क्या भारत का रॉकेट अब अंतरिक्ष में वे आईने पहुंचाएगा, जो रात में धूप भेजने का दावा करते हैं? Skyroot Reflect Orbital launch सौदे का सीधा जवाब: अमेरिकी कंपनी Reflect Orbital ने 14 अक्टूबर 2026 को बताया कि उसने भारत की Skyroot Aerospace से दो dedicated launch खरीदे हैं। पहली उड़ान Vikram-1 पर होगी, दूसरी विकसित हो रहे Vikram-1U पर। तारीख़ें घोषित नहीं हुई हैं।

इस खबर में दो अलग चीज़ें पास-पास आ जाती हैं: जिस Eärendil-1 उपग्रह को अमेरिका में मंज़ूरी मिली, और भारत से उड़ने वाले 'भविष्य के spacecraft'। प्रेस विज्ञप्ति दूसरे को ही सौदे का हिस्सा बताती है। नीचे देखिए कि सौदे में क्या पक्का है, क्या नहीं, और भारत के लिए दांव कहां हैं।

Reflect Orbital असल में बेच क्या रहा है?

कंपनी कक्षा में पतले, खुलने वाले आईने (reflector) रखना चाहती है, जो सूरज की रोशनी को ज़मीन के चुने हुए ठिकाने पर मोड़ें। Reflect Orbital के अनुसार इससे सौर फ़ार्म की बिजली शाम के बाद भी बन सकती है, और खोज-बचाव दल या निर्माण टीमों को अंधेरे में रोशनी मिल सकती है।

विचार नया नहीं है। Universe Today के मुताबिक रूस का 20 मीटर का Znamya-2 आईना 4 फ़रवरी 1993 को यूरोप के ऊपर करीब 5 किमी चौड़ा, पूर्ण चंद्रमा जैसा उजला धब्बा बना चुका है। फ़र्क पैमाने का है: Reflect का लक्ष्य 2035 तक 50,000 से ज़्यादा reflector का झुंड है।

क्या Skyroot वही आईना उड़ाएगा जिसे अमेरिका में मंज़ूरी मिली?

प्रेस विज्ञप्ति में ऐसा नहीं लिखा है। Reflect ने इन दो उड़ानों को भविष्य के spacecraft के लिए बताया है और कहा है कि ये अमेरिका की उसकी बाकी योजनाबद्ध launch के अलावा हैं। Eärendil-1 का नाम सौदे के साथ नहीं जुड़ा।

अमेरिकी नियामक FCC ने जुलाई 2026 में जिस Eärendil-1 को मंज़ूरी दी, उसकी मुख्य बातें Universe Today के अनुसार ये हैं:

  • 18 × 18 मीटर का खुलने वाला reflector
  • 625 किमी की लगभग ध्रुवीय कक्षा, झुकाव 88 डिग्री
  • लगभग 5 किमी चौड़े क्षेत्र पर पूर्ण चंद्रमा जैसी चमक का लक्ष्य (Reflect Orbital के अनुसार)
  • तीन परीक्षण reflector, तीन-तीन महीने के अंतर पर उड़ाने की योजना

तुलना के लिए, Vikram-I की पहली ऑर्बिटल उड़ान 18 जुलाई 2026 को दोपहर 12:05 बजे (IST) हुई और ISRO के पेज के अनुसार SCOPE और Grahaa उपग्रह निचली कक्षा में पहुंचे। अख़बारी रिपोर्टों में यह कक्षा 450 किमी बताई गई। 625 किमी पर कितना भार जाएगा, यह इसलिए तय नहीं कि आगे के spacecraft का वज़न प्रकाशित नहीं हुआ है।

अमेरिका में रॉकेट हैं, फिर भारतीय रॉकेट क्यों?

Reflect के सह-संस्थापक और CEO Ben Nowack के मुताबिक अभी launch क्षमता की असली कमी है, इसलिए कंपनी नया launch प्रदाता जोड़ रही है। Via Satellite ने इसे launch बाज़ार की तंगी से जोड़कर लिखा। बड़ी कंपनियां भी गति बढ़ा रही हैं: Blue Origin की New Glenn उड़ान-दर बढ़ाने की कोशिश इसी भीड़ का उदाहरण है।

दूसरी वजह निश्चितता है। Skyroot के CEO Pawan Kumar Chandana ने कहा कि दो dedicated launch से तय समय-सारणी और mission में लचीलापन मिलेगा। Dedicated का मतलब है कि रॉकेट किसी दूसरे ग्राहक के साथ बांटा नहीं जाएगा, यानी तारीख़ दूसरे payload की तैयारी पर नहीं टिकती।

पहलूVikram-1Vikram-1U
स्थिति18 जुलाई 2026 को कक्षा तक पहुंचाविकास में
क्षमता (कंपनी के अनुसार)निचली कक्षा में 350 किलो तकअतिरिक्त first-stage booster, बेहतर प्रदर्शन
Reflect का पहला/दूसरा launchपहलादूसरा

खगोलविद इसका विरोध क्यों कर रहे हैं?

Sky & Telescope के अनुसार American Astronomical Society (AAS) ने FCC को चेताया था कि Eärendil-1 से छोटे telescope से देखने वाले शौकिया खगोलविदों की आंखों को नुकसान का ख़तरा हो सकता है। AAS ने यह भी कहा कि वायुमंडल में बिखरी रोशनी दूरस्थ जगहों पर भी आसमान की चमक बढ़ा देगी।

ESO के Oliver Hainaut के शोध का हवाला देकर Sky & Telescope लिखता है कि Reflect का पूरा झुंड आसमान की चमक 2 से 3 गुना बढ़ा सकता है। FCC ने कहा कि ऐसी चिंताएं उसके रेडियो-स्पेक्ट्रम वाले दायरे से बाहर हैं। Reflect के मुताबिक वह खगोलविदों से बात कर रहा है और जब reflector काम में न हो, उसे निष्क्रिय स्थिति में मोड़ने जैसे उपाय सोच रहा है।

भारत के लिए इसका मतलब

Skyroot के लिए यह पहली कक्षीय उड़ान के करीब तीन महीने बाद विदेशी ग्राहक का जुड़ना है। कंपनी के अनुसार उसने मई 2026 में लगभग 6 करोड़ डॉलर जुटाकर 1.1 अरब डॉलर की valuation पर भारत की पहली स्पेस-टेक unicorn का दर्जा पाया। अब परीक्षा एक ऑर्डर से नियमित उड़ानों तक पहुंचने की है। स्पेसटेक की कमाई वाला सवाल ऐसे ऑर्डर से ही हल होना शुरू होता है।

हमारा आकलन है कि इस कारोबार का गणित भारत के लिए दूसरा पहलू भी खोलता है। 5 किमी व्यास का घेरा लगभग 20 वर्ग किमी बैठता है (π × 2.5²)। कक्षा में घूमता reflector एक ठिकाने के ऊपर कुछ ही मिनट रहता है, इसलिए रात भर लगातार रोशनी के लिए बहुत सारे reflector चाहिए। Via Satellite के अनुसार कंपनी 2028 तक 1,000 से ज़्यादा उपग्रह चाहती है।

आसमान की रोशनी पर भारत के नियम पहले से कमज़ोर हैं। The India Forum के अनुसार लद्दाख का Hanle, जहां 4,500 मीटर पर Indian Astronomical Observatory है, देश का इकलौता घोषित dark sky reserve है। वहां प्रकाश प्रदूषण पर कोई राष्ट्रीय कानून नहीं है और reserve के पास कानूनी प्रवर्तन शक्ति भी नहीं।

जो अभी पता नहीं

  • 5 किमी के घेरे में असली चमक कितनी होगी, और उसका आंखों और उपकरणों पर क्या असर होगा, यह उड़ान के बाद ही नापा जा सकेगा।
  • बिखरी रोशनी से आसमान कितना चमकेगा, इसके मॉडल पर AAS ने पहले से ज़ोर दिया है।
  • हज़ारों reflector होने पर exclusion zone और तेज़ दिशा-बदल जैसे उपाय कितने कारगर होंगे, यह साफ़ नहीं है।
  • Vikram-1 की क्षमता में Reflect के भावी spacecraft समाएंगे या नहीं, यह वज़न जाने बिना नहीं कहा जा सकता।

आगे क्या देखें

  • Eärendil-1 की पहली उड़ान, जो Universe Today के अनुसार इस साल के अंत तक हो सकती है।
  • Skyroot की दोनों उड़ानों की तारीख़, जो घोषणा में नहीं बताई गई।
  • DarkSky International जैसे संगठनों की FCC से फ़ैसला पलटने की मांग, Science News के अनुसार, पर आगे क्या होता है।

फ़िलहाल यह रॉकेट की बुकिंग है, आसमान में लगा आईना नहीं। पर भारत से उड़ने वाला हर नया ग्राहक एक सवाल साथ लाता है: वह कक्षा में क्या रखेगा, और रात के आसमान पर उसका असर कैसा होगा।

स्रोत: Reflect Orbital प्रेस विज्ञप्ति, ISRO, Universe Today, Sky & Telescope, Via Satellite, The India Forum