पहले क्या था: सिर्फ Cloud तक पहुंच
Wikipedia के अनुसार भारत की quantum यात्रा 2018 में Quantum Enabled Science and Technology (QuEST) कार्यक्रम से शुरू हुई थी। तब देश के पास अपना कोई फिज़िकल क्वांटम कंप्यूटर नहीं था।
2025 में IBM और Tata Consultancy Services (TCS) ने साथ मिलकर सिर्फ इतना तय किया कि Andhra Pradesh के Quantum Valley Tech Park के सदस्य, IBM के cloud-based क्वांटम कंप्यूटरों तक पहुंच सकेंगे। यानी मशीन अब भी विदेश में ही थी।
अप्रैल 2026 में एक और कदम आया: Amaravati Quantum Reference Facility (AQRF), जिसमें Amaravati 1S और Amaravati 1Q नाम के दो टेस्टबेड लगाए गए, ताकि छात्र और स्टार्टअप बड़ी मशीन आने से पहले ही अभ्यास कर सकें।
अब क्या बदल रहा है: असली Hardware भारत में
Quantum Computing Report के अनुसार IBM के चेयरमैन Arvind Krishna ने पुष्टि की है कि Amaravati में एक IBM Quantum System Two लगेगा, जिसमें 156-qubit वाला Heron प्रोसेसर होगा। इसे सितंबर 2026 तक पूरी तरह कमीशन करने का लक्ष्य रखा गया है।
ETV Bharat की रिपोर्ट के अनुसार Amaravati Quantum Computing Centre (AQCC) की इमारत करीब ₹1,000 करोड़ में बन रही है, दो अलग बिजली सब-स्टेशन और 48 घंटे तक चलने वाले बैकअप जनरेटर के साथ, ताकि मशीन कभी बंद न हो।
| भारत के क्वांटम कंप्यूटर | बनाने वाला | Qubit / स्टेटस |
|---|---|---|
| QpiAI-Indus | भारतीय स्टार्टअप QpiAI | 25-qubit, पहले से चालू |
| Amaravati 1S/1Q (AQRF) | टेस्टबेड, अप्रैल 2026 से चालू | सिमुलेशन आधारित |
| IBM Quantum System Two | IBM (अमेरिका), TCS के साथ | 156-qubit, सितंबर 2026 का लक्ष्य |
यानी India के पास पहले से अपना छोटा क्वांटम कंप्यूटर था, पर एक global दिग्गज का असली hardware पहली बार यहीं इंस्टॉल हो रहा है, यह फर्क बड़ा है।
Amaravati ही क्यों चुना गया
BusinessToday के अनुसार Krishna ने वजह सीधी बताई: गणित और physics में मज़बूत टैलेंट, जो असली समस्याओं को क्वांटम हार्डवेयर पर उतार सके। Andhra Pradesh सरकार ने भी इसे अपना 'Quantum Capital' बनाने का लक्ष्य रखा है।
इसी सोच के तहत राज्य ने Amaravati में एक अलग Quantum and AI University कैंपस को भी मंज़ूरी दी है, जिसमें क्वांटम टेक्नोलॉजी, AI और सेमीकंडक्टर जैसे विषयों की पढ़ाई सितंबर 2026 से एक अस्थायी परिसर में शुरू होनी है। पहले अगर आगे बढ़ना है तो सीखने के लिए इंजीनियर विदेश जाते थे, अब यही कैंपस उन्हें घर के पास ट्रेनिंग देगा।
- फरवरी 2026: Amaravati Quantum Valley का शिलान्यास हुआ
- अप्रैल 2026: AQRF टेस्टबेड चालू हुए
- सितंबर 2026: IBM Quantum System Two कमीशन होने का लक्ष्य
- जनवरी 2027: पूरी क्वांटम सेवाएं शुरू होने की उम्मीद, मंत्री के अनुसार
Quantum Computing Report के अनुसार यह पूरा ईकोसिस्टम ₹6,000 करोड़ के National Quantum Mission से जुड़ा है, जिसमें L&T और C-DAC जैसे 50 से ज़्यादा संस्थान शामिल हैं।
इससे असल में क्या बदलेगा
Krishna के अनुसार क्वांटम कंप्यूटिंग को असली कमर्शियल फायदा देने में अभी दो-तीन साल लगेंगे, पर दवा, मटीरियल साइंस, फाइनेंस और साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों में असर सबसे पहले दिखेगा।
क्वांटम कंप्यूटर के qubit को स्थिर रखना सबसे बड़ी चुनौती रही है। हमने पहले बताया था कि silicon quantum chip qubits को लाखों तक कैसे बढ़ाया जा सकता है, IBM का Heron प्रोसेसर भी इसी दिशा में एक कदम है, हालांकि यह सुपरकंडक्टिंग तकनीक पर आधारित है, सिलिकॉन पर नहीं।
अगर क्वांटम कंप्यूटिंग की बुनियादी बातें अभी तक साफ नहीं हैं, तो इतना समझना काफी है: सामान्य कंप्यूटर एक समय में एक हिसाब करता है, क्वांटम कंप्यूटर कई संभावनाएं एक साथ जांच सकता है, इसलिए कुछ खास तरह के जटिल हिसाब में यह बहुत तेज़ हो सकता है।
इसे यूं समझिए: जैसे किसी शहर में पहले सिर्फ किराए की कार मिलती थी, अब पहली बार अपनी गाड़ी खड़ी हो रही है। हमारा आकलन है कि यही फर्क शोधकर्ताओं की रफ्तार और डेटा की सुरक्षा, दोनों में दिखेगा।
भारत के लिए मतलब क्या है
अभी तक भारतीय स्टार्टअप और शोध संस्थान क्वांटम एल्गोरिद्म टेस्ट करने के लिए विदेशी सर्वर पर निर्भर थे, जिसमें डेटा भी बाहर जाता था। Amaravati की मशीन आने के बाद यह निर्भरता कम हो सकती है।
यह कदम India Semiconductor Mission और IndiaAI Mission जैसी योजनाओं के साथ मिलकर, MeitY की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसमें AI, सेमीकंडक्टर और क्वांटम को एक साथ भारत की अगली तकनीकी नींव बनाने की कोशिश हो रही है।
अभी क्या साफ नहीं है
सितंबर 2026 की समय-सीमा सिर्फ 'लक्ष्य' है, अभी तक किसी सरकारी या IBM बयान में पुख्ता तारीख के साथ पूरी कमीशनिंग की पुष्टि सार्वजनिक नहीं हुई है।
यह भी साफ नहीं कि मशीन जनवरी 2027 से पहले आम शोधकर्ताओं और स्टार्टअप के लिए खुलेगी या पहले सिर्फ चुनिंदा साझेदारों तक सीमित रहेगी।
आगे क्या देखना होगा
अगली बड़ी खबर होगी मशीन के Amaravati पहुंचने, इंस्टॉल होने और पहली बार चालू होने की औपचारिक पुष्टि। इसके बाद ही पता चलेगा कि टाइमलाइन सच में पूरी हुई या नहीं।
साथ ही यह भी देखना दिलचस्प होगा कि प्रधानमंत्री के उद्घाटन के बाद टेक पार्क में और कितनी कंपनियां और स्टार्टअप जुड़ते हैं, क्योंकि असली फायदा मशीन से ज़्यादा उसके इस्तेमाल से आएगा।
क्या यह भारत का पहला क्वांटम कंप्यूटर है?
नहीं, भारतीय स्टार्टअप QpiAI का 25-qubit QpiAI-Indus पहले से मौजूद है। Amaravati की मशीन पहला बड़ा, विदेशी कंपनी का बनाया हुआ ऑनशोर सिस्टम है।
आम लोगों को इससे क्या फायदा तुरंत मिलेगा?
तुरंत कुछ नहीं। यह मशीन पहले शोधकर्ताओं, स्टार्टअप और उद्योग के लिए है, आम उपभोक्ता उत्पादों में असर आने में अभी साल लगेंगे।
कंटेनर अभी सड़क पर है, इमारत अभी बन रही है, पर पहली बार भारत का अपना क्वांटम कंप्यूटर घर पर ही खड़ा होने जा रहा है। बाकी कहानी अब इंस्टॉलेशन की तारीख पर टिकी है।