न सामग्री (24 जुलाई 2026) के अनुसार शुरुआती दूसरे-स्तर के फंड मैनेजर (second-level fund manager, SLFM) दो ही थे: प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (TDB) और BIRAC।
उसी सामग्री के अनुसार TDB ने 22 परियोजनाओं के लिए ₹2,192 करोड़ की RDI मदद मंज़ूर की, पर बांटे ₹500 करोड़। BIRAC ने 8 परियोजनाएं ₹390.35 करोड़ के लिए शॉर्टलिस्ट कीं। यानी TDB के मामले में मंज़ूर रकम का करीब 23% ही पहुंचा था (यह हमारी गणना है)।
TDB के रास्ते बड़े सौदे ज़रूर हुए। GalaxEye को ₹63.84 करोड़ और BigEndian को ₹130 करोड़ वैकल्पिक रूप से परिवर्तनीय ऋण (convertible debt) के रूप में मिले। फिर 30 सितंबर 2026 को TDB ने नई अर्जियां लेना रोका, और रोक की वजहों पर रिपोर्टें बंटी रहीं।
अब: 19 नाम, दो किस्म के मैनेजर
PIB की 12 अक्टूबर 2026 की विज्ञप्ति के अनुसार अधिकार-प्राप्त सचिव समूह (EGoS) ने 8 अक्टूबर की बैठक में 14 वैकल्पिक निवेश कोष (AIF) और 5 फ़ोकस्ड रिसर्च ऑर्गनाइज़ेशन (FRO) मंज़ूर किए। पहली कॉल जनवरी 2026 में खुली थी, और चयन में विशेषज्ञ समिति के साथ आमने-सामने की बातचीत भी हुई।
Inc42 के अनुसार AIF वाली सूची में Blume Ventures, Speciale Invest, Chiratae Ventures और TVS Capital Funds जैसे नाम हैं। Entrepreneur India के अनुसार पांच FRO हैं: IISc का ARTPARK, C-CAMP, IIT Madras Research Park, BITS Pilani का PIEDS और IIT Bombay का SINE।
दोनों दौर को साथ रखने पर फ़र्क साफ़ दिखता है:
| पैमाना | पहले | अब (पहली खेप) |
|---|---|---|
| मैनेजर | 2: TDB और BIRAC | 19 नए: 14 AIF और 5 FRO |
| स्वरूप | सरकारी संस्थाएं | निजी VC फंड और शोध-संस्थानों से जुड़े संगठन |
| रकम | परियोजना-दर-परियोजना मंज़ूरी | कुल ₹7,131 करोड़ की प्रतिबद्धता |
| निजी पूंजी | परियोजना-स्तर पर साझा लागत | हर मैनेजर से RDI के बराबर निजी पूंजी जुटाने की उम्मीद |
| तकनीकी स्तर | TRL 4 या ऊपर | TRL 4 या ऊपर |
PIB की विज्ञप्ति में TDB और BIRAC की भूमिका बदलने का कोई ज़िक्र नहीं है, इसलिए नई खेप पुराने दोनों की जगह नहीं, उनके साथ-साथ जुड़ती दिखती है।
पैसे का रास्ता: एक फ़ाइल कहां-कहां से गुज़रेगी
PIB के अनुसार मैनेजर ही पात्र तकनीक-उद्यमों (Eligible Technology Enterprises) तक पूंजी पहुंचाते हैं। यानी कंपनी को सरकार के पास नहीं, चुने हुए मैनेजर के पास जाना होगा।
- तकनीक TRL 4 या उससे ऊपर हो, यानी सिर्फ़ विचार नहीं, लैब में परखा हुआ प्रोटोटाइप मौजूद हो।
- मैनेजर अपने निवेश-मानकों पर कंपनी को जांचेगा; विशेषज्ञ समिति के स्तर पर मैनेजरों की जांच हो चुकी है।
- हर मैनेजर से RDI के हिस्से के बराबर निजी पूंजी जुटाने की उम्मीद है।
पुणे वाली टीम का उदाहरण आगे बढ़ाएं। उसका सेल दो महीने लगातार चल चुका है, यानी TRL 4 के पास। अब वह अपने क्षेत्र के किसी AIF से बात करेगी, जो उसे निजी निवेशकों के साथ जोड़कर RDI की रकम के बराबर पैसा खड़ा करने में मदद चाहेगा।
आखिरी बात, जो अक्सर छूट जाती है: मैनेजर चुने गए हैं, कंपनियां नहीं। Entrepreneur India ने भी साफ़ लिखा कि ₹7,131 करोड़ प्रतिबद्धता है, सभी संस्थाओं को बांटी जा चुकी रकम नहीं।
संख्याओं का हिसाब: ₹375 करोड़ का औसत और $730 मिलियन की तुलना
₹7,131 करोड़ ÷ 19 लगभग ₹375 करोड़ प्रति मैनेजर बैठता है। यह पूरे ₹1 लाख करोड़ का करीब 7.1% है, यानी कोष का बड़ा हिस्सा आगे की खेपों के लिए बचा है। असल बंटवारा बराबर नहीं है: C-CAMP अकेले ₹500 करोड़ पा रहा है, यानी औसत से ऊपर।
C-CAMP के अनुसार वह सूची का इकलौता समर्पित बायोटेक संगठन है और निजी साझेदारों के साथ ₹1,000 करोड़ से ज़्यादा का समूह खड़ा करना चाहता है। उसके निदेशक Dr. Taslimarif Saiyed ने TRL 4 के स्टार्टअप को सहारा देने और निजी पूंजी बढ़ाने की बात कही है।
Press Network of India के अनुसार RDI अब तक 22 स्टार्टअप को सीधे परियोजना-फ़ंडिंग दे चुका है। इनमें Eyestem Research और Peptris Technologies C-CAMP के पोर्टफ़ोलियो से हैं।
अब बाज़ार से तुलना। Press Network of India ने ₹500 करोड़ को करीब $51 मिलियन बताया है, इसी अनुपात से ₹7,131 करोड़ करीब $730 मिलियन बनता है। Inc42 की Q3 2026 रिपोर्ट के अनुसार भारतीय डीपटेक स्टार्टअप ने सितंबर तिमाही में 28 सौदों में $290 मिलियन जुटाए थे।
यह सेब-संतरे की तुलना है, क्योंकि एक तरफ़ प्रतिबद्धता है और दूसरी तरफ़ एक तिमाही की जुटाई रकम। फिर भी पैमाना समझने के लिए काम का है।
भारत के लिए मतलब: एक की जगह 19 पते, पर शर्तें वही
स्टार्टअप के लिए सबसे सीधा फ़र्क पते का है। पहले सरकारी कतार लगभग एक ही जगह थी। अब कंपनी अपने क्षेत्र के हिसाब से मैनेजर चुन सकती है, जैसे बायोटेक टीम C-CAMP के पास। TDB जैसी रोक फिर आए तो दूसरा विकल्प होना भी राहत है। यह हमारा आकलन है।
दूसरी तरफ़ निजी पूंजी की शर्त है। जब हर मैनेजर को RDI के बराबर पैसा जुटाना है, तो 14 AIF को ऐसी कंपनियां चाहिए जिनमें जोखिम के बदले ठीक-ठाक रिटर्न दिखे। लंबे समय में तैयार होने वाली हार्डवेयर-तकनीक के लिए निजी निवेशक जुटाना मुश्किल हो सकता है।
लैब से बिलकुल ताज़ा निकली तकनीकों के लिए अलग रास्ते चाहिए होंगे। IIT Madras से जुड़ा IITM Unicorn Frontier Fund TRL 3-4 पर निवेश करता है, यानी RDI की शर्त से एक पायदान नीचे तक जाता है।
जो अभी साफ़ नहीं है
- पहली खेप में मैनेजर-वार रकम सरकारी विज्ञप्ति में नहीं है; सार्वजनिक रूप से सिर्फ़ C-CAMP का ₹500 करोड़ बताया गया है।
- EGoS ने RDI के दायरे में जो पांच अतिरिक्त तकनीकें जोड़ीं, उनके नाम सामने नहीं आए।
- निजी पूंजी की बराबरी की शर्त किस समय-सीमा में पूरी करनी है, यह विज्ञप्ति में नहीं बताया गया।
एक और सवाल पारदर्शिता का है। Inc42 के अनुसार अगस्त में Indian Express ने बताया था कि योजना में आवंटित ₹2,000 करोड़ से ज़्यादा में से करीब दो-तिहाई उन कंपनियों को गया, जिनके संबंध चयन-पैनल के सदस्यों से थे। रिपोर्ट हितों के टकराव की आशंका उठाती है।
Inc42 के Q3 2026 सर्वे में 85 संस्थागत निवेशकों में से 52% ने खुलासे और रिक्यूज़ल (हितों के टकराव पर हट जाना) के इंतज़ामों को पर्याप्त माना, जबकि 25% ने इसे शासन की विफलता कहा।
आगे क्या देखें, और बात कहां ठहरती है
- अगली खेप: PIB के अनुसार और मैनेजरों के लिए आवेदन निकट भविष्य में बुलाए जाएंगे; तारीख नहीं बताई गई।
- पहली खेप के मैनेजरों की पहली निवेश घोषणाएं, और उनमें TRL 4 वाले सौदे कितने हैं।
- पांच अतिरिक्त तकनीकों की सूची।
RDI Fund का ढांचा कागज़ पर दो से बढ़कर 19 खिड़कियों वाला हो गया है। असली परीक्षा तब होगी जब इनसे निकली पहली रकम किसी कंपनी की फैक्ट्री या लैब तक पहुंचे, और वह भी हितों के टकराव के सवाल के बिना।
स्रोत: PIB, Inc42, Entrepreneur India, Press Network of India, Business Standard